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Home » चौपाल » अनकही » मुद्दे की बात : अपने अंदर झाँके कायस्थ समाज-महथा ब्रज भूषण सिन्हा
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मुद्दे की बात : अपने अंदर झाँके कायस्थ समाज-महथा ब्रज भूषण सिन्हा

धाड़ धाड़ क्यों रो रहें है आप? आपने क्या खो दिया? क्या था आपका अपना? उनके लिए आँसू क्यों बहाना, जो आपके कभी न थे, न हैं और न होंगे?

बिहार ही क्यों, पूरे देश भर मे कायस्थों की स्थिति एक ही है। बिहार का वर्तमान मंत्रिमंडल का गठन राज्य मे कायस्थों की औकात बता दी है। घर-घर मे बंट जाने वाला कायस्थ दवात पुजा के अवसर पर इकट्ठे होने का रस्म अदायगी के अतिरिक्त कुछ नहीं करता। कायस्थ होने के नाम पर आँसू बहाने से सत्ता मे भागीदारी क्योंकर मिल जानी चाहिए?
इतिहास साक्षी है कि कायस्थों को कुचलने का काम कायस्थ नेता ही करते आए हैं, जबकि समाज के दूसरी जाति के नेताओं के मन मे कायस्थ के प्रति आदर आज भी दिखती है। आप पूर्व से वर्तमान तक नजर डालें तो पाएंगे कि कायस्थ राजनीति मे ही नहीं किसी भी क्षेत्र मे जब कोई मुकाम पा लेता है, तो सबसे पहला काम यह करता है कि वह कायस्थ समाज से अलग हो जाता है। कायस्थ शब्द ही उसे गाली सरीखा लगता है।

आज कायस्थ समाज के कुछ सामाजिक नेता बिना पुछे जो घड़ियाली आँसू का प्रदर्शन कर रहे हैं, उन पर हंसी आती है। आपकी प्रतिकृया से न कायस्थ राजनीति को कोई मतलब है और न ही उन कायस्थ नेताओं को, जिनके लिए आप अपना अनमोल शब्द लूटा रहे हैं। आप उंगली पर नाम गिनते रहिए, आपका नाम राजनीति करनेवाले कायस्थ नेताओं की जबान पर नहीं आएगी। बिहार मे जितने भी कायस्थ राजनीतिक नेता हैं, उन्होने कायस्थ समाज का कितना ख्याल किया है? कितने कायस्थों की उन्होने मदद की है? इसे हर कायस्थ जानता है। इसलिए समाज सेवा के क्षेत्र मे काम करनेवाले भाई, अगर हो सके तो आप कायस्थ के काम आइए और नेताओं को उनके हाल पर छोड़ दीजिये। अन्यथा आप भी कायस्थ समाज मे तिरस्कृत होते रहेंगे।

सामाजिक संगठन के भाई, जरा अपने पर नजर डाल लें। पद के अलावे क्या है हमारे पास? कायस्थ समाज का प्रतिनिधित्व का स्वांग ? इतनी योग्यता व क्षमता विहीन कि हम संगठन के कार्य को भी न पहचान सकें? बैठक का ढोंग, राजनीतिक नेताओं की चमचागीरी, अपने निजी हित साधने की उत्कंठा तथा चर्चा सिर्फ राजनीतिक ?

अतः अपना कीमती आँसू इस पर नहीं बहाईए कि हमे कुछ नहीं मिला ? आपको बहुत कुछ मिला है। एक बड़ा अवसर अपने आपको पहचानने का। अपना विश्लेषण करने का। एक बड़ा मौका सुधरने का। और अपने नेताओं को यह समझाने का कि समाज को नहीं पहचानोगे, तो तुम्हें भी कोई नहीं पहचानेगा।
-महथा ब्रज भूषण सिन्हा

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