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चौपाल

कतिपय व्यक्तियो द्वारा “कायस्थवृन्द” के नाम से मिलते- जुलते नाम से किसी प्रकार की संस्था का पंजीकरण करा कर भ्रम फैलाया जा रहा है, आवश्यकता पडने पर विधिक कार्यवाही भी की जायेगी- डा०अरविन्द्र श्रीवास्तव

"कायस्थवृन्द" कोई संगठन नही विचारधारा है जिसका मानना है कि कायस्थ एकता व विकास हेतु एकल नेतृत्व नही अपितु सामूहिक नेतृत्व ही सक्षम है. "कायस्थवृन्द" की प्रथम बैठक 12 अप्रैल 2015 को मीरजापुर में, द्वितीय बैठक 12 जुलाई 2015 को इलाहाबाद में,तृतीय बैठक 24 व 25 अक्तूबर 2015 को गिरीडीह में व चतुर्थ बैठक 9 व 10 जनवरी 2016 को ...

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कायस्थ वृन्द की पाँचवी बैठक आगरा में आप सब सादर आमंत्रित है – डॉ अरविन्द श्रीवास्तव

कायस्थ वृन्द की पाँचवी बैठक आगरा में आप सब सादर आमंत्रित है क्योकि शायद कुछ मित्र गण ये सोच रहे होंगे की मुझे कोई निमंत्रण पत्र नहीं मिला। आप सब को बताना चाहूँगा कि न निमंत्रण पत्र न मंच न माला जो समाज और संगठनो के समर्पित कार्यकर्त्ता हैँ उनका सदैव कायस्थ वृन्द की सामूहिक नेतृत्व की अवधारणा में स्वागत ...

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संजीव जी विवाद का मुख्य कारण स्वयं सर्वश्रेष्ठ समझना , और अपनी हाउस वाईफ के अंदर नेतृत्व का गुण 0 होते हुए भी , शिखर पर बिठाने की लालसा है – ब्रजेश श्रीवास्तव के गंभीर आरोप

श्री संजीव सिन्हा जी , आप के द्वारा चेतावनी दिये जानें के बाद और बहन कविता सक्सेना की सलाह एवं अन्य लोगों की सलाह के बाद हमने आप का नाम के अलावा पोस्ट ही लिखना बंद कर दिया था , लेकिन मेरे भाई आज 20/57 पर लिखें गये आप के इस पोस्ट " जो डा . अरविन्द सर को इंगित है ...

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संजीव सिन्हा द्वारा दिए ज़बाब पर डा अरविन्द का जबाब

संजीव सिन्हा द्वारा दिए ज़बाब पर डा अरविन्द ने अपनी बात राखी है संजीव भाई शायद आप भूल रहे है कि मैंने आपसे भी अल्लाहाबाद बैठक में कहा था कि आप किसी सामाजिक संगठन से अभी नही जुड़े है आपको मै abkm से कही ज़िला प्रदेश कही जुड़वा दू जब श्रीमति नीरज जी abkm की लखनऊ बैठक में बुलाया था ...

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डा अरविन्द की नसीहत पर संजीव सिन्हा का पलटवार 

मा. डा. अरविन्द जी, आप लखनऊ की किस बैठक की बात कर रहे है? मार्च 2015 धीरेंद्र जी जब लखनऊ आकर मिले तो उस दिन पंकज भैया सहित कुछ लोगों से अलग अलग मुलाकात हुयी थी, कोई बैठक नही हुयी थी। तो फिर खाता खोलने की बात कहा से आ गयी। रहा सवाल कि के.पी. ट्रस्ट के रहते नया ट्रस्ट ...

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कायस्थवृन्द या कोई सामाजिक संगठन किसी की निज़ी जागीर नही हो सकती – डा अरविन्द श्रीवास्तव

तमाम विवादो में हमेशा शांत रहने वाले कायस्थ वृंद के राष्ट्रीय संयोजक डा अरविन्द श्रीवास्तव ने आखिर कार संजीव सिन्हा के लगातार बयानों और विवादों पर आपना आक्रोश बम फोड़ ही दिया I गौरतलब है की डा अरविन्द हमेशा ही शांत रहने और सीधी बात कहने के लिए जाने जाते हैं I कायस्थ वृंद में राष्ट्रीय संयोजक के तोर पर ...

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कायस्थ वृंद की प्रथम सालगिरह का दिन, एक सुखद, स्मरणीय, ऐतिहासिक यात्रा- डा ज्योति श्रीवास्तव

12अप्रैल, 2015(मीरजापुर) से 12 अप्रैल, 2016........कायस्थ वृंद की प्रथम सालगिरह का दिन..... एक सुखद, स्मरणीय, ऐतिहासिक यात्रा....... जिसके जितने पक्ष देखें, उतने भिन्न पहलू दृष्टिगत होंगे | इस महत्वपूर्ण दिन पर कायस्थ वृंद संस्थापक श्री धीरेन्द्र श्रीवास्तव जी, राष्ट्रीय संयोजक डा०अरविंद श्रीवास्तव जी तथा कर्मठ समन्वयक श्री संजीव सिन्हा जी सहित अन्य सहयोगी जन को हार्दिक बधाइयाँ!!! कायस्थ वृंद की ...

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कायस्थ वृंद : सामूहिक नेतृत्व का एक साल , कितने दूर कितने पास ?

१२ मार्च २०१७  , आज  सामूहिक नेतृत्व की जिस अवधारणा को मिर्जापुर में डा अरविन्द  के घर पर इसके  प्रमुख सदस्यों के साथ धीरेन्द्र श्रीवास्तव और डा अरविन्द ने शुरू किया था उसको १ साल हो गया है I समाजवाद  की समतामूलक , समावेशी कार्यशैली को आधार मान कर इसकी परिकल्पना की गयी और फिर शुरू हुआ कायस्थ समाज के सभी ...

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नव वर्ष (संवत्सर २०७३) की हार्दिक शुभकामनाये ,समय पिछले वर्ष के अवलोकन और आगे की राह पर चलने का है – आशु भटनागर

दोस्तों आज से नवसंवत्सर २०७३ शुरू हो रहा है I राजा विक्रमादित्य द्वारा शुरू किये गये इस हिन्दू पंचांग के तहत चैत्र मॉस के प्रथम दिन से ही नये साल का प्रारंभ माना जाता है I भारतीय संस्कृति में प्रकर्ति को पूजने की परम्परा रही है इसलिए ऋतू चक्रों के बदलाव के इस दौर में हम पहले नौ दिन को ...

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देश में कागजी संस्थाएं बहुत सी काम करती हैं लेकिन हमारी महासभा अकेली ऐसी है जो न केवल अपनी प्राचीनता 125 वर्ष में अद्वितीय है – कैलाश सारंग

तेरा वैभव अमर रहे माँ! हम दिन चार रहें न रहें...पिछले कुछ दिनों से मन और मस्तिष्क की सक्रियता अधिक रही, शरीर की कम। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, जो हम सबकी मातृ-संस्था है, पूरे स्वरूप के साथ मन में छाई रही। कभी भी छाई हुई है उसकी संपूर्ण यात्रा मानों सजीव हो उठी, उस कालखंड की भी जब मैं नहीं ...

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