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क्यों जरूरत पड़ी कायस्थ-कॉन्फ्रेंस के आयोजन की? कॉन्फ्रेंस का आंखों-देखा हाल

इसमे कोई शक नहीं है कि कायस्थ समाज आज के आधुनिक भारत मे सबसे बिखरा और भटका हुआ समाज है। माना की आज भी कायस्थों का भारतीय समाज मे वो स्थान बिलकुल बरकरार है जिसका आधार हमारे महान एवं ऐतिहासिक महापुरुषों के द्वारा रचा गया स्वर्णिम और गौरवपूर्ण इतिहास है जो सभी चित्रांशों के लिए प्रेरणास्रोत भी है। प्रश्न यह है कि इस बिखराव और एकता मे कमी के मुख्य कारण क्या है। शायद उन्ही कारणो का अवलोकन और चिंतन करने के लिए श्री प्रकाश श्रीवास्तव जी के नेत्रत्व मे द्वितीय वर्ल्ड कायस्थ कॉन्फ्रेंस का आहवाहन किया गया था। जिसका दिनांक 15.03.2015 को सफल आयोजन एक ‘संकल्प’ और ‘मिशन’ के साथ सम्पन्न हुआ। श्री ए सी भटनागर एवं संयोजक श्री अशोक श्रीवास्तव की नेशनल कायस्थ एक्शन कमिटी के साथ कॉन्फ्रेंस का सहयोग देश की विभिन्न कायस्थ संस्थाओ ने पूरे ज़ोर से किया। हर चित्रांश ने अपनी क्षमतानुसार यथासंभव मदद की।

इस कॉन्फ्रेंस मे चुनौतियों से भरे इकीस्वीं शताब्दी में कायस्थों को एकता, अखंडता, कयास्थ युवाओ के लिए रोज़गार के नये आयाम, उतरोतर शिक्षा के संसधान, सामाजिक एवं राजनितिक सशक्तिकरण के विस्तार पर चर्चा तथा कायस्थ महिलाओं का सशक्तिकरण पर ज़ोर के साथ दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों का दमन, मुख्य एजेंडे मे थे। इन बिन्दुओ की चर्चा कॉन्फ्रेंस मे विस्तार से हुई और लोगो के बीच ‘विचारो’ और उनके द्वारा दी गयी ‘रायों’ का आदान प्रदान हुआ।

कॉन्फ्रेंस मे देश-विदेश से आए कायस्थ-संगठन एवं चित्रांश

धर्मराज चित्रगुप्त महाराज की आरती के साथ कॉन्फ्रेंस की औपचारिक शुरुआत हुई। तालकटोरा स्टेडियम मे हुई इस कॉन्फ्रेंस मे देश-विदेश के चित्रांशों ने भाग लिया। आयोजन समिति ने सभी लोगो का रजिस्ट्रेशन करवाते हुए, माथे पर चन्दन लगाते हुए सभी चित्रांशों का ‘जय चित्रगुप्त महाराज’ के अभिवादन के साथ स्वागत किया। अगर दुबई से श्री रूपेश माथुर आए थे तो इलाहाबाद से कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष टी पी सिंह ने प्रोग्राम मे पहुँच कर इसकी गरिमा बढ़ाई। जयपुर से श्री शिव चरण माथुर आए तो भोपाल से वी पी श्रीवास्तव, आगरा से कायस्थ समाज के कर्मठ लोगो मे से एक श्री सुरेन्द्र कुलश्रेष्ठ भी कॉन्फ्रेंस मे मौजूद थे। नेपाल से चल कर आनंद मोहन और शिव चंद लाल आए। कायस्थों की विभिन्न शहर फरुखाबाद, जोधपुर, इंदौर, गाज़ियाबाद की संस्थाओ के प्रतिनिधि कॉन्फ्रेंस मे अपनी भागीदारी दर्ज की। “कायस्थों की सामाजिक पृष्ठभूमि समाज” नामक महत्वपूर्ण किताब लिखने वाले अशोक कुमार वर्मा भी पहुंचे। डीपीएस भागलपुर के प्रो-वाइस प्रेसिडेंट श्री राजेश श्रीवास्तव, दिल्ली पुलिस के एसीपी सुधीर सक्सेना भी कॉन्फ्रेंस मे उपस्थित थे। चित्रांशों अनुरंजन श्रीवास्तव, मनीष श्रीवास्तव, विवेक श्रीवास्तव, संदीप अनिल सक्सेना, श्रीवास्तव, मयंक श्रीवास्तव, रोहित श्रीवास्तव, नितिन श्रीवास्तव, आशु भटनागर, विवेक चन्द्, ए एस दस, मुकेश सिन्हा ने कॉन्फ्रेंस के बाबत उन्हे सौपी गयी जिम्मदारीया अच्छे से निभाई।

