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कायस्थवृन्द या कोई सामाजिक संगठन किसी की निज़ी जागीर नही हो सकती – डा अरविन्द श्रीवास्तव

तमाम विवादो में हमेशा शांत रहने वाले कायस्थ वृंद के राष्ट्रीय संयोजक डा अरविन्द श्रीवास्तव ने आखिर कार संजीव सिन्हा के लगातार बयानों और विवादों पर आपना आक्रोश बम फोड़ ही दिया I गौरतलब है की डा अरविन्द हमेशा ही शांत रहने और सीधी बात कहने के लिए जाने जाते हैं I कायस्थ वृंद में राष्ट्रीय संयोजक के तोर पर इसकी रीढ़ भी माने जाते है I डा अरविन्द ने सुबह भी संजीव सिन्हा को इशारों में शांत रहने का निवेदन किया था लेकिन आखिरकार अब उन्होंने संजीव सिन्हा को सीधा निशाने पर ले ही लिया I डा अरविन्द लिखते है

स्नेही संजीव जी
यदि आपको याद हो तो जब लखनऊ में पहली बैठक आपने व् धीरेन्द्र जी ने आहूत की तो मायने ही पूछा था कि जब त्रय मासिक बैठके होनी है तो ये कैसे की गई फिर बैंक खाता खोलने की बात आई तो फिर मायने आप सबके भी कहा कि जब कायस्थवृन्द व् जय चित्रांश आंदोलन में न किसी तरह की सदस्यता है न ही किसी से किसी भी तरह का चंदा सहयोग लेना है तो फिर बैंक खाते की क्या आवश्यता लेकिन आप लोग प्रथम बैठक मिर्ज़ापुर में हुये निर्णयो को नज़रदाज़ करते हुये अपनी महत्वाकाक्षा की पूर्ति हेतु आपलोगो ने सामूहिक अवधारणा को कुछ लोगो की निज़ी अवधारणा तक सिमित कर दिया जिससे आपसी सौहार्द बिगड़ा जिसका मुझे बेहद कस्ट है शायद आप लोगो ने मेरे विरोध को समझ होता तो हमसब शर्मसार न होते अपनों के बीच।
फैज़ाबाद में 8जनवरी को जब चित्रांश वेलफेयर ट्रस्ट का शुभारम्भ बैनर देखकर भी मायने धीरेन्द्र जी से कहा की ये ट्रस्ट कायस्थवृन्द के अन्य सहयोगी संगठन की तरह से ही मान्य हो क्योकि अपने समाज के सबसे बड़े के पी ट्रस्ट से देश का कोई एक जनपद के कायस्थ फलित व् संतुष्ठ न हो सका जबकि के पी ट्रस्ट के संस्थापकों ने अपनी करोड़ की संपत्ति दान करके बनाया था तो फिर चंद्र लोगो के छोटे छोटे सहयोग से ये ट्रस्ट कैसे चलेगा भविष्य में सिर्फ ये विवाद का कारण बनेगा और एक माह में ही सब सबके सामने आगया।

संजीव भाई आप फैज़ाबाद की बैठक तैयारी में कई बार फैज़ाबाद गए लेकिन कायस्थ वृन्द के संकल्प के क्रियनवान् का ध्यान नही रख पाये कि कायस्थवृन्द में माला मंच निषेध है यदि आप सबको याद हो तो मायने मंच व्यवस्था को तुरंत परिवर्तित करवाया कि पुरुष बहुत देर से मंचासीन है अब महिलाओ को मंचासीन कीजिये, दूसरे दिन के लिए पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार सारे सम्यवको को एक बराबर राउंड में मैने आपके माध्यम से बैठवाया।

मायने आज आप सबको ये इसलिए बता रहा हूँ कि किसी भी परिवार संगठन मंच मोर्चा या व्यक्साय में जब कभी हम सब पहले दिन के निर्णय या नियम में अपनी मर्ज़ी से छोटे छोटे बदलाव करलेते है तो यही हस्रः होता है।
अभी भी वक़्त है धैर्य सहनशीलता व् सौहार्द से प्रयास कीजिये अन्यथा आप सबकी जो मर्ज़ी।
यदि किसी को मेरे विचार से कस्ट हुआ हो तो मुझे छमा कीजियेगा।

कायस्थवृन्द या कोई सामाजिक संगठन किसी की निज़ी जागीर नही हो सकती।

।।जय चित्रांश।।

डॉ अरविन्द श्रीवास्तव
राष्ट्रीय संयोजक~कायस्थवृन्द

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