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जंतर मंतर पर हाल के धरने पर बैठे सभी चित्रांश बंधुओं को मैं साधुवाद देती हूँ – चित्रांशी नमिता राकेश

मुझे खुशी है कि कवि स्वपनिल के नेतृत्व मे कायस्थ युवान एक सकारात्मक विचारधारा को लेकर निरंतर आगे बढ़ रहा है। बहुत कम समय मे कायस्थ युवान ने वो मुक़ाम हासिल कर लिया है जहां तक पहुचने के लिए किसी भी संस्था या संगठन को लंबा इंतजार करना पड़ता है।

हम अक्सर यह चर्चा करते हैं कि अब आगे की जिम्मेवारी आज की पीढ़ी पर है। वहीं हमारी यह चिंता भी रहती है कि क्या बदलते दौर में वर्तमान पीढ़ी हमारी सोच हमारी परिपक्वता या हमारे संस्कारों को आगे ले जा पाएगी कि नहीं ? लेकिन जब कोई युवा आगे बढ़ कर यह ज़िम्मेवारी सहर्ष अपने कंधों पर लेने को तैयार हो जाता है तो उसे हमारी पीढ़ी से शाबासी मिलने के स्थान पर अगर आलोचना का सामना करना पड़े तो यह कितने क्षोभ की बात है।

कायस्थ समाज में बहुत से संगठन हैं, संस्थाएं हैं। सबका उद्देश्य कायस्थ समाज का उत्थान है और होना भी चाहिए। लेकिन क्या अनगिनत संस्थाओं के बावजूद कायस्थ समाज का उत्थान अपेक्षा के अनुसार हो पाया है ? शायद नहीं।

हमें व्यक्तिगत दायरे से बाहर निकलना होगा औऱ कायस्थ समाज के उत्थान के लिए जो कोई भी सकारात्मक सोच और निस्वार्थ भाव से आगे आएगा ,उसका हाथ थामना होगा । उसका मनोबल बढाना होगा। यही हमारा कर्तव्य होना चाहिए।

जंतर मंतर पर हाल के धरने पर बैठे सभी चित्रांश बंधुओं को मैं साधुवाद देती हूँ। मैंने देखा कि हमारा युवा कायस्थ भीषण गर्मी में जंतर मंतर पर दिनभर धरना देने के लिए मौजूद है। किसलिए ? अपने कायस्थ स्मसज के लिए ।अगर हमारी युवा पीढ़ी यह ज़िम्मेवारी उठाने को तैयार है , अगर हमारा युवा वातावनुकूलित कमरों से निकल कर जून की भरी दोपहरी में पसीना बहा कर कुछ कर गुजरने को तैयार है तो हमे गर्व होना चाहिए। अगर हमारा युवा तमाम विलासिता औऱ ऐशोआराम , जिनकी हम अक्सर दुहाई देकर युवा पीढ़ी को कोसते हैं, को छोड़ कर, अपने कायस्थ समाज के लिए कुछ करना चाहता है तो हमे उसे अपना प्रतिद्वंदी ना समझ कर उसका कंधा थपथपाना चाहिए। हमे यह सोच कर गर्वित होना चाहिए कि जो काम हम आपसी लड़ाई झगड़ों औऱ मनमुटाव के चलते नहीं कर सके, उस काम का बीड़ा कायस्थ युवान ने बखूबी उठा लिया है। हमे आपसी ईर्ष्या भुला कर शौक से अपनी पतवार इन युवाओं को सौंप देनी चाहिए और समस्त कायस्थ समाज के समक्ष ऐसे कर्मठ युवाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए।

हम अगर बड़े हैं तो बड़े बन कर दिखाएं
अपने हाथों से झुक कर बच्चे को उठाएं
सौंप दें पतवार उन मज़बूत इरादों को
उनके कदम के साथ कदम अपना बढ़ाएं।

मुझे पूरा विश्वास है कि कायस्थ युवान द्वारा रेलवे स्टेशन का नाम आदरणीय शास्त्री जी के नाम पर करने का जो मुहिम हस्ताक्षर अभियान के रूप में शुरू किया गया है , उस पर माननीय श्री आर के सिन्हा जी ने पहला हस्ताक्षर करके जो कामयाब शुरुआत की है , उसे अपार सफलता मिलेगी । श्री आर के सिन्हा जी समस्त कायस्थ समाज के मुखिया हैं । जब पहला आशीर्वाद उनका मिल गया और रथ कायस्थ युवान ने हांक दिया तो कामयाबी निश्चित है । यही वो आदर्श स्थिति है जब पुरानी पीढ़ी ओर युवा पीढ़ी एकसाथ एक ही उद्देश्य के लिए सर्वजन हिताए काम करती हैं तो कोई ताकत उनके बढ़ते कदमों को रोक नहीं सकतीं।

मैं समस्त कायस्थ समाज के मुखिया आदरणीय आर के सिन्हा जी का तहे दिल से आभार व्यक्त करती हूं और आशा व्यक्त करती हूँ कि इसी तरह उनका साथ हमें हमेशा मिलता रहेगा ।

हम चुप हैं बेशक़ पर शब्द ज़िंदा हैं अभी
आसमान में देखो उड़ता परिंदा है अभी
हर रूप में हर रंग में ढलना नहीं आता
गिरगिट की तरह हमको बदलना नही आता
काम सभी करते हैं खामोशी से अपने
मौजों की तरह सिर्फ, उछलना नहीं आता
@ नमिता राकेश

कायस्थ युवान के हड़ताक्षर अभियान को भरपूर सफलता मिले, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ
चित्रांशी नमिता राकेश
वरिष्ठ साहित्यकार

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