अतुल श्रीवास्तव, प्रयागराज। केपी ट्रस्ट की अध्यक्षता को लेकर जारी कानूनी लड़ाई में शुक्रवार को हाई कोर्ट ने डॉ. सुशील सिन्हा को बड़ा झटका देते हुए उनकी अंतरिम आदेश (interim relief) की अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि चौधरी राघवेंद्र नाथ सिंह पहले ही ट्रस्ट का चार्ज संभाल चुके हैं, इसलिए इस स्तर पर हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।
डॉ. सुशील सिन्हा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर यह अपील की थी कि एसडीएम के आदेश पर हुई पुनर्मतगणना को रद्द किया जाए और अध्यक्ष पद पर नए नियुक्ति आदेश पर रोक (stay) लगाई जाए। उनका कहना था कि एसडीएम को पुनर्मतगणना का अधिकार नहीं है और यह केवल रजिस्ट्रार के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि कोर्ट ने उनकी अपील पर विचार करते हुए अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने माना कि अध्यक्ष पद का कार्यभार पहले ही चौधरी राघवेंद्र नाथ द्वारा ग्रहण कर लिया गया है, ऐसे में अब यथास्थिति बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं बनता। 22 मई को अगली सुनवाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 मई की तारीख निर्धारित की है, जिसमें डॉ. सुशील सिन्हा की याचिका पर विस्तृत सुनवाई होगी। राजनीतिक समीकरणों में हलचल इस फैसले से राघवेंद्र नाथ सिंह के समर्थकों में उत्साह की लहर है। समर्थक इसे “सत्य की असत्य पर जीत” मान रहे हैं। वहीं, डॉ. सुशील सिन्हा के खेमे में मायूसी है।
जानकारो का कहना है कि सोशल मीडिया पर उनके कुछ समर्थकों द्वारा फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों और अमर्यादित भाषा के कारण ही डॉ. सुशील सिन्हा की छवि को नुकसान पहुंचा है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरिम आदेश न मिलना इस बात का संकेत है कि कोर्ट इस मामले को गंभीरता से परखेगा, लेकिन फिलहाल किसी भी तरह की तात्कालिक राहत देने को तैयार नहीं है।
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