कार्यक्रम मे मौजूद थे विशिष्ट अतिथि

इस कार्यक्रम मे राज्यसभा सांसद और एसआईएस ग्रुप के मुखिया चित्रांश रवीद्र किशोर सिन्हा के अलावा केंद्रीय मंत्री और चित्रांश रविशंकर प्रसाद ने मुख्य अतिथि के रूप मे अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री लाल बहादुर शास्त्री की पुत्रवधू और समाजसेविका श्रीमति नीरा शास्त्री भी कार्यक्रम मे उपस्थित थी। प्रशासनिक अधिकारी डॉ अनूप श्रीवास्तव, अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष चित्रांश चक्रपाणि महाराज, महामहिम कपाली जी महाराज, श्री विनोद बिहारी वर्मा भी विशिष्ट अतिथियों मे शामिल थे।

कॉन्फ्रेंस मे हुई सभी मुख्य बिन्दुओ पर बात, क्या निकला परिणाम?

अशोक श्रीवास्तव ने द्वितीय वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस की मंच से अगुवाई की। देश के विभिन्न स्थानो से आए लोगो को मंच देकर उनकी बात दूसरे चित्रांशों तक पहुंचाने की कोशिश की गई। संजीव भटनागर ने सुझाव दिया की हमे अपने बच्चो को अपने इतिहास और पूर्वजो की जानकारी देते हुए कायस्थ संस्थाओ से जोड़ना चाहिए, अरुण कुमार ने कहा “कायस्थों को किसी के ‘सपोर्ट’ की जरूरत नहीं, वे अपने दम पर सब कुछ हासिल कर सकते हैं उन्हे बस अपने लक्ष्यो पर फोकस करने की आवश्यकता है। कुलदीप कुमार सक्सेना ने कहा की वो चित्रांश राजा राम मोहन राय ही थे जिन्होने समाज की कुरीति सती-प्रथा को खत्म किया था। अब हमारे समाज का ही फर्ज़ है की हम दहेज प्रथा को भी खत्म करें, मुझे विश्वास है यह काम भी हम ही करेंगे। एक चित्रांश ने कहा हमे सोचना चाहिए की हम “कहाँ से आए थे ..... और कहाँ आ गए हैं”। अशोक श्रीवास्तव ने बताया धर्मराज चित्रगुप्त भगवान ही कलयुग मे एकमात्र जीवित भगवान है, प्रथम से अंतिम मनुष्य के कर्मो का लेखा-जोखा चित्रगुप्त जी को करना है अर्थात जब तक संसार है तब तक ‘चित्रगुप्त महाराज का अस्तित्व है”। जोधपुर से आए अनिल माथुर ने सुझाव दिया कि सभी चित्रांश मिलने पर ‘जय चित्रगुप्त’ कह कर एक-दूसरे का अभिवादन करे। एक स्वर मे सबकी राय थी की राजनीतिक चेतना जगाना कायस्थ समाज के लिए अत्यंत जरूरी हो गया है क्योंकि कोई भी राजनीतिक पार्टी कायस्थ समाज को ज्यादा महत्व नहीं देता है। गौरतलब है की पिछले लोकसभा चुनाव और विधान सभा चुनावो मे भी पार्टियो ने कायस्थ समाज के लोगो की अनदेखी की। निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि 21वी शताब्दी मे चित्रांशों की एकता के माध्यम से ‘चेतना’ और ‘जागरूकता’ पैदा करके कायस्थ समाज का उत्थान करना ही एकमात्र विकल्प है। चंडीगढ़ से आए निगम जी ने ‘एकता’ का एक उपयुक्त उदाहरण भी दिया जिसमे उन्होने बताया कि किस तरह चंडीगढ़ मे शिव मानस मंदिर से धर्मराज चित्रगुप्त महाराज की मूर्ति मंदिर प्रशासन द्वारा हटा दी गई, फिर सोशल मीडिया कायस्थों के भारी विरोध को देखते हुए मूर्ति की पुनः स्थापना की गई।

