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गीत/कविता

सर्वानंद जी खबर लाये है : एक रहिन ईर, एक रहिन बीर, एक रहिन फत्ते , एक रहिन हम….

सर्वज्ञानी सर्वानंद जी आज कल होली के मूड में है तो होली के फाग ही गा रहे है आप ने बच्चन जी की एक पुरानी कविता सुनी होगी एक रहिन ईर, एक रहिन बीर, एक रहिन फत्ते , एक रहिन हम, एक रहिन ईर, एक रहिन बीर, एक रहिन फत्ते , एक रहिन हम। पर भांग तनिक ज्यदा हो गयी ...

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होली का फाग : होली है भाई होली है – महथा ब्रज भूषण सिन्हा

होली है भाई होली है होली बोली मत कर ठिठोली, मेरे नाम सब कहते हो. मैं हूँ उल्लास पर्व, मेरे नाम को क्यूँ बदनाम करते हो. देख लो एक तुम्हारे बड़े भाई हैं. देश में घूम-घूम कर कई चपातियाँ खायी हैं. अभी भी यह क्रम जारी है. लगता है यह उनकी क्रोनिक बीमारी है. पटना में पंगत पे पंगत लगाई ...

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होली का फाग : हमें दुःख होता है तब जब हमें अंकल कह बदनाम करते हैं – MBB सिन्हा

हमें दुःख होता है तब जब हमें अंकल कह बदनाम करते हैं. देखते ही मुझे अंकल कह प्रणाम करते हैं. हम चाचा हैं तीस बरस के, चाची बीस के लगती है. चाचा बिग लगाते हैं, पर चाची सबकी लगती है. सभी भतीजों को मैं कहता, कहीं भ्रम फैलाओ मत. केवल ग्रुप में जुड़-जुड़कर, उधार का अक्ल लगाओ मत. देखा तुम ...

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वक्त है, रणभेरियों को फूकने का -राकेश श्रीवास्तव

वक्त है, रणभेरियों को फूकने का फूंक कर , कर दो शुरू संग्राम अब नव एकता का. आज के सूरज ने उगाया दिन नया रोशनी लाई है नव संचेतना. चित्र के चित्रांशी हम बुद्धि के सरताज हैं ब्रह्म के ब्रह्मांड में करते रहे हम राज हैं वक्त ने अंगड़ाइयां ले खेल ऐसा कर दिया काहिली की गर्दिशों से ताज अपना ...

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मगर जीवन नहीं छिना करता है -राम पाल श्रीवास्तव ‘अनथक ‘

सब कुछ छिन जाता है , मगर जीवन नहीं छिना करता है  कण - कण प्रस्तर चूर्ण बनकर दर्पण नहीं मरा करता है दिव्य सुधावर्षण नभ - व्योम से , पल में क्षण छिन जाता है चतुर्दिक आभा हो किंचित, मगर अवसर नहीं मरा करता है , सब कुछ छिन जाता है , मगर जीवन नहीं छिना करता है | ...

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एक दिन वो अपना और आपका नाम रौशन कर आएगा

आप नमक मेँ चीनी की मिठास ढूँढोगे तो मिलेगा क्या...?? आप चीनी मेँ नमक का स्वाद ढूँढोगे तो मिलेगा क्या..?? नहीँ ना.? आप कुछ ऐसे डॉक्टर, इंजिनीयर, बैँक मैनेजर का नाम बताओ भारत के, जिसको पूरा विश्व जानता हो..?? शायद आप एक भी नाम ना बता पाओ...!! फिर आप बच्चोँ को ऐसी बात की शिक्षा दिलवाने पर क्योँ तुले हो, ...

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उठ चित्रांश उठ, मै बोल रहा हूँ चित्रगुप्त – चित्रांश अम्बरीश स्वरुप सक्सेना

उठ चित्रांश उठ, मै बोल रहा हूँ चित्रगुप्त हाँ चित्रगुप्त, अपने खानदान के बीच हो चुका हूँ लुप्त। हमारे ज़माने में हमें ब्रह्मा ने बताया था जिसके जितने ज्यादा बेटे होंगे, वो उतना ही बड़ा इन्सान होगा सुखी संपन्न होगा,पढ़ा-लिखा ज्ञान-वान होगा। यही सोचकर, सही सच मानकर, मेरे (चित्रगुप्त) हुए बारह बेटे पर अम्बरीश , हम निकले किश्मत के खोटे। ...

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