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बदलते सिद्धांत : शत्रुघ्न सिन्हा और सुबोध कान्त सहाय का प्रचार करने वाले ABKM के नेता उनको भूलकर रविशंकर प्रसाद और जयंत सिन्हा को बधाई देते दिखे

कायस्थ खबर डेस्क I कायस्थ समाज के नेता किस तरह मौका देख कर अपनी भाषा बदल देते है ये आज अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप माथुर के सोशल मीडिया में जारी एक पोस्ट के बाद दिखा I पोस्ट में  बीजेपी के जीते हुए दो नेताओं रविशंकर प्रसाद और जयंत सिन्हा को जीतने की बधाई देते हुए बताया जा रहा है की उन समेत ABKM के सभी नेता बीजेपी के कायस्थ नेताओ का प्रचार कर रहे थे I  कायस्थ समाज में इसको लेकर उत्सुकता से ज्यदा मौकापरस्ती समझा जा रहा है I क्योंकि कायस्थ खबर से बातचीत में ABKM के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध कान्त सहाय और कार्यकारी अध्यक्ष राजीव रंजन दोनों ही ने बताया था की ABKM किसी दल के प्रचार में नहीं आ रही है

तो क्या सिर्फ जीतने वाले प्रत्याशियों के लिए ऐसी समर्थन और बधाई की पोस्ट और हार जाने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध कान्त सहाय के नाम से भी परहेज करना  ऐसे संगठनो और उसक एनेताओ पर प्रशन चिन्ह नहीं लगाता है I

क्या वाकई पटना में ABKM के लोग शत्रुघ्न सिन्हा की जगह रविशंकर प्रसाद का ही प्रचार कर रहे थे ?

ऐसे में एक बड़ा सवाल ये भी खड़ा हो गया है की १४ मई से १७ मई तक पटना में रहे ABKM के बिभिन्न नेता वहां रविशंकर प्रसाद का प्रचार कर रहे थे  या फिर शत्रुघ्न सिन्हा का I कहीं ऐसा तो नहीं ये लोग प्रचार से ज्यदा दोनों नेताओं से मिलकर फोटो खिचाने के उपक्रम में ज्यदा लगे  ताकि जो जीत जाए उसके साथ के फोटो जारी कर दिए जाए

कायस्थ नेताओं की इस तरह मौका परस्ती को अगर समाज हित में देखे तो समाज का भविष्य शून्य है क्योंकि इसका मतलब साफ़ है की इस सभी सामाजिक नेताओं का प्रभाव समाज पर शून्य है लेकिन राजनेताओ से सम्बन्ध और फायदे लेने के लिए ये सब उपक्रम होते दीखते है और शायद सामाजिक नेताओं की ऐसी ही ढुलमुल रविये और आदतों के चलते राजनैतिक दलों में ना उनको और न ही कायस्थ समाज में गंभीरता से लिया जाता है I

हम इस सब पर आखरी निरनय कायस्थ समाज के नातावा और जनता दोनों पर छोड़ते है आप भी नीचे देखिये  उस पोस्ट को और फैसला कीजिये की आखिर कायस्थ समाज की दुर्दशा के कारण क्या है ?

 

 

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