कायस्थ खबर डेस्क I हिंदी की चर्चित लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ को वर्ष 2018 का ‘बिहारी पुरस्कार’ देने की घोषणा की गई है। ढाई लाख रुपए का ये पुरस्कार मनीषा को उनके उपन्यास ‘स्वप्नपाश’ पर दिया जाएगा। के के बिड़ला फाउंडेशन हर वर्ष राजस्थान के हिंदी या राजस्थानी में लिखनेवाले लेखकों को यह पुरस्कार प्रदान करता है। मनीषा कुलश्रेष्ठ को पुरस्कृत करने का निर्णय नंद भारद्वाज की अध्यक्षता वाली एक समिति ने किया है जिसमें हेमंत शेष, मुरलीधर वैष्णव, अलका सरावगी, ओम थानवी और फाउंडेशन के निदेशक सुरेश ऋतुपर्ण शामिल थे।
मनीषा अपने फेसबुक पर लिखती हैं कि, अभी अभी ईमेल से एक खुशखबरी मिली है. संकोच और प्रसन्नता के साथ साझा कर रही हूं. के.के बिरला फाउंडेशन का प्रतिष्ठित बिहारी पुरस्कार ( 2018) आपकी मित्र को 'स्वप्नपाश' पर मिलना घोषित हुआ है. मैं के के बिरला फाउंडेशन की ह्रदय से आभारी हूं. इस पुस्तक का प्रकाशन वर्ष 2016 है.
राजस्थान के जोधपुर में पैदा हुई और जयपुर की रहनेवाली मनीषा कुलश्रेष्ठ के उपन्यास ‘स्वप्नपाश’ की नायिका स्किजोफ्रेनिया से पीड़ित है। बेहद जटिल भावभूमि पर लिखा गया ये उपन्यास मानसिक रोग से पीड़ित नायिका की परेशानियों, उसकी संवेदनाओं और मतिभ्रम से जन्मी कई पहलुओं को सामने लाता है। इस उपन्यास में लेखिका ने कथावस्तु को जिस कलात्मकता के साथ पाठकों के सामने पेश किया है वो अपनी तरह का अनूठा प्रयोग माना गया था। इसके पहले मनीषा के तीन और उपन्यास ‘शिगाफ’, ‘शालभंजिका’ और ‘पंचकन्या’ प्रकाशित हो चुके हैं। भारतेन्दु की प्रेमिका मल्लिका को केंद्र में रखकर लिखा गया मनीषा का उपन्यास ‘मल्लिका’ भी साहित्य जगत में चर्चा में है। मनीषा कुलश्रेष्ठ के कई कहानी संग्रह भी प्रकाशित हो चुके हैं। बिरजू महाराज पर भी उन्होंने ‘बिरजू लय’ के नाम से एक पुस्तक लिखी है। मनीषा को राजस्थान साहित्य अकादमी का रंगेय राघव पुरस्कार के अलावा वनमाली पुरस्कार, घासीराम वर्मा सम्मान समेत कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं
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