हम केवल अपने समाज के गौरवशाली इतिहास का गुणगान करते रहते है और समाज मे एकता का रोना रोते रहते है।जबकि मुझे लगता है समाज मे एकता की और एक होनी की भावना की कमी नही बस बैचारीक मतभेद और अविश्वास की भावना है। चूकि हमारा समाज बुद्धजिवि है तो मतभेद होना लाजमी है।अब हम अन्य जातियो और समाज से अपनी एकता की तुलना करे तो बेशक निराशा होती है जबकी कायस्थ एकता एवम् उत्थान के नाम पे 1500 से भी अधीक संस्थाए है कई संगठन तो ऐसे है जिसमे केवल पदाधिकारी ही है ना कार्यकर्ता ना कोई सदस्य कुछ लोग इसे समाज की एकता मे मुख्य बाधा मानते है। पर यह समस्या दुर होनी थोडी मुश्किल है क्योकि हर संगठन किसी मुख्य विषय बिन्दु पर कार्य करने की सोच से बना है तो क्यो ना इसे भी हम एक सुनहरे अवसर के रूप मे देखे और हर संगठन को एक टीम की तरह समझे और वह जिस बिषय वस्तु पर समाज के लिए कार्य करना चाहे उन्हे वह कार्य करने की आजादी और पूर्ण सहयोग दिया जाये।तथा एक ऐसा समिति का गठन इन सभी संगठनो के पदाधिकारीयो के सहयोग से किया जाये जो इन संगठनो के कार्यो का आकलन करे ताकी संगठन भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए समाज के उत्थान के कार्यो मे पुरा सहयोग करे।और देश भर के तमाम कायस्थो को मुख्यधारा से जोडा जा सके और एक ऐसा डाटा बेस तैयार हो देश भर के कायस्थो का जो एक क्लिक करते ही उनकी सारी जानकारी हमारे पास हो और समाज मे हो रहे उत्थान कार्यो की जानचारी सभी आम चित्रांश बंधुओ के पास हो।
आदित्य श्रीवास्तव सिवान बिहार
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