मंच से चित्रगुप्त जयंती (गंगा सप्तमी मे) के दिन शुभकामनाओ संदेश का आदान-प्रदान हो, और प्रथम राष्ट्रपति स्व. डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती को चित्रांश दिवस के रूप मे मनाने की अपील की गई। सभी आए गणमान्य लोगो ने कॉन्फ्रेंस के मुख्य आयोजक श्री प्रकाश श्रीवास्तव के कार्यो की भारी प्रशंसा की। श्री टी पी सिंह ने कहाँ देश मे तमाम छोटी-बड़ी कायस्थ संस्थाए कायस्थों की एकता मे बाधक है। एक केंद्रीय-बॉडी बनाई जाए जिसमे सभी संस्थाओ का प्रतिनिधित्व हो, और वो ही कायस्थ समाज की दशा और दिशा निर्धारित करे। श्रीमति नीरा शास्त्री ने अपनी बात ‘जय चित्रगुप्त भगवान’ की जयकार से शुरू की। उन्होने कहा समाज मे जागृति है और ‘चेतना’ आ रही है। लाखो लोगो से सोशल मीडिया के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। उन्होने कहा एक ‘ट्रस्ट’ बना कर हमारे महापुरुषों की समाधियों और स्थलो का रख-रखाव किया जा सकता है। उल्लेखनीय है किसी वक्ता ने ‘राजेंद्र प्रसाद’ की समाधि-स्थल की दयनीय स्थिति का मुद्दा उठाया था। उन्होने यह भी कहा कि चित्रांशों को रविवार (या छुट्टी के दिन) पार्क मे खाने के बहाने ही मिलना चाहिए इससे मेलजोल बढ़ता है।

रविंद किशोर सिन्हा ने दिया प्रेरणादायक भाषण

इसके बाद श्री रवीद्र किशोर सिन्हा जी बोले और उन्होने समा बांध दिया। उन्होने कायस्थ समाज के लोगो को एक अत्यंत प्रेरणादायक संदेशरूपी भाषण दिया जिसमे उन्होने आज के प्रपेक्ष मे कायस्थ समाज से जुड़ी हर समस्या को संबोधित किया। उन्होने कायस्थ बच्चो को रोजगार देने के मसले पर कहते हुए कहा की वैसे तो मैं ‘मेरिट’ पर विश्वास करता हूँ, पर मंच से जरूर घोषणा करना चाहता हूँ कि अगर एक ‘कायस्थ’ और ‘नॉन-कायस्थ’ मे चुनाव करना हुआ तो हम ‘कायस्थ’ बच्चे को ही चुनेंगे। गौरतलब है कि श्री सिन्हा राज्यसभा सांसद के साथ एशिया की सबसे बड़ी सुरक्षा एजेंसी के मालिक हैं। उन्होने कहा हमे अपनी मानसिकता बदलनी होगी। सबको कुर्सी पर बैठने वाली नौकरी चाहिए। जरूरी नहीं आप ‘नौकरी’ ही करे, आप ‘नौकरी’ देने वाला भी बन सकते है। आज कायस्थ ‘गरीब’ है। नोएडा मे अशोक श्रीवास्तव के नवरतन फ़ाउनडेशन ने केवल नोएडा मे 19 सिलाई सेंटर खोले हैं जिसे हमारी कायस्थ महिलाए ही चला रही हैं। समाज मे कायस्थ महिलाओ की सहभागिता बढ़नी पड़ेगी। हमे अपने ‘ईगो’ से बाहर आना होगा, हम क्यों नहीं गाए पाल सकते, मुलायम और लालू ही गए क्यों पाले? हम और काम क्यों नहीं कर सकते हैं? हमे हमारी जिझक को तोड़ना होगा। हमारे यहाँ एक कायस्थ ही दूसरे कायस्थ की मदद नहीं करता है उसको शर्म आती है। बिहार मे हम (कायस्थ समाज) अपने दम पर 50 सीट जीत सकते हैं। बिहार मे एक समय 64 एमएलए कायस्थ थे। 5-7 मंत्री होते थे। स्पीकर का पद सर्वदा ‘कायस्थ’ को दिया जाता था क्योंकि उसका पढ़ने-लिखने का काम होता था। कायस्थों को अपनी ताकत बनानी होगी। जमींदारी प्रथा खत्म होने से कायस्थों को नुकसान हुआ सभी दीवान, तहसीलदार एक समय कायस्थ ही होते थे। हम ‘बिज़नस’ क्यों नहीं करते? माना की जनरल कैटेगरी के साथ भी आज भी कायस्थ आईएएस आईपीएस मे आ रहे हैं। प्रसिद्ध कमेडियन चित्रांश राजू श्रीवास्तव के व्यक्तव्य को बल देते हुए श्री सिन्हा ने कहा कायस्थों से ‘ईगो’ को बाहर करना होगा तभी आगे बढ़ पाएंगे। वैसे भी कारोबार मे ‘मूँछे’ नहीं चलती है। उन्होने “संगत और पंगत’ का जिक्र करते हुए कहा संगत करो..... पंगत करो....... ‘पंथ’ बन जाएगा। समाज को जोड़ने के काम मे लगा, तोड़ने के काम मे नहीं। हमे समाज का विस्तार करना होगा उत्तर और मध्य भारत के अलावा हमे पश्चिम, दक्षिण और पूर्वी राज्यो के कायस्थों को भी साथ जोड़ना होगा। महाराष्ट्र के सीकेपी और बंगाल मे बॉस, दास और दक्षिण मे नायडू और नायर का जिक्र किया। आखिरी मे उन्होने कहा हमे बिहार-यूपी से आगे जाना होगा तभी कायस्थ परिवार का विस्तार होगा। कपाली महाराज ने कहा हम खुद को बुद्धिजीवी कहते हैं और हमे अपने वर्ण का पता नहीं। हम ‘क्षत्रिय; हैं जिसका उल्लेख सर्वप्रथम महाभारत मे मिलता है। श्री राजन श्रीवास्तव ने आईएएस की तैयारी कर रहे जरूरतमन्द कायस्थ बच्चो को आर्थिक मदद देने की पेशकश की।

