क्या ABKM के बिखराब के लिए विश्व विमोहनकुलश्रेष्ठ की महत्वाकांक्षा ही ज़िम्मेदार है ?आखिर वो सपा नेता कौन है जिसके इशारे पर कायस्थों की सबसे पुरानी संस्था का ये हाल हुआ ?क्या ये २०१७ के यूपी चुनावो के लिए समाजवादी पार्टी का कायस्थों की भाजपा के साथ प्रतिबधता को अपेने पक्ष में करने की साजिश थी ?क्या राजनैतिक दलों की आपसी लड़ाई में कायस्थ समाज की महान संस्था( जिसकी स्थापना देश रतन और प्रथम राष्ट्रपति डा राजेन्द्र प्रसाद ने की थी ) का नुक्सान करने की ये सुनियोजित साजिश है ?जानिये मनीष ने अपने पत्र में क्या लिखा है ?अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री एके श्रीवास्तव और टीम द्वारा माननीय कोर्ट के पेटीशन पर स्टेट्स को २०१५ के आदेश के बाद हम लोगो ने अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के कुछ कार्यक्रम और सम्मेलन का आयोजन करने की घोषणा की , जो की कोर्ट के तत्कालीन कोर्ट के डेट्स के आधार पर थी , लेकिन माननीय हाई कोर्ट के अंतिम फैसला ना आने के कारण हम लोगो ने कोर्ट की अवमानना ना हो इस लिए डेट्स को अगली सुचना तक रोक दी , चूँकि हम लोग दुसरे बैनर पर कोई कार्यक्रम कराने ने पक्ष धर नहीं थे नहीं तो नये रोज खुल रहे कायस्थ संगठनों के बिच में हम लोग भी चाहते तो एक कयास्थ संगठन बना लेते लेकिन फिर abkm का कोर्ट का मामला बिगड़ जाता / इसी लिए अंतिम रिजल्ट के बाद ही अगले कार्यक्रम करने का सोचा गया / कायस्थ समाज के लिए बेशिक कार्यो को सभी जनपद और प्रदेश इकाई पाने सिमित संसाधनों के माध्यम से कर रही हैलेकिन abkm पारिया गुट ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए पटना सम्मेलन , लखनऊ, अलीगढ, बड़ोदा, कोटा समेत अनेक राष्ट्रीय बैठ कर दी और कई पदाधिकारी बना डाली / चूँकि ऐसे मामले में फाइनल फैसला आने तक केवल प्रदेश प्रभारी और प्र्कोस्त्ठो में केवल संगटन के सञ्चालन के लिए घोषणा हो सकती थी लेकिन पारिया गुट ने इसका उल्लंघन करते हुए रेवड़ी की तरह से पद खूब बाटे / और खूब चन्दा काटा (जबकि ऐसे मामले में एक रूपये की चन्दा कोई काट नहीं सकता था ), संगठन में सदस्यता तो दूर एक रुपये चन्दा काटा ही नहीं जा सकता था / तब कैसे लोगो को पद दिए गये / प्राप्त जानकारी के अनुसार खूब चन्दा लिया गया और एक नए अकाउंट abkm का जो लखनऊ ना होकर फिरोजाबाद में खोला गया जिसमे एक रुपये की भी वसूली एक तरह से हाई कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन था. क्यूंकि पूर्व में ही लखनऊ में बैंक का अकाउंट था.हम लोगो ने कोर्ट के आदेश की भली भाति पालन करते हुए कोई भी सद्स्यस्ता शुल्क नहीं लिया क्यूंकि हमे पता था की हम किसी को सदस्य बना भी दे तो भी लोगो चुनाव में भाग नहीं ले सकते है जब कोर्ट का फाइनल उत्तर नहीं आ जाता / इस्का मतलब साफ़ है की २०१४ फरवरी के बाद दिए गये सभी सदस्यता शुल्क और नये मनोनयन जो राष्ट्रीय स्तर पर हो अबैध है / जब हाई कोर्ट में मामला हो और स्टेट्स को का आदेश हो तो एसडीम के आदेश का कोई अर्थ नहीं था/ हम लोगो ने abkm पारिया गुट के सभी के अवैध किये गये नियुक्तियों और राष्ट्रीय अधिवेशन को हाई कोर्ट को सूचित किया और कोर्ट के अवमानना का भी मामला बनता है से वाकिफ कराय है / पूर्व में हम लोगो ने कायस्थ समाज को abkm से समबन्धित किसी भी तरह के सदस्यता शुल्क और चंदे को नहीं देने की अपील किये थे आज भी कर रहे है / कोर्ट में मामला अंतिम स्टेज पर है जैसे ही abkm का मामला फाइनल रिजल्ट आ जाये आप लोग किसी भी ग्रुप में चंदा दीजिये और सदस्यता दीजिये /हाँ अखिल भारतीय कायस्थ महासभा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री एके श्रीवास्तव जी के नेत्रित्व में देश के अन्य प्रदेशो में प्रदेश प्रभारियो की नियुक्ति जल्द करने जा रही है / क्योंकि इससे चन्दा बाजी और abkm के नाम से भरम को रोका जाये।