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कायस्थों में उपजातियों में ऊँचा नीचा का भाव है। यह आपका विचार वास्तविकता से परे है – सुभाष श्रीवास्तव

कायस्थों में उपजातियों में ऊँचा नीचा का भाव है। यह आपका विचार वास्तविकता से परे है। भारत एक.विशाल देश है। शादी तभी होगी। जब संम्पर्क होगा। जब हम यूपी में हैं और मद्रास के लोगों से सम्पर्क नहीं है तो शादी कैसे होगी। जहाँ सम्पर्क होता है। वहाँ शादी होती है। भेद भाव का सवाल नहीं रहता। उदाहरण के लिए मैं कुछ केस जानता हूँ। हमारे जिले में एक बंगाली यूनियन बैंक में मैनेजर के रूप मे कार्यरत था। वह विस्वास था। जो बंगाली कायस्थ होते हैं। उसने अपने लड़के की शादी हमारे गांव के श्रीवास्तव लड़की से किया। सन1952 में आइ ए एस एलायक कैडर के मद्रासी कायस्थ सुन्दर लाल राजन 1968 में यूपी के पोस्ट मास्टर जनरल थे। मैं डाक विभाग में 1968 में सर्विस में आया। नरायन प्रसाद श्रीवास्तव मेरठ के पोस्टमास्टर थे। उन्होंने अपनी बहन की शादी राजन साहब से किया था। राजन साहब यूपी में ज्यादा सर्विस किए। अंत में.कहाँ बसे गये। मुझे नहीं मालुम। मेरे गांव के डा० मन मोहन श्रीवास्तव के लड़की की शादी निगम में हुयी है। अब उसका नाम डा० शैली निगम है। मेरा जनपद जौनपुर यूपी है। मेरे खानदानी चचेरे भाई विनय श्रीवास्तव की शादी फतेहपुर यूपी की निगम लड़की से हुयी है। मेरे एक परिचित निगम हैं। उनकी बहन की शादी श्रीवास्तव में हुयी है। हमारी साली अहमदाबाद में रहती है। गुजरात के मेहसाणा में इन्डियन आयल कारपोरेशन में हमारे साढ़ू काम करते थे। इलाहाबाद के रहने वाले हैं। वे अहमदाबाद में फ्लैट लेकर बस गये हैं तथा अब रिटायर हो गये हैं। उन्होंने अपनी लड़की की शादी बरेली यूपी में सक्सेना में किया है। मैं छोटा आदमी हूँ लेकिन इतनी बातें हमारे संज्ञान में है। केरल में नायडू कायस्थ हैं और मैं श्रीवास्तव कायस्थ यूपी में हूँ तो विना परिचय /संपर्क कैसे हमारे बच्चों की शादी केरल के नायडू परिवार में हो सकती है। पूरे भारत में कायस्थ की उप जातियों को हम जानते हैं लेकिन शादी विना परिचय / संम्पर्क के नहीं हो सकती। केरल का यूपी कैसे आये और हम केरल कैसे जायं। यूपी के पूर्वान्चल में 99% श्रीवास्तव तथा 1% अस्थाना तथा निगम हैं। हम विना परिचय कैसे पश्चिम यूपी के सक्सेना तथा मध्यप्रदेश के माथुर से शादी कर पायेंगे। आत: मेरा विचार है कि आप यह गलत विचार पाल रखे हैं कि कायस्थ की उपजातियों में ऊंचा नीचा का भेद है। संम्पर्क के अभाव में दूर की शादी नहीं हो सकती। अब तो कायस्थों में उप जाति कौन कहे इन्टर कास्ट शादी बहुत हो रही है। धन्यवाद।

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One comment

  1. Ravi Prakash Srivastava

    कायस्थ को कायस्थ के प्रति सहिष्णु होना चाहिए, उसे जैसा है, उसी रूप मे स्वीकार करना चाहिए, यदि हो सके तो उसकी समस्या जानने का प्रयास करना चाहिए, और अकेले अथवा सम्मिलित रूप से जितना हो पाये उस समस्या को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए ।तभी आपस मे प्रेम बढ़ेगा ।अपने ओहदे या धनी होने का दिखावा न करके प्रेम से रहने का प्रयास करना चाहिए ।

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