रंगारंग कार्यक्रमों एवं अभिव्यक्तियाँ से सजी कायस्थ-कॉन्फ्रेंस

इसी बीच केंदीय मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद कार्यक्रम मे आ चुके थे। कॉन्फ्रेंस मे सांस्कृतिक प्रोग्राम की प्रस्तुति होने लगी थी। डॉ सुकृति माथुर ने वंदे मातरम गीत एक अलग अंदाज़ मे गया। विंग कामंडर संतोष अस्थाना, श्रेया बासु, प्रतिभा अस्थाना, अनुजा सिन्हा, पंकज माथुर, जितेंद्र श्रीवास्तव, अनुज सक्सेना, अर्जित श्रीवास्तव के साथ मुख्य आयोजक श्री प्रकाश श्रीवास्तव ने भी मधुरमय गीतो की प्रस्तुति की। चित्रांश सोनल श्रीवास्तव ने सुंदर नृत्य की प्रस्तुत किया।

रविशंकर प्रसाद ने बोली दिल की बात..... बताई अपनी 'पहचान'!

जब बारी श्री रविशंकर प्रसाद के बोलने की आए तो वो दिल से भावनाओ मे कई महत्वपूर्ण बात कह गए। उन्होने कहा जब मैं खुद को देखता हूँ तो सोचता हूँ मैं कौन हूँ..... एक अधिवक्ता? बीजेपी का कार्यकर्ता? इसके अलावा भी मेरी एक पहचान है कि मैं कायस्थ परिवार मे पैदा हूँ। आज भी लाल बहादुर शास्त्री को लोग उनकी ‘ईमानदारी’, राजेंद्र बाबू (राजेंद्र प्रसाद) को उनकी सादगी और संविधान के प्रति समर्पण के लिए, लोकनायक जय प्रकाश नारायण जिनके आंदोलन का मैं सौभाग्य से हिस्सा था, वह उस वक़्त कहते तो ‘प्रधानमंत्री’ बन सकते थे। पर उन्होने ऐसा नहीं किया। हमारी विरासत ‘ईमानदारी’ , ‘गरिमा’ और ‘निष्ठा’ है इसी परंपरा को हमे आगे बढ़ाना है। जीवन मे आत्मविश्वास कभी न कम करें। राजनीति मे जरूर आए। आपकी मर्जी है किसी भी पार्टी को जॉइन करे। उन्होने कहा मुझे पीड़ा होती है जब मैं अपने कायस्थ समाज मे दहेज की व्यवस्था को देखता हूँ। हमे दहेज प्रथा बंद करनी चाहिए। इसके खिलाफ संघर्ष करे और संकल्प ले। चित्रगुप्त भगवान का ही आशीर्वाद है कि आज दुनिया ‘चित्रांश परिवार के लोगो’ पर ज्यादा विश्वास करती है। आज भी आईएएस की लिस्ट मे सक्सेना, माथुर, निगम, सिन्हा के नाम देखने को मिलते हैं। हमे कायस्थ समाज को एक आर्थिक और सामरिक ताकत बनाना है। श्री प्रसाद ने आयोजको और कार्यक्रम मे मौजूद चित्रांशों का धन्यवाद करते हुए एक होने का आहवाहन किया।

समापन सकल्प के साथ हुआ

इसके साथ ही द्वितीय वर्ल्ड कायस्थ कॉन्फ्रेंस अन्य रंगारंग कार्यक्रमों जिसमे ‘कायस्थ-रत्न’ के पुरस्कारों का वितरण शामिल है, का एक ‘संकल्प’ और ‘उद्देश्य’ के साथ समापन हो गया जो कायस्थ समाज मे ‘एकता’, कायस्थ युवाओ को रोजगार, राजनीति मे चित्रांशों की भागीदारी और कायस्थ महिलाओ के सशक्तिकरण का लक्ष्य ‘सपनों’ से ‘वास्तविकता’ मे बदलेगा।

रोहित श्रीवास्तव
(लेखक kayastha are Best in World के एडमिन हैं और कायस्थ समाज सेवी हैं )

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