
जन्मदिन (22 जुलाई)पर कायस्थ-रत्न मुकेश को उन्हीं की आवाज़ में हार्दिक श्रद्धांजलि !
कायस्थ-रत्न स्व. मुकेश चन्द्र माथुर का जन्म 22 जुलाई, 1923 को दिल्ली में हुआ था। इनके पिता जे॰सी॰ माथुर अभियंता थे । दसवीं उतीर्ण करके पी.डब्लू.डी. दिल्ली में नौकरी करने वाले मुकेश अपने स्कूली दिनों में के. एल. सहगल के गीत सुना कर वाहवाही लूटते थे ! 1946 में मुकेश की शादी बची बेन (सरल मुकेश) से हुई ! वे प्रतिदिन 5 बजे उठकर रियाज़ करने के बाद बगीचे में टहलते थे और फिर रामचरित मानस का पाठ करते थे । 1941 में 'निर्दोष' फ़िल्म से मुकेश ने शुरुआत की , कई फिल्मों में अभिनय किया लेकिन प्रारब्ध में उन्हें अभिनेता नहीं एक महान गायक बनना लिखा था । गायक के रूप में पहला गाना 1945 में फ़िल्म 'पहली नजर' में 'दिल जलता है तो जलने दे' गाया , उसके बाद तो मुकेश की आवाज़ देश के हर कोने में गूंजने लगी। मुकेश की आवाज़ दिलीप कुमार के लिए फिट होती गई और फिल्म "अंदाज" में उन्होंने 4 गीत दिलीपकुमार के लिए गाये थे । "तू कहे अगर जीवन भर मैं गीत सुनाता जाऊँ...." आज भी श्रोताओं मे आज भी लोकप्रिय है । राज कपूर की सभी फिल्मों मुकेश के पार्श्वगायन के बिना पूरी नहीं हुई थी । उन्हें दर्द भरे गीतों का बादशाह भी कहा जाता है । मुकेश की ''तुलसी रामायण'' आज भी लोगों को भक्ति की समाधि में डाल देती है। 'फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार' पाने वाले मुकेश पहले पुरुष गायक थे। लता के साथ एक संगीत कार्यक्रम के दौरान मुकेश का निधन 27 अगस्त, 1976 को अमरीका में हो गया था ।ज़रूर पढ़े : कायस्थ खबर परिचर्चा और संवाद की वेबसाइट लांच, कार्यक्रम में उपस्थति के लिए अपनी सीट ऑनलाइन बुक करे जन्मदिन पर मुकेश को उन्हीं की आवाज़ में हार्दिक श्रद्धांजलि !
“एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जायेंगे प्यारे तेरे बोल.............”साभार : अशोक सक्सेना
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