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Home » चौपाल » अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का बैधानिक विश्लेषण – मनीष श्रीवास्तव

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अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का बैधानिक विश्लेषण – मनीष श्रीवास्तव

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का बैधानिक विश्लेषण।।

1। विधिक चुनाव 2010-2015 के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष  श्री एके श्रीवास्तव और राष्ट्रीय महामंत्री डॉ शरत सक्सेना जी चुने गए।

2। उस समय के 2010-2015की कमिटी में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष परिया जी और राष्ट्रीय कार्यवाहक सचिव विश्वमोहन जी को जनवरी 2013को ही कार्यालय 11बी दारुल शफा को कब्जाने और सन्गठन विरोधी गतिविधियों के कारण राष्ट्रीय अध्यक्ष एके श्रीवास्तव जी और राष्ट्रीय महामंत्री डॉक्टर शरत सक्सेना जी और कमिटी ने निकल दिया था।

3। इसके बाद भी 4 महीने में नया कार्यालय 60बी दारुल शफा भी एके श्रीवास्तव जी और टीम ने पुरे नए तरीके से विधिक आवंटन कराइ थी।परिया गुट दूर दूर नहीं था। मई 2013 में।

4। लोकसभा चुनाव के समय एक साल संगठन से निकाले जाने के बाद परिया गुट को सपा का साथ मिला और यादव जी एस डी एम ने एक पक्षीय आर्डर दिया ।जो बाद में अपने को ही फसता देख कर मार्च 2014 का ऑर्डर कैंसिल कर दिए।बाद में सपा के मैनपुरी उपचुनाव में सपा प्रत्याशी के विजय के बाद दूसरे तरह का आर्डर नवंम्बर 2014 को किये।
मतलब नवंम्बर 2014 के पहले कोई भी परिया गुट के पास विधिक आधार नही था।
अब इसके 1महीने में ही abkm के राष्ट्रीय अध्यक्ष एके श्रीवास्तव जी और रास्ट्रीय महामंत्री डॉक्टर शरत सक्सेना जी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में यादव साब एस डी एम के ऑर्डर को चुनौती दी क्योंकि एस डी एम के पास कोई पावर नहीं था। चुनी हुई अध्यक्ष और महामंत्री को हटाने का अधिकार रजिस्टार लखनऊ को था या कमिशनर कोर्ट को।
अब इलाहाबाद में राष्ट्रीय अध्यक्ष एके श्रीवास्तव जी ने एस डी एम यादव जी समेत 5 लोगो को पार्टी बनाया।जिसमे डिप्टी राजसिट्रार भी थे।
और इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बहुत शानदार कमेंट करके फरवरी 2015 को आर्डर किया और कमेंट दिया की  s d m आर्डर के error को मेंशन किया गया और आम सभा का भी।
लेकिन परिया गुट के महाहोसियार लोग ने डिप्टी रजिस्ट्रार के ऑफिस से एक कागज़ दिखाये जो सरासर बिधि संगत नहीं है kyunki जिस मामला को हाई कोर्ट देख रहा हो उस मामले को केवल परिया गुट के लोगो के ही प्रेशर में डिप्टी रजिस्टार ने कैसा भी कोई पत्र दिया हो सब बेकार है।हाई कोर्ट में डिप्टी राजसिट्रार के खिलाफ भी अवमानना का मामला दर्ज करवाया गया है।
मतलब साफ है एके श्रीवास्तव जी ही abkm के निवर्तमान अध्यक्ष है और डॉक्टर शरत सक्सेना जी निवर्तमान राष्ट्रीय महामंत्री हुई।