#स्वम्भू घोषित पदाधिकारियो के लिए जब एके श्रीवास्तव जी abkm के राष्ट्रीय अध्यक्ष 2014 मार्च तक थे।और चुनाव 2015 में पेंडिग था।तब किसके आदेश से एस डी एम् में फ़ाइल को सुना और कैसे चुनाव लोकसभा के अधिसूचना जारी होने से 3 दिन पहले आदेश किया सपा के नेताके कहने पर माननीय विश्व मोहन जी के लिए। जिसमेमुझे अपने सामने होना बताया एस दी एम् यादव जी ने ।बाद मेरे सक्रिय होने पर आदेश को ख़ारिज कर दिया ।और पुनः हम लोग बहाल हो गए। फिर जैसे ही लोकसभा के बाद उपचुनाव आया लोगो ने सपा के दवाव में आदेश फिर अजीबो गरीब करा दिया।नवम्बर 2014 में।।हम को दिसम्बर 2014 में हाई कोर्ट गए। एक श्रीवास्तव जी । फिर हमने यादव एस डी एम् के आदश का उद्देश्य पूछा और कोर्ट में 2 महीने के डिस्कशन के बाद स्टेट्स को आदेश हुआ हमारे पेटिशन पर।इसका मतलब एस डी एम् यादव के आदेश के पहले के कमेटी ही वैलिड हुई।अब विश्वमोहन जी ने उप निबंधक के यहाँ फरवरी 2015 में जो अजीबो गरीब था जबकि मामला 3 महीने से हाई कोर्ट में था , उप निबंधधक से एक कथित आदेश कराया दिखये ।फरवरी 2015 में।उसके 10 दिन के बाद के हाई कोर्ट के फाइनल आदेश में जैसे स्टेट्स को आया परिया गुट इस 10दिन पहले के आदेश को दिखा कर हवाई किले बनाने लगा।जबकि सब रजिस्ट्रार ऑलरेडी पार्टी थे आदेश से पहले।एके श्रीवास्तव जी के पेटीशन के बाद । अब उसी सब राजस्त्रार के आदेश को दिखा कर परिया गट खूब चन्द वसूली किया। इसमें मार्क का विषय है की जब सब रजिस्ट्रार3 महीने पहले और एस ड्डी एम् यादव को एके श्रीवास्तव जी ने पार्टी बना दिया तो इनके आदेश कैसे बैलिड समझे जाए।और जब सन्स्था का विवाद हो गया तो कैसे 2015 फरवरी की कैमेटि को लागू करते।क्योंकि एस डीएम् को पाँवर ही नही था। माननीय कोर्ट इस मामले को अगले तारीख में ही फैसला दे सकता है।यदि परिया गुट भागे नहीं ।हमे पूर्ण आशा विश्वास है की कोर्ट सही निर्णय देगा और abkm के विवाद का अंत होगा।तब तक आपसी कटुता ना बढे ये जरूरी है।इसके लिए उपाय हो।स्वघोषित नेता जरूर समझे की abkm में ऐसे लोगो के लिए आने वाले दिनों में कोई जगह नहीं है ।अब कोर्ट के आदेश के बाद सारे ग्रुप होने की प्रथा का भी हम समाप्ति कर देंगे।ऐसी व्यवस्था होगी की ग्रुप में abkm कभी ना बंटे।।

बड़ा खुलासा : ABKM (ak श्रीवास्तव गुट)राष्ट्रीय सचिव मनीष श्रीवास्तव ने पारिया गुट के राष्ट्रीय महामन्त्री विश्वविमोहन कुलश्रेष्ठ पर कोर्ट की अवमानना के लगाए गंभीर आरोप : सारी नियुक्तियां अवैध . सारे सम्मलेन गलत
बड़ोदा में हुए अखिल भारतीय कायस्थ महासभा पारिया गुट के सम्मलेन के बाद अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ak श्रीवास्तव गुट के राष्ट्रीय सचिव/ प्रवक्ता मनीष श्रीवास्तव ने पारिया गुट के राष्ट्रीय महामन्त्री विश्व विमोहनकुलश्रेष्ठ पर छल , प्रपंच के गंभीर आरोप लगाए है I हालाँकि कायस्थ खबर इस पत्र में लिखी बातो की कोई पुष्टि नहीं करता है लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी और कायस्थ खबर को भेजे अपने सन्देश में उन पर अवैध रूप से चंदा लेने , नियुक्तियां करने और सदस्य बनाने जैसी बातों को गलत करार दिया I मनीष श्रीवास्तव के पत्र में लिखे बातो को अगर मान लें तो ABKM के राष्ट्रीय महामंत्री ने समाजवादी सरकार के नेता को साथ लेकर मजिस्ट्रेट को प्रभाव में लेकर गलत तरीके से अपने पक्ष में फैसले कराने जैसे मामले है I जिसके बाद हाईकोर्ट में विश्व विमोहन कुलश्रेष्ठ के साथ उक्त रजिस्ट्रार भी आरोपी (पार्टी ) है I कायस्थ खबर ने भी इके लिए कोर्ट में इसके केस की डिटेल्स देखि है जिसका स्क्रीन शॉट साथ लगाया है , ऐसे में स्वघोषित राष्ट्रीय महामंत्री विश्व विमोहन कुलश्रेष्ठ पर बड़े सवाल खड़े हो गए है की
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