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जोगीरा सा रा रा – कायस्थ समाज में सभी समाज का नेतृत्व करना चाहते है एन केन प्रकारेण सभी मे एक ललक है नेतृत्व की महाराज – अतुल श्रीवास्तव

महाभारत समाप्त हो गया सभी लोग स्वर्ग चले गये और स्वर्ग मे खुश थे कि चलो लड़ाई झगडा ख़त्म चैन से है ।अचानक धृत राष्ट्र अपने सेवक संजय के साथ उपवन मे घूमते घूमते किसी सोच मे खो गये संजय ने उन्हे कई वार आवाज़ दी महराज....महाराज तो अचानक उन्होने चौक कर देखा ।संजय ने पूछा महाराज क्या सोच रहे थे ।तो वो बोले संजय जिनके वरदान के फलस्वरूप पितामह भीष्म को इच्छा मृत्यु का वरदान मिला जो समस्त प्राणियों का लेखा जोखा रखते है उनके 12पुत्रों के वंशज भी तो प्रथ्वी पर मौजूद होगे वो तो बड़े प्रसन्न और सुख पूर्वक प्रथ्वी पर होगे क्योंकि वही तो अव प्रथ्वी पर देब वंशज है ।संजय ज़रा देख कर बताओ कि उनके क्या हाल है संजय ने कहा जी महाराज...और संजय प्रथ्वी की तरफ़ देखने लगे और काफी देर तक मौन रहे ।और बोले महाराज और तो सब ठीक है किन्तु इन्द्रप्रस्थ और हस्तिनापुर और मगध के नज़दीक ये क्या हो रहा है ?तो उन्होने पूछा क्या....?... संजय साफ साफ बताओ पहेली मत बूझाओ......तो संजय बोले महाराज उनके वंशजों के हाथ मे एक चौकोर दूर भाष यंत्र दिख रहा है और सभी उस पर व्यस्त है ।कोई चित्रगुप्त जी के मन्दिर पर अपना अधिकार बता रहा है कोई अपनाअधिकार बता रहा है जबरदस्त वाक युद्ध चल रहा है कोई स्वम लड़ रहा है किसी के सिपहसालार लड़ रहे है कभी कोई पक्ष भारी कभी कोई पक्ष भारीदोनो एक दूसरे का इतिहास खोज रहे है और जबरदस्त तरीके से एक दूसरे पर प्रहार कर रहे है सैनिक योढा सभी वाक्य युद्ध मे व्यस्त है ।और तो और महराज कोई तो इतिहास बदल देने की फिराक मे है कभी यमराज को चित्रगुप्त बताता है कभी मन्दिर का निर्माण राजा तोडेर मल के द्वारा बताता है कभी मूर्ति को 2200वर्ष पूर्व की बहुत ही भ्रम फैला है महाराज ।अव प्रथ्वी पर उनके पुत्र के वंशजों मे न होकर संस्था और ग्रूप्स मे जाने जाते है और एक दूसरे से पूर्ण वैमनस्य रखे हुए है महाराज...न जाने कितने वंशज शकुनि का रोल अदा कर रहे है एक दूसरे बातचीत रेकोर्ड करवाकर सुनवा रहे है सभी स्वम को महान और सर्वोपरि साबित करने मे जुटे है कोई भी किसी से कमतर नहीँ दिखाना चाहता है ।सभी समाज का नेतृत्व करना चाहते है एन केन प्रकारेण सभी मे एक ललक है नेतृत्व की महाराज.....मै तो ये देखकर परेशान हूँ.....
इतना सुनकर धृत राष्ट्र ने अपना सर पकड़ लिया और बोले संजय...अर्थात चित्रगुप्त जी के कुल वंशजों मे महाभारत प्रारम्भ हो गया है जो गलती मैने की थी वही गलती वो दोहराने वाले है और आपस मे लड़कर स्वतः समाप्त होने का प्रयास कर रहे. है ।अव इन्हे भगवान चित्रगुप्त ही सद्बुढि प्रदान कर सकते है ।

 

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