
कायस्थ समाज को राजनैतिक नेताओं की ज़रूरत क्या है ? राजनैतिक दल टिकट दें भी तो किसको -आशु भटनागर
आज शाम एक खबर आई थोड़े विरोधाभास के साथ की मायावती ३६ कायस्थों को टिकट देंगी I खबर ऐसे सोर्स से थी की होश उड़ गए , जी हाँ NDTV से I खैर ३६ टिकट कायस्थ समाज के नेताओं को मिलेंगे ये सोच कर एक पल को ख़ुशी तो हुई लेकिन अगले ही पल दिमाग में आया की यहाँ ३६ कायस्थ नेता कौन है जिन्हें बसपा टिकट देगी I खैर इन सब को छोड़ लिखना ही शुरू किया था की खबर आयी की NDTV की रिपोर्ट गलत है प्रेस रिलीज में ३६ क्षत्रिय है और ११ टिकट में कायस्थ , वैश्य और पंजाबी होंगे मतलब 3से 6 टिकट खैर खबर तो हो गयी Iखैर इन सब के बीच सोच ही रहा था की आज दोपहर एक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के फ़ोन पर २० मिनट तक गाली गलोच की बात ध्यान आई तो सोच में पड़ गया की आखिर कायस्थ समाज में नेता चाहते क्या है और क्यूँ कोई दल उन्हें टिकट दे देगा I जिन महाशय ने २० मिनट तक गाली गलोच के साथ ये समझनी की कोशिश की , की उके संगठन के बारे कुछ ना लिखे नहीं तो ऊँगली *(@#*#( में घुसेड दी जायेगी उनसे आप कभी क्या उम्मीद करेंगे Iफिर मुझे लगा की आखिर ये कायस्थ खबर या कुछ भी और न्यूज़ पोर्टल किस लिए , सिर्फ इनकी स्तुति गान के लिए और अगर आप इन पर सवाल उठा दो तो मारने पीटने की धमकियाँ I ये पड़े लिखे समाज की हालत है अगर आप पिछड़े समाज की बात करते तो कोई बात ही नहीं I खैर दावे और धमकियों से समझ आया की कायस्थ समाज में नेता क्यूँ नहीं होते Iकायस्थ समाज में ऐसे आधारहीन संगठनों की गिनती नहीं है जिनके नेता ऐसे ही अपने ही गुमान में बैठे हुए है जिनके पास उनके शहर में २०० लोग नहीं है लेकिन हनक पूरी लेकर चलते है इआसे और ऐसे ही संगठनो की गिनती के कारण आज कायस्थ समाज राजनैतिक तोर पर हाशिये पर है Iइन महाशय की स्तरहीन हरकतों से मुझे लगा की कायस्थ खबर को बंद कर देना चाह्यी क्योंकि हमारा समाज ऐसे ही नेताओं को पसंद करता है और ऐसे ही नेताओं को दिजेर्व करता अहि क्योंकि समाज है तभी ऐसे नेता है जो पुलिस में होने के बाबजूद कानून हाथ में लेने की बात करते दिखाई देते है Iफिर मुझे लगा की मुझे ऐसे लोगो पर गुस्सा नहीं तरस आना चाह्यी क्योंकि ये कभी नेता थे ही नहीं ये बस नौकरी के साथ साथ अपना समय व्यतीत कर रहे है और कायस्थ समाज में ऐसे ही नेताओं की कमी नहीं है I और पार्ट टाइम नेताओं की अधिकता के चलते जब समाज के लिए राजनेता चुनने की बात आती है तो चेहरे दिखाई नहीं देते I क्योंकि समाज में धमकी देने वाले जब समाज से बाहर निकलते तो कहीं नहीं मिलते I इसलिए अगर बसपा या भाजपा ३६ -३६ कायस्थों को टिकट देना भी चाहे तो किसे देगी I आखिर यूपी वो १०० चेहरे कहाँ से आयेंगे जो विधान सभा तो छोडिये पार्षद का भी चुनाव लढ़ सके Iअब फैसला कायस्थ समाज को करना है , सामाजिक संगठन आपकी राजनैतिक प्रष्ठभूमि के आधार हो सकते है लेकिन उनको साधने वाला भी कोई होना चाह्यी नहीं तो ऐसे त्रिशंकु स्थिति में हम सोचते रहेंगे की आखिर फला पार्टी ने हमें टिकट क्यूँ नहीं दिया I आप सबके विचार आमंत्रित हैआशु भटनागर
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