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भड़ास

कायस्थ खबर डायरी :२०१५ मे कायस्थ समाज के चर्चित चेहरे

2015 का आखरी दिन है , जब तक ये लेख  पब्लिश होगा आप मे से अधिकतर लोग नए साल की खुमारी मे जा चुके होंगे , पर कायस्थ खबर के लिए आज इस बात के विश्लेषण का भी दिन है की २०१५ मे कायस्थ समाज मे कौन से चेहरे ज्यदा चर्चित रहे हम लोग कोशिश कर रहे है की ऐसे ...

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वर्ष 2015 की अंतिम बात – कैसा रहा कायस्थ समाज -महथा ब्रज भूषण सिन्हा

वर्ष 2015 के अवसान पर आज हम बैठे हैं कायस्थ वर्ष का लेखा-जोखा लेकर. क्या खोया-क्या पाया? 2015 को हम अपने समाज के लिय कायस्थ वर्ष कहें तो ज्यादा उपयुक्त होगा. इस वर्ष में कायस्थों ने सोशल मीडिया का जम कर दोहन किया. फेसबुक, व्हाट्स एप्प जैसे साधनों का प्रयोग अपने मन की बात कहने-सुनने में अत्यधिक प्रचलित हुआ. परिणाम ...

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कानपुर समागम का यथार्थ – राजनितिक दुश्चक्रों में फंसता कायस्थ समाज -महथा ब्रज भूषण सिन्हा

बहु प्रतीक्षित कानपुर समागम संपन्न हो गया. इसके साथ ही कायस्थ समाज कई प्रश्नों व तथ्यों के भंवर में डूबने व उतराने लगा है. यह समागम राष्ट्रीय कायस्थ महासमागम नाम से प्रचारित था जिससे समाज की आकांक्षाएं एवं उत्कंठाए चरम पर थी. सामजिक नेता भी अपनी-अपनी भूमिका की प्रतीक्षा कर रहे थे तो समाज भी आशा भरी निगाहों से समागम ...

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ऐसे कार्यक्रम से समाज टूटता है न कि जुङता है – दीपक स्मिता श्रीवास्तव

पटना में पहले कायस्थ समागम का कोई मुकाबला नहीं। पटना में आयोजित कायस्थ समागम में लगभग पंद्रह हजार लोग शामिल हुए पर उसके बाद राष्ट्रीय कायस्थ समागम हो या राज्य स्तरीय समागम पटना जैसा जोरदार कार्यक्रम नहीं हो पा रहा है। दुख इस बात का है कि कानपुर में जो राष्ट्रीय कायस्थ समागम हुआ उसमें दो - चार जाने माने ...

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हर सम्मेलन को राष्ट्रीय नहीं कहा जा सकता – MBB सिन्हा

सम्मेलन/समागम कोई करे, अच्छी बात है। पर हर सम्मेलन/समागम को राष्ट्रीय नहीं कहा जा सकता। हमारा निवेदन यही है कि राष्ट्रिय शब्द का दुरुपयोग न हो। दूसरा, राष्ट्रिय स्तर का कोई समागम या सम्मलेन सभी प्रदेशों की तथा सभी संगठनो की सहभागिता के बिना न की जाय। समागम कोई संगठन के बैनर पर होता है और वह संगठन राष्ट्रिय है ...

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यदि आप को उक्त कार्यक्रम पसंद नहीं है तो मत जाइये,लेकिन कार्यक्रम की आलोचना भी न करें – आर के सिन्हा

हम सबके द्वारा कायस्थ समाज का निःस्वार्थ सर्वांगीड़ विकास हेतु "संगत-पंगत "रूपी जो माला गूंथी जा रही है,उसमेँ एक और मोती गुथ गया,जब लखनऊ में भी प्रथम " संगत-पंगत" का आयोजन हुआ।यहाँ पर भी विभिन्न् विचारधारा और संस्थाओँ के लोगों ने कायस्थ समाज के हित लिए बड़े उत्साह से "संगत पंगत "में भाग लिया ।पूरा पंडाल लगभग 500 से अधिक ...

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क्‍या आज हमारा कायस्‍थ समाज इसी ढपोरशंख की तरह हो गया है ? संजीव सिन्हा

ढपोरशंख की कहानी बहुूत सारे लोगों को याद होगी पर कुछ लोगों ने शायद न सुनी हो इसलिए संक्षेप में लिखना चाहूंगाा। पुराने समय में किसी छोटे व्‍यापारी को व्‍यापार के लिए जाते समय रास्‍ते में समुद्र के किनारे एक शंख मिला। व्‍यापारी ने शंख को उठा लिया और उसे बजाया। शंख बजाते ही उसमें से आवाज आई- मांगों क्‍या ...

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समय की मांग है एक सर्वमान्य समिति का गठन:- आदित्य श्रीवास्तव

हम केवल अपने समाज के गौरवशाली इतिहास का गुणगान करते रहते है और समाज मे एकता का रोना रोते रहते है।जबकि मुझे लगता है समाज मे एकता की और एक होनी की भावना की कमी नही बस बैचारीक मतभेद और अविश्वास की भावना है। चूकि हमारा समाज बुद्धजिवि है तो मतभेद होना लाजमी है।अब हम अन्य जातियो और समाज से ...

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आर0 के0 सिन्हा आज के दौर मे सर्वमान्य सच्चे और आदर्श कायस्थ नेता है – आदित्य श्रीवास्तव

समाज से जुडी गतिविधियो पर ध्यान देना और कायस्थ नेताओ से मिलकर समाज के प्रति उनकी सोच और समाज के लिए किये जा रहे उनके कार्यो के बारे मे जानकारी रखने की मेरे मन मे बहुत उतसुक्ता रहती है पर बहुत दुख होता है ये देखकर की 25-30 सालो से जो संगठन समाज के लिये कार्य करने का दाबा करते ...

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फिर एक सवाल ? -धीरेन्द्र श्रीवास्तव

कब तक हम अपने स्वार्थो की पूर्ति के लिये "कायस्थ" समाज के एकता व विकास के हितो को आघात पहुचाते रहेंगे? क्या हम अपने संगोष्ठी प्रकृति के अथवा जनपद स्तरीय कार्यक्रमों को राष्ट्रीय/ अखिल भारतीय नाम देकर अपने समाज का उपहास नही करते है? राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व के नाम पर दूसरे जनपदों से आये चन्द लोग जो स्वयं किसी के दबाव ...

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