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भोपाल में सारंग गुट को गलत और खुद को सही साबित करने फंसा पारिया गुट , AK श्रीवास्तव गुट के मनीष श्रीवास्तव का दावा , जनवरी २०१३ में अखिल भारतीय कायस्थ महासभा से ही निकाल दिया था डा आशीष पारिया और विश्व विमोहन कुलश्रेष्ठ को

कायस्थ खबर डेस्क I अखिल भारतीय कायस्थ महासभा को लेकर अधिपत्य की लड़ाई अब रोमांचक होती जा रही है I उत्तर प्रदेश के बाद अब ये मध्य प्रदेश में भी पहुँच गयी है बीते दिनों पारिया गुट ने पूर्व विधायक शैलन्द्र प्रधान को अपना प्रदेश अध्यक्ष बनाया I जिसके बाद मध्य प्रदेश की कायस्थ राजनीती में आरोप प्रत्यारोप के दावो की लड़ाई तेज हो गयी I इसी क्रम में इन्दोर से प्रकाशित एक अखबार ने पारिया गुट के रेफरेंस को लेकर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के दावे पर एक रिपोर्ट छापी जिसमे डा आशीष पारिया को ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बताया गया I इस पर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता के दावे बिलकुल अलग है I

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अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया पर जारी अपने ब्यान में दावा किया है की पारिया गुट ने आधी सच्चाई तो सारंग जी को गलत साबित करने में बयान की लेकिन उसके बाद अपनी कहानी जोड़ दी है जिसमे खुद को असली अध्यक्ष और महामंत्री होने के दावे कर दिए , जबकि सच ये है की डा आशीष पारिया और विश्व विमोहन कुलश्रेष्ठ  को जनवरी २०१३ में ही अखिल भारतीय कायस्थ महासभा से हटा दिया था I

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कायस्थ खबर मनीष श्रीवास्तव के आरोपों को उसी तरह से प्रकाशित कर दे रहा है बाकी सच और झूठ का फैसला समाज खुद कर सकता है 

मामला माननीय इलाहाबाद हाई कोर्ट में अंतिम चरण में है इस लिए कोई भी अफवाह से बचें । (एक समाचार पत्र परिया गुट द्वारा प्रचारित किया जा रहा है।जो उनके एक जानकार ने प्रकाशित किया है।इसमें लाल रंग के नीचे वाले कॉलम न्यूज में सब स्पष्ट है।दबंग दुनिया का न्यूज।)

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मध्य प्रदेश में पारिया गुट को असली बताने वाली खबर जिस पर मनीष श्रीवास्तव ने एतराज किया है

 

1। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री एके श्रीवास्तव और राष्ट्रीय महामंत्री डॉ शरत सक्सेना जी है 2010 से 2015 तक।

2। 2013के जनवरी माह के आस पास ही विश्व मोहन कुलश्रेष्ठ जो राष्ट्रीय कार्यवाहक सचिव थे और राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष परिया जी को 11बी दारुल सभा कार्यालय कब्जाने के और कूट रचित पत्र बनाने के लिए abkm से 7साल के लिए निकाल दिया गया था।

3। परिया गुट को सगठन से हटाने के बाद abkm सुचारू रूप से मार्च 2014 तक राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री एके श्रीवास्तव जी और राष्ट्रीय महामंत्री डॉ शरत सक्सेना जी ने निर्वाध रूप से कार्य किया और 60,दारुल सफा,लखनऊ का कार्यलाय समेत अनेक कार्य किये। परिया गुट कही नहीं दिखा ।

4। लोकसभा चुनाव 2014 के पूर्व संध्या पर सपा से गठजोड़ कर परिया गुट ने मनीष श्रीवास्तव जो राष्ट्रीय सचिव थे के द्वारा गलत तरीके से sdm के सामने प्रस्तुत होना दिखाया जो मनीष श्रीवास्तव ने जब कोर्ट से सत्यापित पेपर सौपे तो उस समय के तत्कालीन एसडीएस जो सपा मुखिया को जिताने के लिए परिया गुट से जुड़े थे प्रतीत हो रहे थे ने सत्य के साथ जा के मनीष श्रीवास्तव के प्रस्तूत पेपर को सही मानते हुए परिया गुट के पक्ष में अपने दिए गए आदेश को कैंसिल कर दिया ।येही सबसे बड़ी सफलता थी मनीष श्रीवास्तव की जो श्री एके श्रीवास्तव जी के साथ खुले रूप में थे ।और परिया गुट नवंम्बर 2014 तक कुछ नहीं कर पाया।

