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कायस्थ खबर परिचर्चा एवं संवाद: सोशल मीडिया और युवा राजनीति पर हुआ गहन मंथन

रोहित श्रीवास्तव।। उल्लेखनीय है कि 21वी शताब्दी मे सोशल मीडिया ने देश-विदेश की राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक अभिव्यक्तियों पर काफी प्रभाव डाला है जिसके हमे कई क्षेत्रो मे लाभकारी परिणाम भी देखने को मिले हैं। खास कर आज के दौर मे बात अगर राजनीति की की जाए तो सोशल मीडिया ने किसी राजनेता और राजनीतिक पार्टी की ‘हवा’ बनाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाईं है। अगर देखा जाए वर्तमान के पीएम और तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री की लोकसभा 2014 मे भारी जीत सोशल मीडिया के प्रभाव का जीता-जागता प्रमाण है।

शायद उसी ‘प्रभाव’ को समझने के लिए नोएडा के एक्स्पो सेंटर मे कायस्थ खबर ने पिछले रविवार ‘सोशल मीडिया और युवा राजनीति’ पर परिचर्चा एवं संवाद का आयोजन किया। आपको बता दें आयोजको द्वारा इस अहम चर्चा के लिए अलग सत्र का आयोजन किया गया था जिसमे लखनऊ से आए कायस्थ विकास परिषद के अध्यक्ष श्री पंकज भैया, श्रीमति कविता सक्सेना, काँग्रेस के श्री सुदर्शन सक्सेना, आम आदमी पार्टी के श्री संजीव निगम वक्ताओ के रूप मे शामिल हुए।इस चर्चा सत्र का संचालन कायस्थ खबर के सह-संपादक श्री रोहित श्रीवास्तव और कायस्थ खबर सक्रीय सम्मान के मुख्य-समन्वयक श्री धीरेन्द्र श्रीवास्तव ने किया।

सोशल मीडिया (फेसबूक) पर बनने वाले छोटे-बड़े (कायस्थों) ग्रुपों की बढ़ती संख्या पर जब कविता सक्सेना से प्रश्न पूछा गया तो उन्होने कहा “प्रश्न ग्रुप के बनने का नहीं है, प्रश्न यह है कि क्या ग्रुप मे मौजूद लोग अपनी भाषा मे संयम दिखा पाते हैं? पंकज भैया से जब रोहित श्रीवास्तव ने पूछा कि “आपको लगता है कि सोशल मीडिया वाकई मे कायस्थ एकता और युवाओ को राजनीति मे जोड़ने की कवायद मे मदद करता है? जिसके जवाब मे उन्होने कहा “हाँ यह बिलकुल संभव है, सोशल मीडिया आज पहले से ज्यादा काफी परभावी हो गया है”

एक अगले प्रश्न मे जब रोहित श्रीवास्तव ने उनसे पूछा “सुना है आप फेसबूक के प्लैटफ़ार्म पर 2 करोड़ कायस्थों की मुहिम चला रहे हैं?

पंकज भैया ने कहा (एक बड़ी मुस्कुराहट के साथ) “देखिये, यही तो सोशल मीडिया का प्रभाव है, आपने खुद प्रश्न मे ही उत्तर दे दिया है। आपको मालूम है कि ऐसी कोई मुहिम चलाई जा रही है। ऐसे ही हम अपने चित्रांश बंधुओ को देशभर मे इससे जोड़ेंगे।

श्री धीरेन्द्र श्रीवास्तव के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए ‘आप’ के संजीव निगम ने कहा कि ‘यह सोशल मीडिया का ही प्रभाव था जिसने अन्ना आंदोलन को सफल बनाया था और युवाओ को इस आंदोलन से जुडने के लिए प्रेरित किया था। चर्चा के दौरान अपने विचार रखते हुए काँग्रेस के सुदर्शन सक्सेना ने भी सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को स्वीकारा।

एक अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न मे जब रोहित श्रीवास्तव ने सभी वक्ताओ से पूछा कि क्या हमे नेताजी सुभाष चंद्र बॉस और लाल बहादुर शास्त्री के रहस्मयी मौतों की सच्चाई को सरकार से उजागर करवाने की मांग के साथ सोशल मीडिया पर एक मुहिम (आंदोलन) छेड़नी चाहिए।

जिसके जवाब ने सभी ने इस पर हामी भी भरी और खास कर नेताजी सुभाष चंद्र बॉस की फाइलों को ‘पब्लिक’ करने पर सभी एकसुर मे सहमत लगे। हालांकि पंकज भैया ने कहा हमे लाल बहादुर शास्त्री और सुभाष चंद्र बॉस के अलावा और कायस्थ महापुरुषो को वही सम्मान देना चाहिए जिसके वे हकदार हैं।

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