Check the settings
Templates by BIGtheme NET
Home » चौपाल » इस पावन माह में फिर इतिहास दुहराने जा रहा है. एक नव हनुमान सूरज को निगलने जा रहा है : mbb सिन्हा

इस पावन माह में फिर इतिहास दुहराने जा रहा है. एक नव हनुमान सूरज को निगलने जा रहा है : mbb सिन्हा

जय लाला, जय गोपाला

धरती के तापमान के साथ हमारा कायस्थ समाज का तापमान भी बढ़ने लगा है. संगठनो की भीड़ में एक और कायस्थ संगठन “कायस्थ युवान” का उदय हो गया. यह माह राम और हनुमान जी के जन्मोत्सव का है. इस पावन माह में हमें लगा कि
फिर इतिहास दुहराने जा रहा है.
एक नव हनुमान सूरज को निगलने जा रहा है.
छाएगा फिर चित्र जगत में अंधियारा?
त्राहि त्राहि हम सब चित्रजों ने पुकारा !
अरे लल्लू सूरज कोई फल नहीं, आग है आग.
जीवित बचना है तो जल्दी से भाग.
इस विपदा को महसूस करते ही सर्वज्ञानी जी के ज्ञान चक्षु खुल गए हैं.
इधर,
हमारे कुलपुरुष भगवान् चित्रगुप्त दो बार जन्म लेने की तैयारी कर चुके हैं. सच भी है. जब भगवान् विष्णु दसियों अवतार ले सकते हैं तो श्रृष्टि के संचालक, नियंता एवं न्यायाधीश हमारे भगवान श्री चित्रगुप्त जी क्यों नहीं आ सकते दो-चार बार?
उधर,
संगठनाधिराज संन्यास की तैयारी में लग गए हैं. तो जाते-जाते भी पूंछ खीचने से लोग बाज नहीं आ रहे हैं. वही पुरानी बात- “आपने क्या किया? आपने क्या किया?”
हद हो गई? यह भी कोई पूछने की बात है? दिखता नहीं है क्या? ज्यादा दिक्कत है तो शंकर नेत्रालय चले जाएँ. इलाज के लिए नहीं, तीसरा नेत्र लगवाने?
कन्फ्यूजन बढ़ता ही जा रहा है. सर्वानंद सर्वज्ञानी का भी बुद्धि काम नहीं कर रहा है. हमें भी लगता है कि एक ही आसान रास्ता बचा है. किसी ने पूछ ही तो दिया - “क्या?”
हद हो गई, सबकुछ मुझे ही बताना पडेगा? अरे भाई कोमा में चले जायेंगे. फिर आप लोग वापस आने के लिए यज्ञ- हवन करते रहना ! हाँ.

हम तो बस चैन से लेटे-लेटे सबकुछ अंतर्दृष्टि से देखते रहेंगे. क्या मौज होगी न खाने-पीने का झंझट, ना रोजी-रोजगार की चिंता?

पर भाई, इस माया जगत में यह भी नहीं हो सकता न. हमारे कोमा में जाने के बाद इस कायस्थ जगत का क्या होगा भाई? यही चिंता तो खाए जा रही है न.

मन कड़ा किया और सोच लिया “न चैन से बैठूँगा और न किसी को बैठने दूंगा?”

फिर इधर,
एक धमकी मिल गई. कोई टिका-टिप्पणी नहीं. मैं कुछ नहीं सुननेवाला.
भाई, यह क्या बात हुई. कायस्थ समाज में दशकों से कोई किसी की नहीं सुनता और समझता. इस पुरानी बात को नयी उमंगों वाले युवाओं को क्यों दुहरानी पड़ रही है? यह तो खोज का विषय हो गया न.
थोड़े पन्ने पलटे तो पा लिया.-
एक व्यक्ति ने झूठ बोलकर दिग्भ्रमित किया. दुसरे दिन “ए दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे. छोड़ेंगे दम अगर साथ न छोड़ेंगे” गाया. तीसरे दिन – परामर्शी की परामर्श ही कचोट गया “युवान की उत्पति को ही अपनी परिकल्पना बता डाली” चौथे दिन एलान “जाना है तो जाओ. हमने छोड़ दिए दामन तुम्हारा”
च....च....च.... बहुत बुरा हुआ. अगर हम परामर्श दे रहे होते, तो मजाल है हम ऐसा करते?
कोई बात नहीं अगर गाडी स्टार्ट नहीं होती है तो प्लग साफ़ करना एवं बैटरी चेक करना तो आ ही जाता है न.
फिर उधर,
एक समाज सेवी के तीन-तीन राष्ट्रीय पदों पर सवाल उठा दिए.
और वही बात- आपने क्या किया? आपने क्या किया?
अरे भाई आपने भी तो गड़े मुर्दे में जान फूंकने चले हैं, आखिर क्यों?
हमारे एक भाई, जो सुबह शाम एक-एक घंटे होम्योपैथी डॉ की तरह मैटेरिया मेडिका पढ़-पढ़ कर कायस्थ समाज का इलाज कर रहे थे, वे मर्ज बढ़ता देख खुद चकरा गए हैं. किंकर्तव्यविमूढ ?

लेकिन मैं जानता हूँ सही इलाज. पर बताऊंगा नहीं. हाँ जी, हरगिज नहीं बताऊंगा. मैं जन्मजात डॉक्टर हूँ. क्या समझे?
अब इधर-उधर ज्यादा नहीं. बस! अब बस!!

mbb सिन्हा 

आप की राय

comments

About कायस्थ खबर

कायस्थ खबर(http://kayasthakhabar.com) एक प्रयास है कायस्थ समाज की सभी छोटी से छोटी उपलब्धियो , परेशानिओ को एक मंच देने का ताकि सभी लोग इनसे परिचित हो सके I इसमें आप सभी हमारे साथ जुड़ सकते है , अपनी रचनाये , खबरे , कहानियां , इतिहास से जुडी बातें हमे हमारे मेल ID kayasthakhabar@gmail.com पर भेज सकते है या फिर हमे 8826511334 पर काल कर सकते है आशु भटनागर सम्पादक कायस्थ खबर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*