
रविवार तड़का : ABKM आदि स्वनामधन्य दुकाने चलती है तो चलें। कायस्थ चिंतन एक सुनामी लहर बनता जा रहा है। इसे बनने दीजिये- कुमार अनुपम
संगठनों का बनना टूटना विभाजित होना पदों की होड़ सारंग साहेब की पदलिप्सा व अपने बेटे को और खुद को establish करने की नीति और आमरण abkm के एक कुनबे का अध्यक्ष बने रहकर अब अपने बेटे को उसका अध्यक्ष बनाने की तयारी साथ में उनके संसर्ग में उनके आसपास रहे कायस्थ पदधिकरिओन द्वारा ABKM के अलग अलग गुट बना लेने की घटनाएँ ही कायस्थ नव जागरण आन्दोलन है जो गिरते पड़ते उठते दौड़ते गतिशील है।
आन्दोलन एक बाढ़ होता है। इसमें घोंघा सितुआ मेढक कीड़े मकोड़े मछली मगरमच्छ सब आते हैं।
इसी आन्दोलन से एक स्वच्छ धारा भी गति लेकर फूटी है। संगत पंगत अभियान। इसका न तो कोई नेता है। न तो यह कोई संगठन है। न तो इसके कोई पदाधिकारी ही हैं।
कार्यक्रम आधारित सभाएं । ABKM आदि स्वनामधन्य दुकाने चलती है तो चलें।
कायस्थ चिंतन एक सुनामी लहर बनता जा रहा है। इसे बनने दीजिये.........कुमार अनुपम( भड़ास श्रेणी मे छपने वाले विचार लेखक के है और पूर्णत: निजी हैं , एवं कायस्थ खबर डॉट कॉम इसमें उल्लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है। इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी कायस्थ खबर डॉट कॉम स्वागत करता है । आप लेख पर अपनी प्रतिक्रिया kayasthakhabar@gmail.com पर भेज सकते हैं। या नीचे कमेन्ट बॉक्स मे दे सकते है ,ब्लॉग पोस्ट के साथ अपना संक्षिप्त परिचय और फोटो भी भेजें।)
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