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कोई न कोई किसी खबर से किसी न्यूज़ पोर्टल से अप्रसन्न हो सकता है. पर इसके लिए किसी को धमकाने की जरुरत नहीं है. न्यूज़ पोर्टल को भी धमकी का परवाह नहीं करना चाहिए-महथा ब्रज भूषण सिन्हा

अभी दो-चार दिन पहले की बात है. व्हाट्स ग्रुप, कायस्थ समाज के खबर पोर्टल एवं अन्य सोशल मीडिया में कुछ प्रसंग चल रहे हैं. आप सब भी इसे देख सुन रहे होंगे. लेकिन इस पर प्रतिक्रिया सिर्फ वही लोग व्यक्त कर रहे हैं जो इससे आहत हैं या जिन्हें इसका लाभ मिल रहा है. बाकी हजारो भाई अनमोल वचन, जोक्स एवं बुद्धू बनाने के मशाले फैलाने में लगे हैं.

आज हम उन सभी सामाजिक नेताओं को कहना चाहूँगा. जो समाज को जोड़ नहीं रहे, वरन अपने स्वार्थ में सामाजिकता की बलि ले रहे हैं. 21 वीं सदी में बहुत कुछ बदल रहा है. कायस्थ समाज भी बदल रहा है. सामाजिक संगठन किसी की निजी सम्पति नहीं हो सकती. अब यह भ्रम समाप्त करना होगा कि संगठनों के काम पर कोई न बोले. कम से कम निबंधित कराये कायस्थ संगठन के कार्यों की अनवरत समीक्षा तो होनी ही चाहिए और उनके नैतिक-अनैतिक कार्य जनहित में प्रकाशित भी होते रहना चाहिए.

पोस्ट-दर-पोस्ट जो हमें पढ़ने को मिल रही है, उसमे एक पोर्टल मीडिया को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी जा रही है, इसकी जीतनी भी निंदा की जाय कम है. समाज के त्वरित खबर का यह सशक्त साधन व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए व्यक्तिगत घृणा एवं झगड़े का शिकार हो जाय, यह बहुत चिंता की बात है. हमारे समाज में प्रमुख रूप से तीन सशक्त न्यूज़ पोर्टल अभी कार्यरत है. सभी अपने-अपने सूत्र से एवं अपनी सामाजिक सोच के आधार पर ही खबरें लगाते हैं. कोई न कोई किसी खबर से किसी न्यूज़ पोर्टल से अप्रसन्न हो सकता है. पर इसके लिए किसी को धमकाने की जरुरत नहीं है. न्यूज़ पोर्टल को भी धमकी का परवाह नहीं करना चाहिए. आहत पक्ष को भी सामाजिक रूप से इसे नार्मल रूप में लेते हुए अपनी स्थिति समाज के सामने अवश्य स्पष्ट करना चाहिए. पत्रकारिता में इसका प्रावधान भी है. किसी भी व्यक्ति का पक्ष न्यूज़ पोर्टल को भी उसी प्रमुखता से प्रकाशित करना चाहिए जिस प्रमुखता से उनके विरुद्ध अगर कोई खबर लगी है. मेरा मानना है कि सभी न्यूज़ पोर्टल को आपसी ताल-मेल से सामाजिक हित के मुद्दे बिना भेद-भाव के लगातार उठाते रहना चाहिए.

हम किसी की आलोचना कर सकते हैं. आलोचना होनी भी चाहिए. आलोचना ही निरंकुशता रोकने एवं रचनात्मक सुधार लाने का सशक्त साधन है. पर धमकी देकर किसी का मुंह बंद नहीं कर सकते और न करना चाहिए. सभी के विचार भिन्न-भिन्न दिशाओं में है, यह जग-जाहिर है. भले विचार एक दिशा में न हो लेकिन धमकी, गली-गलौज, वादा खिलाफी, अपेक्षाकृत असामाजिक लोगों का संरक्षण एवं महिमामंडन, बड़े-बड़े पदाधिकारी के रूप में बिना सोचे-समझे गलत तत्वों तथा असक्षम लोगों का मनोनयन से पद की गरिमा तो समाप्त हुई ही है, समाज में सामाजिक संगठनों के प्रति घृणा भी बढ़ी है.

हमें समाज में बढ़ रहे असहज स्थिति को रोकना होगा. एकता सिर्फ नारों से नहीं हो सकती. आज सभी के मन में समाज का नेतृत्व करने की महत्वाकांक्षा जगी है. यह स्वागत योग्य है पर वहीँ यह सोचने की भी जरुरत है कि नेतृत्व संभालने के योग्य कौन है? दिन-रात सामाजिक संगठनो का बनना और तुरत सिमट जाना इसी तथ्य को पुष्ट करते हैं. प्रबुद्ध लोगों का सामाजिक संगठनो में रूचि एवं भागीदारी एकाएक घटी है. उसका कारण सिर्फ बेढंगे लोगों द्वारा फब्ती कसना एवं असम्मान का बढ़ता आचरण ही है.

हमारे सामाजिक संगठन, सामाजिक कम एवं राजनितिक ज्यादा हो गए हैं. हर कोई अपने-अपने परिस्थितियों की वजह से अलग-अलग राजनितिक दलों एवं व्यक्तियों के इर्द-गिर्द घुमने लगा है. जो सामाजिक कार्यों की विपरीत दिशा है. इसके पीछे की सोच राजनीति में शोर्टकट यानि लौन्चिंग पैड खोजना है, जो यह समझते हैं कि जातीय संगठन से जुड़कर कोई राजनीति के अन्तः दरवाजे पर पहुँच सकता है तो यह भ्रम है. सामाजिक संगठन निहायत सेवा कार्य से जुडा हुआ मंच है. इससे लाभ वही लोग उठा सकते हैं जो राजनीति में स्थापित हो चुके हैं. इसलिए हमारी सलाह यही होगी कि वैसे युवा, जो राजनीति में अपना भविष्य ढूंढ रहे हों उन्हें सामाजिक संगठन में अपना पोर्टफोलियो बनाने से बचना चाहिए.

उत्तर प्रदेश में चुनाव है. स्वभावतः हमारा कायस्थ संगठन भी इसे भुनाने की सोच रहा है. यह अच्छी बात हो सकती है जिसके लिए कायस्थ समाज को भी शक्ति प्रदर्शन करना जरुरी है. पर यह शक्ति प्रदर्शन किसी रूप से हास्यास्पद न हो. अगर ऐसा हुआ तो लाभ नहीं, हानि होगी. अभी कई महापंचायत की घोषणा हो चुकी है, जिसे महाप्रदर्शन बनाने की जरुरत है. यह महाप्रदर्शन आयोजकों की सोच एवं योग्यता पर निर्भर करेगी कि वे सबको जोड़ने में कितनी सशक्त भूमिका निभा पाते हैं.
अतः आवश्यकता इस बात की है कि क्या हम एक दुसरे को बर्दाश्त करना सीखेंगे या अपने उन्माद में अपना सबकुछ खो देंगे.
-महथा ब्रज भूषण सिन्हा.

( भड़ास श्रेणी मे छपने वाले विचार लेखक के है और पूर्णत: निजी हैं , एवं कायस्थ खबर डॉट कॉम इसमें उल्‍लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है। इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी कायस्थ खबर डॉट कॉम स्‍वागत करता है । आप लेख पर अपनी प्रतिक्रिया  kayasthakhabar@gmail.com पर भेज सकते हैं।  या नीचे कमेन्ट बॉक्स मे दे सकते है ,ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी भेजें।)

 

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