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इन्सानियत : एक दोस्त और क्राउड फंडिंग ने दिया पूजा भटनागर को नया जीवन, लिवर डोनेट कर बचाई दोस्त ने बचाई जिंदगी

कायस्थ खबर डेस्क I कहते है परिवार भी जब साथ ना दे तो दोस्त भगवान् की तरह साथ आ जाते है I ऐसा ही कुछ हुआ पूजा भटनागर की जिन्दगी में I

पूजा पिछले 17 सालों से लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। डॉक्टरों का कहना था कि अब सिर्फ ट्रांसप्लांट से ही पूजा की जान बच सकती है। ऐसे में घरवालों ने डोनर तलाशना शुरू किया, लेकिन कोई भी लीवर डोनेट करने के लिए तैयार नहीं था। पूजा भटनागर ने इसके लिए फेसबुक पर जब अपनी कहानी डाली तो  इस कहानी में पूजा के पुराने दोस्त प्रसन्ना गोपीनाथ की एंट्री हुई।

उनके पुराने दोस्त प्रसन्ना गोपीनाथ फौरन चेन्नई से दिल्ली पहुंचे। उन्होंने अपना लीवर डोनेट कर दोस्त की जिंदगी बचाने का फैसला लिया। हालांकि अब भी सब कुछ इतना आसान नहीं था। गैर-संबंधी अंग दाताओं के बारे में ट्रांसप्लांट ऐक्ट की नयी मुश्किले थी। मैक्स की एथिकल कमिटी ने सारे विवरणों का बारीकी से अध्ययन किया। मैक्स हॉस्पिटल के चीफ लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ सुभाष गुप्ता ने बताया, 'अधिकारियों ने रोगी और डोनर के बीच की दोस्ती पर विचार किया और लिवर डोनेशन की अनुमति दी।'

पूजा की कहानी में मुश्किलें इसके बाद भी कम नहीं हुई थी  लीवर ट्रांसप्लांटऑपरेशन पर 25 लाख रुपये खर्च होने थे, जबकि पूजा के इलाज पर पहले ही काफी पैसा खर्च हो चुका था। ऐसे में क्राउड फंडिंग की मदद से पैसा इकट्ठा किया गया I अनुराग भटनागर ने बताया कि ऐसे में पूजा के स्टूडेंट्स, दोस्त और परिवार के सदस्यों ने क्राउड फंडिंग की मदद लेनी शुरू की। पूरी दुनिया से 363 लोगों ने ऑनलाइन फंडरेजिंग प्लैटफॉर्म के जरिए पैसे भेजे। इसके बाद लिवर ट्रांसप्लांट मुमकिन हो पाया, 21 जुलाई को डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन किया और पूजा की जान बचाई जा सकी।। डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी के बाद दोनों ही स्वस्थ हैं।

१० साल पुरानी है पूजा और गोपीनाथ की दोस्ती 

गोपीनाथ और पूजा भटनागर की दोस्ती एक दशक पुरानी है। 2007 में शुरू हुई अपनी दोस्ती को याद करते हुए गोपीनाथ ने बताया, '10 साल पहले वेल्स के ग्लामोर्गन यूनिवर्सिटी में पढ़ने के दौरान मैं पूजा और उनके पति के साथ फ्लैट शेयर करता था। वह (पूजा) मेरे लिए परिवार की तरह थी। ऐसे में मैं उसे एक डोनर की तलाश में मरने के लिए कैसे छोड़ देता?' 34 साल के गोपीनाथ डॉग ट्रेनर हैं। वह फिलहाल गुड़गांव में रहते हैं।

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