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सर्वानन्द जी खबर लाये है : हे भगवान चित्रगुप्त कृपा करो, एक सर्जिकल स्ट्राइक कायस्थ समाज के लिए भी ज़रूरी है

अजी सम्पादक जी महाराज, जय कायस्थ समाज की.

जब से मैंने सुना है कि भारत ने पाकिस्तान के सीमा के अंदर घुसकर सर्जिकल ऑपरेशन किया है, हमारी ख़ुशी का ठिकाना नहीं है. पचास सीधे भगवान श्री चित्रगुप्त जी के दरबार में. हमारे मन में भी आया है कि उसी तरह हेलिकोप्टर से लटक कर कायस्थ संगठनो के जाल में कूद जाऊं और सर्जिकल ऑपरेशन कर ही डालूं. अरे भाई सोचिए मत! हम वैसा ऑपरेशन नहीं न करेंगे कि हमारे पितामह व भगवान श्री चित्रगुप्त जी परेशान हो जाएँ. हम तो दिल बदलने का ऑपरेशन करेंगे न. हाँ कुछ ऐसे जिद्दी दिल वाले जरुर होंगे जो मेरे चाक़ू-छुरी से ऐसा घायल हो जाय कि कभी ठीक ही न हो, तो क्या करूँगा? डॉ का भी केस खराब तो होता ही है न.

भगवान् श्री चित्रगुप्त जी सृष्टि के लेखा-जोखा धारक न्यायाधीश हैं तो उनके यहाँ लादेन भी पहुंचा है, उमर मुल्ला भी वहीँ है और न जाने कितने-कितने आतंकवादी, साधू-सन्यासी भी वहां मौजूद होंगे. लगातार इस तरह के लोग वहां जा रहे हैं. जानेवाले की लिस्ट में हाफिज सईद, मसूद अजहर, लखवी सहित अनेक लोगों की VIP लाइन लगी हुई है. पहले भी गए होंगे और आगे भी जायेंगे. पर अपने पितामह से हाँथ जोड़कर विनती है कि इस तरह के लोग को कम से कम कायस्थ कुल में मत भेजना प्रभु. मत भेजना.

एक सर्वानंद सोनेवाल जी हैं, जो असम संभाल रहे हैं. और दुसरे हम सर्वानंद सर्वज्ञानी. पता नहीं कैसे मेरा नाम सर्वानन्द सर्वज्ञानी हो गया. आनंद तो कोसो दूर है और ज्ञान इतना घटिया कि एक नवयुवक के समाजसेवी ज्ञान से भी बगले झांकने लगते हैं. बताईये आप, हमारे ज्ञान से कायस्थ समाज संभलेगा क्या? कायस्थ समाज में डॉ राजेंद्र प्रसाद, लाल बहादुर शास्त्री, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, एवं जय प्रकाश नारायण जैसे लोग हुए हैं. और हम हैं आज सभी महान विभूतियों के महान उतराधिकारी. कहाँ राजा भोज और कहाँ भोजुआ तेली?

हमारे यहाँ अध्यक्ष यानी अधि+ अक्ष – नीचे आँख या नीचे धुरी. मतलब ऊपर देख ही नहीं सकते. महा मंत्री यानी महा + मन+ तरी, मतलब मन भर तरी (हरा-भरा) चाहिए.

भाई आप लोग कन्फ्यूज मत होईये. आखिर सर्वज्ञानी ऐसे ही नाम नहीं है हमारा. आजतक आप लोगों ने राष्ट्रीय अध्यक्षों के मुखारविंद से कुछ सुना है क्या? बहुते गंभीर होते हैं कायस्थ समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष लोग. बेचारे समाज सुधार के काम के बोझ से इतना दबे हैं कि उफ़ तक करने की फुर्सत नहीं? कोई मारे कोई जिए कहीं आफत आ जाय या कहीं बहार आ जाय. एकदम निरपेक्ष?
बारम्बार नमस्कार है ऐसे अपने कुल सपूतों का. बारम्बार नमस्कार.

