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वैदिक ज्योतिष गणना “शनि-चंद्र युति का जातक पर असर” : निखलेश माथुर

आज हम कुण्डली में शनि-चंद्र युति का विवाह में देरी का क्या असर होगा, इसकी व्याख्या करते हैं ।

शनि और चंद्र की युति ज्योतिष में बहुत अच्छी नहीं मानी जाती। कुछ combinations को छोड़ दें तो ज्यादातर यह योग व्यक्ति को मानसिक रूप से दुख देनेे की कोशिश करता है।

हालांकि हम सब में परमात्मा ने इतनी शक्ति दी ही है कि हम चाहें तो अपने मन का सही उपयोग करके आते हुए दुखों और परेशानियों को काफी हद तक आसानी से झेल सकते है। अपने ऐसे प्रयत्नों से धूल के गुबार से निकल के महज कपडे झटकते हुए आगे बढ़ सकते है।

ईश्वर ने हमें इतनी शक्ति दी है मगर materialistic world में रह कर शायद हम कुछ कमजोर हो गए हैं, और इसलिए हम अपनी शक्तियों का खुद के मानसिक और अद्यात्मिक विकास के लिए effectively इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।

हम देखते हैं की हमारे आसपास में ही कुछ लोगों को कम परिश्रम करने पर भी results अच्छे मिल जाते है। उन्हें समय पर अचानक ही सही मदद मिल जाती है। यह वह लोग हैं जिन्हें Blessings मिली होती हैं। यह उनके प्रारब्ध की वजह से भी होता है। यह उनकी कुंडली की देख कर बताया जा सकता है। इसका ताल्लुक शनि-चंद्र से भी कुछ -कुछ है इसलिए इसका जिक्र यहां हो रहा है।

आप भी अपनी कुंडली खोल कर देखें की आपके प्रथम भाव (लग्न) का स्वामी का नावें भाव (9th house) के साथ क्या 5:9 का सम्बन्ध बना रहा है ? या फिर दोनों कहीं साथ एक ही भाव में बैठें हैं ?

उदाहरण के लिए धनु लग्न की कुंडली से समझते हैं कि क्या लग्नेश गुरु और नवमेश सूर्य कुंडली में एक दूसरे से 5 अथवा 9 घर दूर ह, या फिर क्या उनकी युति है । या फिर नवमेश कुंडली के दूसरे भाव में हैं। अगर ऐसा है तो फिर उस जातक की कुंडली में Blessings हुईं।

अगर यह नहीं, तो यह देखें की क्या नवमेश (9th lord) अपने से छटे स्थान पर है (6th i.e 2nd from lagan). धनु लग्न की ही बात करें तो क्या सूर्य दूसरे भाव ( 2nd house) में है ।

यह भी blessings होंगी।

यही योग चंद्र और सूर्य कुंडली से भी देखना न भूलें।

Blessings का मतलब पाठक यह न समझें कि उनकी जिंदगी में सुख ही सुख परोसा जायेगा।
Blessings होने का मतलब है की उस व्यक्ति को समय रहते ऐसा protection मिल जाता है जिससे वो समस्याओं का या तो उपचार कर लेता है, या फिर उन्हें झेल लेने की क्षमता बढ़ा लेता है।

मनुष्य की खुद की कोशिशों से भी उसे blessings शर्तिया मिल जातीं हैं।

शनि और चंद्र की युति निश्चय ही जातक के विवाह में देरी कराती है। कार्य को देरी से करना शनि की एक विशेष property है. यह बात अलग है की वह कभी अच्छे के लिए देरी कराते है, कभी किसी ओर कारण के लिए। बहरहाल देरी करना उनकी एक विशिष्ट नेचर है।

अब चंद्र की बात करें। सब प्राणियों पर चंद्र का असर खूब रहता है। शनि और चंद्र की युति की वजह से शनि का मन पर हावी रहना लाजिमी है। चंद्र खुद किसी और गृह पर हावी नही हो पाते। शनि और चंद्र के योग व्यक्ति में उत्सुकता के प्रभाव को घटाता है। शनि तेज नहीं चल पते, इसलिए उनका effect भी उतरने में देर लगता है।

जिस व्यक्ति में शनि-चंद्र की युति के कारण उत्साह की कमी आ जाये तो उसके पुनः उत्साहित होने में समय लग जाता है। यह योग अक्सर जीवन में नैराश्य देने की कोशिश करता रहता है। इस योग में व्यक्ति अपना मन मजबूत कर ले और अपना motivation level गिरने न दे तो यही उस व्यक्ति की समझदारी होगी।

