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सूतक काल मैं पूजन कितना उचित – सच श्रीवास्तव

सभी चित्रान्श बंधु 4 अप्रैल को भगवान श्री चित्रगुप्त जी का प्रगटोतस्व का आयोजन बड़ी धूमधाम से मनाने के उत्साहित हैं , परन्तु क्या उनको ज्ञात है की उस दिन चैत्र पूर्णिमा को ही चंद्र ग्रहण भी है , यह भी सही है की ग्रहण चंद्र ग्रहण लगने के तीन पहर पहले (एक पहर तीन घंटे का होता है) यानि नौ घंटे पहले सूतक लग जाते हैं , सूर्य ग्रहण में सूतक चार घंटे पहले लगते हैं , यह भी ज्ञात कराना उचित समझता हूँ कि चंद्र ग्रहण पूर्णिमा को व सूर्य ग्रहण अमावस्या को लग��े हैं ! चंद्र ग्रहण में राहु व सूर्य ग्रहण में केतु इनको ग्रसता है , इस ग्रहण के सूतक प्रात: सूर्योदय के साथ ही लग जाएँगे, व मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएँगे ! ग्रहण दोपहर 3.36 मिनिट पर आरम्भ होगा व सायंकाल को 7.19 मिनिट पर समाप्त होगा ! सूतक काल में हवन पूजन व मूर्ति स्पर्श करना वर्जित है! और इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के बहुत निकट रहेगा, इसीलिए इसका प्रभाव भी विशेष रहेगा , सूतक काल में हवन पूजन किया हुआ व्यर्थ जाता है, यदि आप चाहते हैं कि आपके द्वारा आपके आराध्य के लिये किया गया हवन पूजन वह स्वीकार करें तो यह क���र्य सूतक काल में कदापि ना करें ! यदि यह कार्य केवल अपने नाम प्रचार हेतु कर रहें हैं तो अवश्य करें ! आपका ! सच श्रीवास्तव

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