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कवि स्वप्निल आप कायस्थ द्रोहियो की प्रतिकूल बातो की चिन्ता किये बगैर युवा कायस्थो के विकास के अपने प्रयास जारी रखिये।आप कामयाब होंगे: धीरेन्द्र श्रीवास्तव

उत्साही "युवा" कायस्थ कायस्थ युवाओ के विकास के लिये कुछ करना चाहता है तो उसे करने दो,काहे को और किसके लिये विरोध कर रहे है कुछ दिग्भ्रमित कायस्थ।

अजीब फैशन चलाया जा रहा है कायस्थ समाज को तोड़ने व अपमानित करने के प्रयासो का बमुश्किल छ-सात कायस्थो द्वारा। व्हाट्सेप ग्रुप बनाकर बिना सहमति के जोड़ो फिर योजनाबद्ध तरीके से किसी एक को टार्गेट कर उसके विषय में झूठे व अपमान जनक आरोप लगाकर चरित्र हनन इत्यादि का प्रयास करो।
आम तौर पर व्हाट्सेप ग्रुप के सदस्य में तीन चार वर्गो में विभाजित किये जा सकते है।

  • कट पेस्टर :- इनको दीन दुनिया से कोई मतलब नही। ये कही से प्राप्त पोस्ट को केवल फारवर्ड करने का ही योगदान करते रहते है।इनकी संख्या दस -पन्द्रह तक होती है ।
  • एडमिन :- वैसे तो ये ग्रुप की गतिविधियों को देखते भी नही।किसी का अपमान हो या असभ्य और अमर्यादित शब्दो का प्रयोग इनसे कोई मतलब नही।अनेक विवादित ग्रुपो में ये पॉच से बीस पचीस या अधिक पाये जाते है और ग्रुप को एक राज्य की तरह समझते है और स्वयं को काबीना मंत्री।
  •  मौन धारण करने वाले सदस्य :- इनकी संख्या दो सौ तक हो सकती है। ये बड़े ही सहनशील होते है और हो भ क्यो न ? इनको न कोई मेसेज पढ़ना है और न ही कोई प्रतिक्रिया देनी है। वास्तव में इनका मौन ही हमारे समाज के लिये घातक सिद्ध हो रहा है।
  • पीड़ित कायस्थ:-कायस्थ एकता व विकास के लिये कार्य करने वाले कायस्थ जो संघर्षो के समय प्रायः अकेले ही रहते है।इनकी बड़ी मुश्किल ये होती है कि अपने ऊपर लगाये गये आरोप का जवाब दे तो कभी न बोलने वाले कायस्थ भी समझाने लगते है कि क्यो निकृष्टो के मुँह लग रहे है और जवाब न दे तो आरोप लगाने वाले दावा करते न्हे कि आरोप सही है तभी जवाब नही दे रह है।
  • आरोप लगाने वाले सदस्य:- वर्ष 2016 में ऐसे आठ लोग चिन्हित किये गये थे जो इस वर्ष थक हारकर बिलुप्त कायस्थ की श्रेणी में आ चुके है।
    वर्ष 2017 में ये संख्या कम हुयी है।चेहरे बदले है।इस समय कुल पॉच छ्ह लोग ही इस श्रेणी में आते है।ऐसे साथी प्रहार तो तीव्र करते है पर इनका रिमोट कन्ट्रोल कही और है।

अनुमान है कि इस प्रकार का रिमोट कन्ट्रोल समाजसेवा का दावा करने वाली एक भद्र महिला व एक सज्जन पुरुष के पास है।मैने गत दिनो अपने एक पोस्ट में इस बात की चर्चा भी की थी।स्वयं को कम समय में बिना पर्याप्त कार्य किये स्थापित करने की भूख में सम्पूर्ण क्यास्थ एकता को तहस नहस करने वाले इन कथित समाजसेवियो को समझना चाहिये कि जिस दिन प्रमाण मिल जायेगा इहे कायस्थसमाज बक्शेगा नही।हालाँकि मुहे-मुँह चर्चा से इनका नाम सक्रिय समाज जानने लगा है।

इनकी कार्यशैली को देखे तो इन्होने योजनाबद्ध तरीके से सबसे पहले कायस्थ समाज के लिये समर्पित लोक प्रिय सांसद आदरणीय श्री आर०के०सिन्हा जी (हालांकि वितण्डा मचाने वाले उनके नजदीकी बनने के लिये अभी भी आतुर रहते है ),लोकप्रिय समाज सेवक आदरणीय श्री राजन श्रीवास्तव जी ( वितण्डा करने वाले इनसे मदद भी चाहते है),सुप्रसिद्व कायस्थ मीडिया पोर्टल "कायस्थखबर"के प्रबन्ध निदेशक अनुज श्री आशु भटनागर जी (हालांकि ये कायस्थ खबर के समाचारो में स्थान भी पाने की आकांक्षा रखते है),मै स्वयं(क्योकि इन सबको लगता है कि इनकी महत्वाकांक्षाओ की पूर्ति मै बड़ा अवरोधक हूँ),श्रीमती कविता सक्सेना जी(हालाँकि पहले इनके कहने में वो अब "कायस्थवृन्द" से बाहर गयी  पर शायद अब इनके घेरे से भी  बाहर हो गयी हैं।) और सबसे नया उदाहरण अनुज कवि श्री स्वप्निल श्रीवास्तव जी (ईमानदारी से कायस्थ युवाओ के विकास हेतु प्रयास के कारण स्वप्निल जी वितण्डाकर्ताओ के आकाओ की दुकाने जो बन्द कर देंगे हालाँकिे बाते तो घण्टो करते है।) सरीखे शक्सियतो की छवि खराब करने एवम बदनाम करने का प्रयास किया गया।

बहरहाल अनुज कवि स्वप्निल आप कायस्थ द्रोहियो की प्रतिकूल बातो की चिन्ता किये बगैर युवा कायस्थो के विकास के अपने प्रयास जारी रखिये।आप कामयाब होंगे।
हम आप व आप जैसे सकारात्मक कार्य करने वाले प्रत्येक कायस्थ के साथ है।

आपका अपना
धीरेन्द्र श्रीवास्तव
मुख्य समन्वयक "कायस्थवृन्द"

( भड़ास श्रेणी मे छपने वाले विचार लेखक के है और पूर्णत: निजी हैं , एवं कायस्थ खबर डॉट कॉम इसमें उल्‍लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है। इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी कायस्थ खबर डॉट कॉम स्‍वागत करता है । आप लेख पर अपनी प्रतिक्रिया  kayasthakhabar@gmail.com पर भेज सकते हैं।  या नीचे कमेन्ट बॉक्स मे दे सकते है ,ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी भेजें।)

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