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प्रेरक प्रसंग : डा राजेन्द्र प्रसाद

ड़ॉ श्रीराजेन्द्रप्रसाद राष्ट्रपति बनने से पूर्व पटना उच्चन्यायालय में वकालत करते थे ! कायस्थ  नेता की जीवनचर्या सात्विक थी ! एक दिन एक व्यक्ति इनके पास आया और कहा- वकील साहब ! मेरी विधवा चाची की कोई सन्तान नहीं है , उसकी जायदाद मेरी हो जाए , ऐसी कानूनी व्यवस्था कर दें !
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चाची क्या चाहती हैं , राजेन्द्र बाबू ने प्रश्न किया ! वह व्यक्ति बोला- अपने गरीब भाई की मदद करना चाहती हैं और भाई की बेटियो की शादी करने की इच्छा रखती हैं !
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साधु-संतो का सत्संग करने वाले राजेन्द्र बाबू ने उसे समझाया - तुम स्वयं भी धनी हो ! ईश्वर और धर्म से ड़रना चाहिए , इसलिए दूसरे की सम्पत्ति हड़पने का विचार भी मन में मत लाओ ! विधवा चाची की मॉ समान सेवा करो , आर्शीवाद लो , इसी में तुम्हारा कल्याण है !
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उस व्यक्ति पर अच्छा प्रभाव पड़ा और राजेन्द्र बाबू से क्षमा मॉगी और उन्हे सद्बुद्धि देने के लिए हाथ जोड़ नमस्कार किया !

प्रस्तुति : Pradeep Arora

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