5। इसी दरम्यान एक और घटना हुई , सपा मुखिया मुलायम सिंह जी ने मैनपुरी सीट खाली कर दी इसके बाद पुनः परिया गुट सक्रिय हुआ और ये केन प्रकेंन एक नवम्बर के अंतिम सप्ताह 2014 में एक गलत तरीके का आर्डर करा दिया। चूँकि।एसडीएस को dipti रजिस्टार के खिलाफ आर्डर देने का कोई मतलब नहीं था। संस्था में कोई विवाद नहीं था उस समय और संस्था जनवरी 2015 तक 2010 से बैलिड थी। हाँ परिया जी और विश्वमोहन जी को जनवरी 2013 में ही हटा दिया गया था बस।

6। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री एके श्रीवास्तव जी हाई कोर्ट में sdm के फैसले के खिलाफ गये और दोनों पक्षो को देखते हुए इलहाबाद हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री एके श्रीवास्तव जी को स्टेटेट्स को का आदेश दिया क्योंकि जनवरी 2015 में कमिटी ने 5साल पूरा कर लिया था और उसके पहले 2महीने पहले ही sdm जी ने गैर जरूरी आर्डर दे दिए थे।

निष्कर्ष
a)विश्व मोहन कुलश्रेष्ठ और परिया जी 2013 जनवरी में ही abkm से हटा दिए गए थे तत्कालीन अध्यक्ष और महामंत्री द्वारा।

b)एक तरफ sdm कोर्ट को सुनने का कोई मतलब नही उप रजिस्टार के मामले को जब तक कोई उपर से आदेश ना हो तो कैसे किया गया। हालॉकि इलाहबाद उच्च न्यायालय ने sdm के आदेश की लताड़ लगाई और इस आर्डर को error बताया जो आर्डर पढ़ के समझा जा सकता है। जब दिशम्बर 2014 को इलहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही थी और केस फाइल 19जनवरी 2105 को हुई। उसके बाद कैसे परिया गुट द्वारा ditpi रजिस्ट्रार के स्टैम्प से फरवरी 2015 के आदेश हुए यह एक तरह का पूर्णता क़ानूनी इतिहास में अलग घटना है कि एक तरफ दोनों पक्ष हाई कोर्ट में है और निचले जगह से आदेश हुआ हैं बाद में इलहाबाद हाईकोर्ट ने अवमनानाना का मामला देखते हुए dipti रजिस्ट्रार को नोटिस दिया ।
परिया गुट केवल इसी तथाकथित आर्डर को।दिखा के लोगो को दिग भर्मित कर रहा है जो पूर्ण रूप से कोर्ट की अवमनना है।

c)परिया गुट बिना किसी पावर के 11,21,31रूपये की सदस्यता को हजारगुने बड़ा कर एक बड़ी फर्जीवाड़ा करने के लिए 11000,21000,31000 Rs के द्वारा सदस्यता अभियान शुरू किया गया। जबकि कोर्ट के स्टेस्ट को आदेश के बाद इसका कोई मतलब नहीं था। सारे पेपर राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री एके श्रीवास्तव जी के पक्ष के पास सुरक्षित है। इस लिए कोई भी ऐसे भुलावे में ना कर कोई सदस्यता शुल्क ना दे।

d)abkm के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री एके श्रीवास्तव ने 2013 में ही सभी कायस्थ समाज को abkm का सदस्य जन्म से कायस्थ होने को कहा। हाँ चुनाव में भाग लेने के किये सदस्यों की स्तिथि बाय लाज के अनुसार ही थी।

इस लिए कोई भी परिया गुट के भुलावे में ना आएं

।मामला इलहाबाद हाई कोर्ट में आर्डर के अंतिम समय पर है परिया गुट खुले मन से इलहाबाद हाई कोर्ट में लड़े और कोर्ट के आदेश के बाद जो सही हो वो करे।
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का नाम बड़ा है कम से कम इसको इतना हल्का ना किया जाये। जब तक विधिक व्यवस्था ना हो तब तक किसी भी तरह के चंदे लेने और देने से बचा जाए।बहुत शीघ्र इसका फैसला माननीय इलहाबाद हाई कोर्ट से फैसला आने की उम्मीद है।

 

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