
नहीं तय है अभी तक कायस्थ महापंचायत का कार्यक्रम, होने में संदेह , जल्दबाजी या अव्यवस्थित तरीके से होने पर होगा कायस्थ समाज को नुक्सान
एक बार फिर से ये सवाल खड़ा होने लगा है की कायस्थ महापंचायत नामक जिस हवा हवाई राजनैतिक रैली की बातें कुछ लोगो द्वारा की जा रही है वो हो भी पायेगी या नहीं I गौरतलब है की गाजियाबाद की एक गुमनाम सी शक्शियत कविता सक्सेना ने २ माह पूर्व जिस तरह से अंजान चेहरों के साथ मिलकर कायस्थ महापंचायत की घोषणा की उसकी अभी तक कोई भी कोई रूप रेखा सामने नहीं आ स्की हैबदली तारीख , १२ नवम्बर से अब ४ दिसम्बर, पर क्या ये फाइनल है कायस्थ महापंचायत को लेकर इसकी तैयारियों का अंदाजा इस बात से भी लगा जा सकता है की पहली बैठक के बाद इसकी तारीख १२ नबम्बर २०१६ बतायी गयी थी , लेकिन अब इसे ४ दिसम्बर २०१६ कर दिया गया है I लेकिन १ महीने से भी कम समय शेष रहने के बाबजूद अभी तक जगह , समय और कार्यक्रम की जानकारी सार्वजानिक नहीं की गयी है I ऐसे में ४ दिसम्बर को भी ये हो पायेगी इसमें संदेह हैक्या होगा कायस्थ महापंचायत से ?सबसे बड़ा सवाल कायस्थ समाज में ये है की आखिर कायस्थ समाज को कायस्थ महापंचायत करके क्या हासिल होगा ? सूत्रों की माने तो अबतक कायस्थ महापंचायत को लेकर कविता सक्सेना या उनकी टीम (?) कोई स्पस्ट घोषणा नहीं कर सकी है I यूपी चुनावों से पूर्व करने के किये जा रहे दावो के बीच ये प्रशन बड़ा है की आखिर ठीक यूपी चुनावों की घोषणा से पहले इस महापंचायत से किसको क्या फायदा होगा ?रांची के एक प्रसिद कायस्थ चिन्तक की माने तो ऐसे कार्यक्रम आमूमन निम्न वजह से किये जाते है१) चुनाव पूर्व ऐसी रैली करके किसी राजनेता द्वारा अपनी ताकत राजनैतिक दलों को दिखाने के लिए ताकि उनको टिकट मिल सके२) सामाजिक संगठनों द्वारा किसी ख़ास राजनैतिक दल के लिए समाज को पोल्रराइज करने के लिए3) खुद का सामाजिक /राजनैतिक आधार खड़ा करने के लिएऐसे में बड़ा सवाल ये है की इस पूरी प्रक्रिया में कायस्थ समाज को कायस्थ महापंचायत से क्या लाभ होगा I क्या कविता सक्सेना किसी हिडन एजेंडे के तहत इस पुरे कार्य को अंजाम दे रही है या कायस्थ महापंचायत के नाम से होने वाले इस कार्यक्रम के पीछे का असली खिलाड़ी कोई और ही है I क्योंकि लखनऊ में कविता सक्सेना का कोई आधार नहीं है और वो वहां से चुनाव भी नहीं लड़ सकती है तो ऐसे में कौन कौन से ऐसे प्रत्याशी है जिनको इससे फायदा होगा ?बड़े नामो ने किया है इस महापंचायत से किनारा सूत्रों की माने तो अब तक इस कार्यक्रम के लिए किसी भी बड़े कायस्थ नेता या सामाजिक नेता ने अपनी उपस्थिति की हामी नहीं भरी है I कायस्थ शिरोमणि के नाम से प्रसिद राज्य सभा सांसद आर के सिन्हा अभी तक इस कार्यक्रम के साथ अफिश्यल तोर पर नहीं जुड़े हैं , वही दिल्ली एन सी आर में कायस्थ समाज के हित में कार्य करने वाले बड़े समाज सेवी की भी अभी तक ना ही सूनने में आ रही है I गाजियाबाद के एक प्रसिद नेता अशोक श्रीवास्तव भी समय होने पर ही कार्यक्रम के उपस्थित होने की बात करते दिखाई दे रहे है I इलाहबाद से कायस्थ पाठशाल के अध्यक्ष राघवेन्द्र सिंह या पूर्व अध्यक्ष टी पी सिंह भी अभी तक इससे नहीं जुड़े हैएक न्यूज़ पोर्टल ने लगाए थे एक राजनैतिक दल के साथ होने का आरोप कायस्थ महापंचायत के पीछे कांग्रेस के होने के आरोप भी एक न्यूज़ पोर्टल (कायस्थ खबर नहीं ) ने पिछले दिनों इसके आयोजको पर लगाए थे I गौरतलब है की इसकी पहली ही बैठक में यूपी कांग्रेस समीति के अध्यक्ष और मथुरा से विधायक प्रदीप माथुर दिखाई पड़े थे I लेकिन उस विवाद के बाद से वो भी इसके आगे के कार्यक्रमों में नही दिखे और ना ही इस कार्यक्रमों में उपस्थित होने वाले लोगो की सूचि में उनका नाम आया है I ऐसे में क्या ये सिर्फ बीजेपी को नुक्सान पहुचाने के मकसद से किया जा रहा कार्यक्रम तो नहीं है
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