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“केवल कायस्थों के ही नहीं बल्कि सभी के हैं भगवान् श्री चित्रगुप्त जी”

दुनिया में न्याय व्यवस्था के संचालन और लेखा जोखा रखने के लिए ही ब्रह्मा जी काया से  भगवान श्री चित्रगुप्त जी की उत्पत्ति हुई, श्री चित्रगुप्त भगवान समाज को व्यवस्थित करने में न्यायविद के रूप में सामने आते है यानी की उनके सामने सभी एक सामान और एक जैसे है | जिस ने भी इस धरती पर मानव रूप में जन्म लिया है उसके जीवन का लेखा जोखा भगवान् श्री चित्रगुप्त जी द्वारा ही रखा जाता है , फिर भगवान् चित्रगुप्त जी  सिर्फ कायस्थों तक ही सीमित क्यों और कोई भी भगवान् सिर्फ किसी एक जाती विशेष के नहीं होते/.

भगवान् श्री चित्रगुप्त जी कोई मिथकीय पुरुष या देव नहीं बल्कि ये वो आदिदेव है  जिनकी उत्पत्ति की चर्चा पदम् पुराण ,भविष्य पुराण ,मार्कंडेय पुराण, स्कंध पुराण, शिव पुराण ,भविष्य पुराण, अग्नि पुराण, बारह पुराण, और यम संहिता में मिलती है /

इनकी पूजा भगवान् श्री गणेश जी ने की ,आत्म ग्यानी राजा जनक ने की ,भगवान् राम ने की, गंगा पुत्र भीष्म पितामाह ने इनकी पूजा कर  ही इच्छा म्रत्यु का वरदान प्राप्त किया था   ऐसा उल्लेख रामायण और महाभारत  में आया है /

भारत का प्राचीन , पौराणिक, धार्मिक संस्कृतिक नगरी उजैन में ही स्रष्टि रचयिता श्री ब्रह्मा जी ने ११ हज़ार वर्षों तक तपस्या की , ब्रह्मा जी के तेज से उत्पन्न श्री चित्रगुप्त जी ने भी इसी तपोभूमि पे १० हज़ार वर्षो तक तपस्या की और ज्ञान प्राप्त किया , इसी लिए यहाँ बहुत ही प्राचीन चित्रगुप्त  धाम है /

20150430015416श्री अयोध्या जी में  मर्यादा पुरुषोतम राम जी ने लंका विजय के उपरांत सर्वप्रथम भगवान् श्री चित्रगुप्त जी के दर्शन और पूजा अर्चना की थी , कालांतर में इस मंदिर की आधारशिला ९९० ई. में यम दिव्तिया के दिन रखी गयी थी जोकि  मीरपुर ,ड़ेराबेबी( तुलसी उद्यान के सामने ) स्थित है /

ईसा के ४०० वर्ष पूर्व मुद्राराक्षस ने ही पटना के दीवान मोहल्ला में गंगा किनारे  स्थित श्री चित्रगुप्त आदि मंदिर (चित्रगुप्त घाट ) के स्थान पे ही यम दिव्तिया के दिन भगवान् श्री चित्रगुप्त जी की सामूहिक पूजा की प्रथा प्रारंभ की / चाणक्य की बहुचर्चित ऐतिहासिक पर्णकुटी भी इसी चित्रगुप्त घाट पे थी ,सन १५७३ की यम दिव्तिया पे राजा टोडरमल वही पर भगवान् श्री चित्रगुप्त जी की  पूजा करने के पश्चात भगवान् श्री चित्रगुप्त जी की काले कसौटी पत्थर की बनी प्रतिमा की स्थापना की और भव्य मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ कराया .

सिर्फ यही नहीं ऐसी और बहुत सी पौराणिक कथाये और बहुत से  प्राचीन चित्रगुप्त मंदिरों के साथ साथ  भगवान श्री चित्रगुप्त जी के मंदिर देश के लगभग सभी  जिलो में विराजमान है/ ईश्वरीय शक्ति को मानने  वाले और हिन्दू धर्म में विश्वास रखने वाले सभी लोगो को भगवान् श्री चित्रगुप्त जी की वास्तिवकता ,  भव्यता और संचालन कार्यकुशलता को समझना चहिये , उनकी आस्था और  आराधना के बिना जीवन की सभी तपस्याए अधूरी है , एक मात्र जीवित आदिदेव , देवोदेव भगवान् श्री चित्रगुप्त जी ही  है जो आज भी  न्याय व्यवस्था के संचालन और लेखा जोखा में कार्यरत है , और जो भी कलम का प्रयोग करता है  तो उसके आराध्य  सर्वप्रथम भगवान् श्री  चित्रगुप्त जी ही सर्वोपरी है .

भगवान् श्री चित्रगुप्त जी की पूजा, अर्चना व् आरती  प्रतिदिन सुबह अपने घर पे अवश्य करनी चहिये और  हर ब्रहस्पतिवार  निकटतम चित्रगुप्त मंदिर जाना चाहिए , फिर देखिये आप की मनोकामनाए कितनी जल्दी पूरी होती है , जीवन में सुख - शांति कितनी जल्दी आती है , क्युकी आपकी , हमारी , और सभी के जीवन का लेखा जोखा उन्ही के पास है /

शुक्ल पक्ष की दिव्तीय तिथि यानी की दीपावली (अमावश्या ) के दुसरे दिन चित्रगुप्त जी की पूजा का विशेष महत्व है , उस दिन  सामूहिक रूप से भगवान् श्री चित्रगुप्त जी की और कलम दवात की पूजा अर्चना करना अति फलकारी होता है

 जय श्री चित्रगुप्त भगवान की !

 विवेक श्रीवास्तव

संयोजक-नेशनल कायस्थ एक्शन कमेटी

पूर्व महासचिव –नॉएडा चित्रगुप्त सभा

९९१००६१२५९

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