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राजस्थान में मनीष श्रीवास्तव जी द्वारा समाज को विकृत करने की साजिश रची गई तो ललित सक्सेना उन्हें कभी माफ नहीं करेगा- ललित सक्सेना

दोस्तों साथियों समाज बंधुओं हमारे कायस्थ समाज में संगठनों की कोई कमी नहीं हर घर से एक अध्यक्ष है और हर घर से एक कार्य करता है परंतु बड़े ही अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारा कायस्थ समाज आज इन राजनीतिक नेताओं के चक्कर में दिग्भ्रमित हो रहा है और समाज को एक करने का दावा करने वाले संगठन नदारद हैं अखिल भारतीय कायस्थ महासभा जिसे की सभी लोग जानते हैं और हमारे समाज का सबसे पुराना संगठन के रूप में स्थापित है परंतु अभी सोशल मीडिया WhatsApp ग्रुप Facebook ट्विटर आदि पर अपने आप को राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संयोजक कहने वाले मनीष श्रीवास्तव जी द्वारा समाज को विघटित करने का प्रयास किया जा रहा है अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के विवाद हमारे समाज और युवाओं से छुपे हुए नहीं हैं जहां एक और समाज के वृद्ध जनों को युवाओं की सोच के साथ चलने के लिए जागरुक किया गया उसका ताजातरीन उदाहरण अखिल भारतीय कायस्थ महासभा पारिया साहब और अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ए के श्रीवास्तव साहब का एक होना समाज को उत्साहित कर रहा है वही समाज के ऊपर राज करने और समाज को दिग्भ्रमित करने का प्रयास मनीष श्रीवास्तव द्वारा किया जा रहा है मैं यह नहीं कहता किस संगठन मत बनाओ संगठन बनाओ परंतु समाज को दिग्भ्रमित ना करें और आदरणीय मनीष श्रीवास्तव जी द्वारा समाज को दिग्भ्रमित किया जाना हमारे समाज को खासकर युवाओं को पसंद नहीं आ रहा है जब अखिल भारतीय कायस्थ महासभा विवादित थी तब मनीष श्रीवास्तव जी द्वारा राजस्थान में कुछ नियुक्तियां दी गई थी जोकि आदरणीय एके श्रीवास्तव जी ग्रुप मैं अपने को प्रदेश संयोजक कहते हुए मनीष श्रीवास्तव जी द्वारा दी गई थी परंतु राजस्थान में आदरणीय सारंग साहब द्वारा संचालित अखिल भारतीय कायस्थ महासभा और आदरणीय पारिया जी के द्वारा संचालित महासभा के पदाधिकारी नियुक्ति थे मनीष श्रीवास्तव जी द्वारा राजस्थान के कायस्थ समाज को दिग्भ्रमित किया गया और तीसरा अखिल भारतीय कायस्थ महासभा अब चौथा कहा जाएगा को मनीष श्रीवास्तव जी द्वारा स्थापित समाज को दिग्भ्रमित करने हेतु किया गया क्या यह उचित है आज हम आज हम युवा आखिर किस महासभा को असली समाज को समर्पित समझे और किन्हे समाज को दिग्भ्रमित करने वाला समझे आखिर पद के लालच में मनीष श्रीवास्तव जी द्वारा अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के नाम पर ही संगठन को पंजीकृत करवाना इनकी लालसा को दिखाता है और समाज सब देख रहा है कौन संगठित करना चाहता है और कौन समाज के ऊपर राज करना चाहता है मेरा निजी विचार है कि हमारे समाज की एकमात्र पुराने संस्था संगठन को बदनाम करने वाले हर उस शख्स को समाज कभी माफ नहीं करेगा और करना भी नहीं चाहिए आखिर मनीष श्रीवास्तव जी की क्या लालसा है यह तो वही जाने परंतु हमारे समाज जो कि एक बुद्धिजीवी वर्ग से आता है वह बेवकूफ समझने की भूल ना करें और हां यदि राजस्थान में मनीष श्रीवास्तव जी द्वारा समाज को विकृत करने की साजिश रची गई तो ललित सक्सेना उन्हें कभी माफ नहीं करेगा

ललित सक्सेना

प्रस्तुत विचार लेखक के अपने है , लेख में कही गयी बातो से कायस्थ खबर का सहमत होना अनिवार्य नहीं है , प्रतिउत्तर में आप अपना जबाब नीचे कमेन्ट बाक्स में दे सकते है या फिर हमें kayasthakhabar@gmail.com पर मेल कर सकते है 

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