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Home » चौपाल » सच तो ये है की मेरठ,गाज़ियाबाद, नॉएडा में एक बार फिर अपने नेताओं की कमी से कायस्थ समाज अपनी राजनैतिक पहचान बनाने का ये मौका चुक गए है – आशु भटनागर

सच तो ये है की मेरठ,गाज़ियाबाद, नॉएडा में एक बार फिर अपने नेताओं की कमी से कायस्थ समाज अपनी राजनैतिक पहचान बनाने का ये मौका चुक गए है – आशु भटनागर

पश्चिम उत्तर प्रदेश की ७५ सीटो पर चुनाव की रनभेदी बज चुकी है I बीते १५ दिनों में प्रचार के समस्त तोर तरीके और और खबरे पड़ने के बाद मैं सिर्फ एक नतीजे पर पहुंचा हूँ I इस पुरे क्षेत्र में कायस्थ समाज की राजनैतिक पहचान शून्य है I कायस्थ खबर ने इसके लिए मेरठ,गाज़ियाबाद, नॉएडा जैसे प्रमुख शहरो में कायस्थ महासभाओ और उनके नेताओं की चुनावी राजनीती में भूमिका का जब अध्यन किया तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आये I

जैसा की हम सभी जानते कायस्थ समाज की इन सभाओं में पदों को लेकर हमेशा मारामारी रहती है I गाज़ियाबाद जैसी जगह में छोटी बड़ी मिला कर २३ से ज्यदा सभाए है वही मेरठ में भी लगभग १० अलग सभाए है वहीं नॉएडा में भी एक सभा है I लेकिन आश्चर्य जनक तोर पर इन सभी सभाओं के नेता राजनैतिक मंच पर समाज की उपस्थिति दर्शाने में असफल रहे I

सालो से कायस्थ समाज इसी बात के लिए संघेर्ष कर रहा है की उसकी राजनैतिक हैसियत दिखे और उसका भी समाज में राजनैतिक प्रभाव बने लेकिन सारे साल सामाजिक संस्थाओं में ही एक दुसरे पर आरोप लगाने में व्यस्त रहने वाले लोग खुद ही नहीं तय पाते की उन्हें ताकत कहाँ दिखानी है I ऐसे में राजनैतिक दलों के नेताओं की उपेक्षा आम कायस्थ समाज को हताश ही करती है I

रविशंकर प्रसाद जैसे कद्दावर नेता नॉएडा में सेक्टर ९९ में आकर प्रचार करके चले गए लेकिन वो बार एसोसिएशन के लिए आये , कायस्थों के लिए नहीं , जबकि पीयूष गोयल वैश्य वोटो को साधने के लिए अग्रसेन भवन के कार्यक्रम में आने का कार्यक्रम बनाते है वो बात अलग है की उनको सुरक्षा की कमी के कारण सभा निरस्त करनी पड़ती है I इनके अलावा कोई कायस्थ नेता कायस्थों की कोई सभा किसी भी दल के प्रत्याशी के लिए करने की कोशिश करनी करता दिखा है

ऐसे में बड़ा सवाल ये है की कायस्थ समाज के नेताओं की उदासीनता से  कायस्थ समाज कितना आगे आ कर वोट डालने आएगा और उसका कितना प्रभाव आंकड़ो में दिखाई देगा इसकी कोई गिनती नहीं होगी क्योंकि समाज को वोट के लिए बाहर निकालने वाले लोग ही इस मौके को भुनाने में चुक गए है I

बहराल पहली सीटो पर तो जो हुआ उसको अब बदला नहीं जा सकता है लेकिन बाकी प्रदेश में अभी भी वक्त है जब कायस्थ समाज के तथाकथित नेता नींद से जागे और अपनी प्रभावी भूमिका में बाहर निकल कर आये ताकि सभी राजनैतिक दलों को समाज क वोट की अहमियत समझ आ सके I

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