हमारे यहाँ भी हाफिज सईदों की कमी नहीं है. जो बिना तेल के ही पुआ पका लेते हैं. सभी सईदों ने कुछ सिपहसालार नियुक्त कर रखे हैं, जो उनके साथ ही उनके सुरक्षा में लगे रहते हैं और समय आने पर उनके ढाल बन जाने का काम करते हैं. कहीं अगर उनके आका घिर जाएँ तो कई कमांडो दना-दन छतरी से उतर आयेंगे फिर तो आपकी खैर नहीं. एक बार यह सर्वानन्द भी गलती से उनके चंगुल में फंस गया था.. फिर देखिये- दे दना-दन. जान बचाकर भागा.

इन्होने समाज की इतनी सेवा की है कि कायस्थ समाज सचमुच स्वर्ग सा सुख महसूस कर रहा है. जब ए सईद भाई किसी कायस्थ के दरवाजे पहुंचते हैं तो स्वागत करने वाले को वे यमराज सदृश दिखते है और उनके कमांडो यमदूत. पहले तो वह कायस्थ बेचारा भाग निकलने या छिप जाने की सोचता है फिर जब कोई चारा नहीं दिखता तो हथियार डाल जी हुजूरी में लग जाता है. बेचारा? जान बचे तो लाखों पाए?
लेवी की तो पूछिय मत. बड़ी-बड़ी रकम चुटकी में वसूल कर लिए जा रहे हैं. मालूम हुआ है कि पैसा कैसे वसूला जाय इसकी ट्रेनिंग कैंप चल रही है जहाँ से प्रशिक्षित हो कर कायस्थ समाज में लोग निःस्वार्थ सेवा में तल्लीन हो जा रहे हैं. हवाई यात्रा और पांच सितारा होटल का आनंद अलग से. आह क्या बात है? जन्म गदह उतर गया, समझे कुछ?

एक बेचारा कायस्थ सड़क दुर्घटना में अपने निरीह परिवार को रोता-विलखता छोड़ गया. सहायता के नाम पर पचास हजार का ..................... तो दूसरा सीतापुर के विसवाँ में असाध्य बीमारी से ग्रसित परिवार का दुःख दर्द? चुकी वहां एअरपोर्ट या हेलीपैड तो है नहीं, तो हमारे महान समाज सेवी का चरणकमल कैसे पहुंचे वहां? भला हो डॉ रेणु वर्मा जी का जिन्होंने सुध ली है. नहीं तो सब बस प्रचार में लगे थे , हम सर्वज्ञानी पता कर रहे हैं कि उनकी कौन सी रजिस्टर्ड कायस्थ संगठन है जिसके वे राष्ट्रीय अध्यक्ष या महामंत्री हैं?

कुछ दिनों पहले की बात है. एक व्हाट्स एप्प ग्रुप में कुछ ऐसे ही हाफिज टाइप लोगों का कब्ज़ा हो गया. ऐसा लगा जैसे टाइगर हिल पाकिस्तानियों के कब्जे में आ गया हो. कुछ लोगों को रिमूव कर दिया गया तथा कुछ भय से रिमूव हो गए. अभी भी तोलोलिंग पर पूरी पाकिस्तानी टीम जम कर बैठी हुई है. स्लीपर सेल की तरह सभी ग्रुपों में बैठे लोग समय आते ही दे पत्थर.....दे पत्थर......
हमारे यहाँ कोई सीमा नहीं है, न राष्ट्रीय और न अंतर्राष्ट्रीय !

हे चित्रगुप्त भगवान ! अजित डोवाल और मनोहर पर्रीकर जी जैसी कोई आत्मा हो तुम्हारे पास तो जरुर भेजना कायस्थ समाज में. जरुर भेजना कायस्थ समाज में.

आज दो अक्टूबर के दो महान विभूतियों की जयंती के पावन अवसर पर समर्पित.

 सर्वानन्द सर्वज्ञानी  एक काल्पनिक चरित्र है और लेखक अपना नाम निजी कारणों से गुप्त रखना चाहते है 

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