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Home » चौपाल » अनकही (page 2)

अनकही

दुनिया वालों अपने घर में चाहे हम जितना विवाद करें पर अपने परिवार के किसी भी सदस्य के सम्मान पर आँच भी आए, ये बर्दाश्त नहीं करते – डा ज्योति श्रीवास्तव

साथियों, जब भी हम एकता की बातें करते हैं सर्वथा निराशाजनक स्थिति ही दृष्टिगत होती है। हम स्वत:अपनी हास्यास्पद तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। परिणामत: बिखरे समाज पर प्रहार किसी के लिए भी बहुत सरल हो जाता है। जबअपने घर में द्वंद्व छिड़ता है, दूसरे लाभ लेते ही हैं। समाज के शीर्षस्थ ही केंद्रबिंदु बनते हैं।आज भी कुछ ...

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सीधी बात : बीती घटनाओं को पीछे छोड़ आगे बढ़ने के लिए आज कितने लोग तैयार हैं, ए॰के॰ श्रीवास्तव जी के पहल को साधुवाद- महथा ब्रज भूषण सिन्हा

जब एक प्रतिपक्षी पक्ष अपने धुर विरोधी पक्ष को जातिगत एकता का संदेश देता है तो इसके निहितार्थ बहुत बड़े हो जाते हैं। यह संकेत बीज को अंकुरित होने की घटना जैसी है। अगर उचित वातावरण मिला तो वह अंकुरण बड़ा वृक्ष बन सकता है, अन्यथा अंकुर ही नष्ट हो जायगा। बीती घटनाओं को पीछे छोड़ आगे बढ़ने के लिए ...

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सावधान ! कायस्थ समाज मे अश्वमेध यज्ञ के दो दिव्य युवा घोड़े छोड़े गए हैं, इन्हें इनके आका दिव्य महापुरुषों की ओर से मंत्र पूरित दोधारी तलवार दिये गए हैं – सर्वानन्द सर्वज्ञानी

सावधान ! कायस्थ समाज मे अश्वमेध यज्ञ के दो दिव्य युवा घोड़े छोड़े गए हैं। वे आपको बताएँगे कि भगवान श्री चित्रगुप्त की दो पत्नियाँ कौन से कुल की थी? आपके पूर्वजों की शादियाँ किस खानदान मे हुई थी? फिर शायद आपसे पुछेंगे- आपकी शादी? इनके पास दो रजिस्टर हैं- लुच्ची और शुचि। अगर आप लुच्ची रजिस्टर के हुये तो ...

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असल मुद्दे छोड़ सजातीय विजातीय के मुद्दे पर उलझा कायस्थ समाज – आशु भटनागर

कायस्थ समाज में हफ्ते भर से कुछ लोग शोर मचाये हुए है की जिन लोगो ने विजातीय शादी कर ली है उनको समाज से बाहर कर दिया जाए , समाज में उनसे कोई रिश्ता ना रक्खा जाए I समाज के तमाम मुद्दों से इतर अचानक उठे इस मुद्दे को समाज में प्रभावहीन हो चुके नेताओं की एक बार फिर से ...

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आपबीती : जब आपातकाल ने छीन ली मुझसे मेरी बहन – अशोक श्रीवास्तव

1975 के आपातकाल को मैं कभी नही भूल सकता। ये आपातकाल एक बार नहीं दो बार मुझ पर पहाड़ बन कर टूटा है। 1975 में और फिर 2004 -2005 में। पहले बात 1975 की , मैं बहुत छोटा था जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश मे इमरजेंसी लगाने का ऐलान किया। मुझे ठीक से याद नहीं पर एक दिन ...

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संस्मरण : कायस्थखबर को आर के सिन्हा जी से मिली सीख-क्रोधरूपी राक्षस की ताकत तभी घटती हैँ, जब इंसान अपने आपको संतुलित रखता हैँ, हर समय मुस्कुराता रहता हैँ

आशु भटनागर I आज शाम एक फ़ोन आया, सामने से मेरे मित्र स्वरुप अनुज ने कहा की भैया कुछ लोग लगातार सोशल मीडिया पर आपको लेकर तरह तरह की बातें कर रहे है I लगातार अनेक प्रकार की धमकियाँ , बहिष्कार और चरित्रहनन की बातें हो रही है I कुछ लोगो ने पत्थरबाज़ हायर कर लिए है जो आपको लेकर ...

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खुला पत्र : साथियों आप सब मेरी ताकत हो आप सब कायस्थ युवान हो ,आप सब कायस्थ समाज के कर्णधार हो : कवि स्वप्निल श्रीवास्तव

आत्मीय साथियों , यह पत्र मैं कायस्थ युवान से जुड़े सभी साथियों को लिख रहा हूं आजकल बहुत सारे लोग हमसे यह पूछने लगे हैं कि कायस्थ युवान किस प्रकार से अन्य संगठनों से अलग है सोचा आज जवाब दिया जाए। साथियों हमारे संगठन का कोई भी पदाधिकारी कहीं पर किसी भी WhatsApp ग्रुप में अपने मानसिक दिवालियापन का परिचय ...

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रविवार विशेष : हम मदारी हैं??? अच्छा अच्छा चल रे मुन्नू नाच तो जरा….. हाँ ऐसे ही…. शाबाश… हाँ लगा ठुमका-कवि स्वप्निल

साहेबान,कद्रदान, भाई जान आईये खेल दिखाता हूँ, आईये हजरात आईये गुदगुदाता हूँ, हँसाता हूँ। आईये आईये घेरा बनाइये और देखिये इस मदारी का कमाल। कैसे नाचेगा बन्दर, कैसे करतब दिखायेगा भालू,कैसे बिल्ली खम्भा नोचेगी, सब दिखाऊंगा। हाँ जी साहब! क्या बन्दर का नाच??? अच्छा अच्छा चल रे मुन्नू नाच तो जरा..... हाँ ऐसे ही.... शाबाश... हाँ लगा ठुमका.... लाओ जी ...

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व्हाट्सएप ग्रुपों को छोड़ना धीरन्द्रश्रीवास्तव की हताशा या कायस्थ वृन्द को नयी दिशा देने की कोशिश है

कायस्थखबर डेस्क I सोशल मीडिया में एक वक्त ऐसा भी आता है जब आप लगातार सैकड़ो ग्रुपों में होने के बाद उन्हें छोड़ना शुरू कर देते है या उनसे उदासीन होना शुरू कर देते है I ये एक स्वाभविक स्थिति है और इसकी जब में हर एक सेलिब्रिटी राजनेता , समाज सेवी एक दिन आता है I दरअसल ये सोशल ...

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कानाफूसी : एक नारी-दुखिया बेचारी, समाज सेवियों की समझ भी हारी : जानिये सोशल मीडिया पर जोड़ तोड़ का अनोखा खेल

कायस्थ खबर डेस्क I कायस्थसमाज में  समाजसेवियों की नेतागिरी सोशल मीडिया तक ही सिमट कर रह गयी है I एक नारी-दुखिया बेचारी, समाज सेवियों की समझ भी हारी ऐसे ही आज कल खूब चर्चे है I हालत है ये की एक महिला नेत्री के सहयोगियों को आजकल खुद ये ही नहीं समझ आ रहा की वो किसके साथ है और किसके ...

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