5।चूँकि फरवरी 2015 के बाद बिहार चुनाव आता देख कर परिया गुट की आँखों में चमक दिखी और इन्होंने कई लोगो को सदस्यता देंने की पैसे से कोशिश करि पटना में जो सोसल मिडिया के माध्यम से कई लोगो ने बताया भी जिसमे कई सन्गठन के लोग भी थे।यह वही सो काल्ड बैठक थी जिसका सयोजन राजिव रंजन जी ने किया और बेचारे जदयू और आरजेडी के प्रचंड बहुमत के कारण भी जदयू टिकट पर हार गए।उस समय दबे स्वर में लोगो ने बताया कि चूँकि परिया गुट के लोगो ने इस गैर विधिक राष्ट्रीय बैठक पटना में कायस्थ समाज को मुस्लिम और अनुसूचित समाज के साथ गठजोड़ की बात करि गयी। और आरजेडी सुप्रीमो ने कायस्थ समाज को अति दलित में डालने की वक़ालत की।भला हो कायस्थ समाज का जो परिया गुट के सारे पासे फ़ेल हुए।
लोगो ने पटना में भी राष्ट्रीय अध्यक्ष को खोज नही मिले क्योंकि चंदा लेने का पावर केवल और केवल विश्वमोहन कुलश्रेष्ठ जी को था क्योंकि इन्होंने अपने गृह शहर फिरोजाबाद में ही बैंक अकॉउंट खोल दिया और खूब चंदा लिया गया।
चूँकि बिहार में जदयू की सरकार आगयी तो बात दब गई नहीं तो बहुत दूर तक बात जाती। इसके बाद ही राजस्थान और हरियाना में परिया गुट का उदय हुआ ।खूब चन्दे बाजी हुए जिसके abkm के राष्ट्रीय अध्यक्ष एके श्रीवास्तव जी ने पूरे साक्ष्यो के साथ हाई कोर्ट में पेश किया।अब कोर्ट का फाइनल आर्डर आना बाकी है।सारे बहस पुरे होगये है।
परिया गुट केवल वाक्य चतुरता के बल पर कोर्ट के आदेश को समाज में कंफ्यूज करता रहा है

6। चूँकि पुरे खेल के पीछे कांग्रेश के कुछ थिंक टैंक थे जिसका नेतृत्व सुबोध कान्त सहाय जी कर रहे थे नहीं तो परिया गुट के रांची,बिहार,लखनऊ,बड़ोदा समेत अनेक कार्यकर्म में आते कैसे मुख्य अतिथि के रूप में।
एक और कोशिश की गयी की बीजेपी के कायस्थ नेताओ की पॉजशन को हल्की करने की जो लखनऊ, बड़ोदा समेत कई जगहों पर देखने को मिला परिया गुट द्वारा। बीजेपी शीर्ष नेतृत्व को हम लोगो abkm की वास्तु स्तिथि से अवगत समय समय पर कराते रहे है। बीजेपी भी परिया गुट से जरुर दुरी बना ली है।
6।हमारा केवल कहना यह है कि हाई कोर्ट के आदेश को भी परिया गुट ना मानते हुए भी समाज को कौन सा पदक दे रहा है यह वो ही जाने। यदि परिया गुट के बैंक  अकाउंट जी की गैर विधिक है को चेक किया जाएगा तो बहुत सारी जानकारी सामने आएगी।

7। abkm के एक धड़ सारंग साब ने भी अपनी उपस्ततिथि हाई कोर्ट में कई बार इस केस में देनी चाही लेकिन हाई कोर्ट ने सुनने से इंकार कर दिया।

तथ्यों को ध्यान से देखने से श्री एके श्रीवास्तव जी ही निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष और डॉक्टर शरत सक्सेना जी राष्ट्रीय महामंत्री निवर्तमान दीखते है।

मनीष श्रीवास्तव 

( भड़ास श्रेणी मे छपने वाले विचार लेखक के है और पूर्णत: निजी हैं , एवं कायस्थ खबर डॉट कॉम इसमें उल्‍लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है। इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी कायस्थ खबर डॉट कॉम स्‍वागत करता है । आप लेख पर अपनी प्रतिक्रिया  kayasthakhabar@gmail.com पर भेज सकते हैं।  या नीचे कमेन्ट बॉक्स मे दे सकते है ,ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी भेजें।)

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