Motivated रहने से मनुष्य ख़ुशी की तरफ बढ़ता है और इससे शनि का बुरा असर कम होने लगता है। व्यक्ति के यह योग हो और शादी में देरी हो रही हो तो कम से कम उस शख्स को demotivate तो न करें।

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में ऊपर वर्णीत blessings हैं तो वह blessings शनि से negative असर को कम करेंगी, उस व्यक्ति के पास ऐसी स्थितियां आती रहेंगी जिससे उसे दिक्कतों से protection मिलती रहेगी। या किसे न किसी का हाथ उसके ऊपर आशीर्वाद के रूप में रहेगा।

ज्यादातर कुंडलियों में देखा गया है कि ऐसे में पिता का या पिता समान व्यक्ति विशेष जा हाथ जातक को दिशा दिखता रहता है। सही समय पर उसे मदद बड़ी तत्परता से मिलती है।

जातक की शादी होने की अड़चने ऐसे में किसी और व्यक्ति द्वारा तुरंत दूर कर दी जाती हैं। कुंडली में नवां घर वैसे भी पिता या पिता सामान का होता है और नवां घर विवाह का मूल करक घर भी होता है।

शनि- चंद्र शादी में देरी करने में कसर नहीं छोड़ते। हाँ अगर जातक मिथुन लग्न का है तो बात अलग हो जाती है क्योंकि मिथुन लग्न में शनि-चंद्र कीु युति Blessings हुई। ऐसा क्यों है इसका अब पाठक खुद अंदाज़ लगाएं। और भी तरीकों से blessings हुईं तो शनि-चंद्र युति का योग देरी को बहुत ज्यादा देरी में नहीं कर पायेगा।

कुंडली में और भी योग ऐसेे हो सकते है जो शनि-चंद्र युति के कुप्रभाव को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। उनका जिक्र फिर किसी और लेख में। परंतु यह निश्चित है कि शनि-चंद्र युति के कुप्रभावों को कम करने वाले सभी योगों में जातक के खुद के efforts बेहद जरुरी होते हैं। शनि खुद ही एक slow moving planet है। जब अच्छा देता है तो खूब, और जब परेशानी देता है तो भी दूर तक। Blessings के अलावा सिर्फ खुद के efforts ही हैं जो इस योग की negativity को दूर कर सकते हैं। पाठकगण यह समझ लें।

यहाँ में यह और कहना चाहूंगा कि अगर आपकी संतान की कुंडली में शनि-चंद्रमा की युति है तो कृपया उसे खूब motivated रखें, उसे हमेशा लगे की आपका हाथ उसके सिर और है। इससेे शनि-चंद्र युति द्वारा उत्पन्न हुई नाकारात्मत्ता निश्चित ही दूर होगी व आपकी संतान में सकारात्मकता आएगी। जब negativity दूर होगी तो जातक उल्ल्हास की तरफ बढ़ेगा व उत्साहित रहेगा। जब उत्साह भरपूर होगा तो वह जिम्मेदारी से नहीं भागेगा। ऐसा होने पर विवाह (जो की मनुष्य जीवन का एक जरुरी पहलू है ), में उत्पन्न हुई देरी भी कम होगी।

इसको कहते हैं efforts द्वारा ग्रहों के ख़राब effects से कुछ हद तक बचना. शनि वैसे भी आपसे efforts चाहते हैं और चंद्र एक तरह से आपका मन है। तो समीकरण हुआ अपने मन पर अपने efforts द्वारा control.

शनि-चंद्र की युति से घबराएं ना, बल्कि अपने efforts की मात्रा को और बढ़ा लें। यह योग कई बार कुछ अच्छे के लिए भी देरी करता हैं और व्यक्ति को व्यवहारिकता तो निश्चित देता ही है।

निखलेश माथुर
चेतन्यग्राम
बदनावर (जिला-धार) म.प्र.
मोबाइल 9981992706

चित्रांश निखलेश माथुर  लेखक भी है I उनका  नया फिक्शन नावेल "The Storm in the Silence" मार्केट में धूम मचा रहा है 

( The writer is also author of novel 'The Storm in the Silence')

लेख में प्रस्तुत जानकारी लेखक की है , कायस्थ खबर का उससे सहमत या असहमत होना आवश्यक नहीं है 

 

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