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कायस्थ पाठशाला चुनावों के परिणामो ने सुबोध कान्त सहाय गुट के मुकाबले रविनंदन सहाय गुट की समाज में बेहतर पकड भी साबित की

आशु भटनागर I कायस्थ समाज के सबसे पुराने आफिश्याली संगठन होने का दावा करने वाले सुबोध कान्त सहाय गुट की राष्ट्रीय कार्य कारनी की बैठक की खबरे सोशल मीडिया में आयी I जिसके बाद ऐसा लग रहा है की जैसे ये संगठन कायस्थ समाज का असली प्रतिनिधित्व करता है I लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट है I कायस्थ खबर के सम्पादक के तोर बीते कई सालो मे मैंने इस बात को समझा है की असल में आखिल भारतीय कायस्थ महासभा अपने विवादों की वजह से समाज में अपना विश्वाश खोती जा रही है I फिर इसके तमाम घटकों में इसके आधिपत्य की क़ानूनी लड़ाई के असली कौन की लड़ाई हमेशा हावी रही I लेकिन इस साल जब कायस्थ पाठशाला के २०१८ चुनावों को हम कवर कर रहे थे तो लगातार इसके दो गुटों के बीच का मुकाबला भी हमको दिखाई देने लगा था Iदरअसल कायस्थ पाठशाला का चुनाव आखरी के २ हफ्तों में सुबोध कान्त सहाय गुट बनाम रवि नंदन सहाय गुट बन गया था यहाँ तक की दोनों ही अपने अपने गुटों से सम्बद्ध रखने वाले प्रत्याशियों को लड़ाने में लगे थे और शायद ये चुनाव दोनों ही गुटों की नाक का सवाल भी बनगया था I आपको बता दें की चौधरी जितेन्द्र नाथ सिंह जहाँ रविनंदन सहाय की अध्यक्षता वाले अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है वहीं कुमार नारायण , सुबोध कान्त सहाय की अध्यक्षता वाले महासभा के जिला अध्यक्ष थे I ऐसे में चुनावों में प्रत्याशियों की हार जीत से ज्यदा कायस्थ समाज पर किस गुट का ज़मीनी प्रभाव ज्यदा है ये भी एक बड़ा सवाल हो गया था I और इसमें कोई शक नहीं की कायस्थ पाठशाला के चुनावों में चौधरी जितेन्द्र नाथ सिंह की जीत के साथ ही ये तय हो गया था की कागजो के दावो में सुबोध कान्त सहाय गुट भेले ही कुछ बी दावा करे लेकिन समाज के लोगो में रवि नंदन सहाय के अध्यक्षता वाली अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ही असली कायस्थ महासभा है I इसके उलट अगर सुबोध कान्त सहाय के गुट वाली महासभा को देखे तो इसमें ज़मीनी कार्यकर्ताओं की जगह चंद व्यापारियों की ही संख्या नजर आती है जिनका ज़मीनी प्रभाव नगण्य है I जो धन बल पर प्रदेश अध्यक्ष के पद तो संभाले हुए है लेकिन जानता से जुडाव नहीं अहि वहीं इनके महामंत्री विश्व विमोहन कुलश्रेष्ठ की छवि भी आज तक इस महा सभा को लोगो से नहीं जोड़ पायी है I ऐसे में अगर ये कहा जाए की कानूनी तौर पर भले ही कोई भी कुछ कहे कायस्थ समाज से रवि नंदन सहाय ही जुड़े है और वहीं उनके दिलो में राज भी कर रहे है

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