संगत पंगत क्यूँ ? जान्ने के लिए चतुर्थ वार्षिक संगत पंगत -पटना 29 ,30नव. 1दिस 2019 ज़रूर आइये
आप किसी भी संगठन की मीटिंग मे जाए तो आपको वहां के पदाधिकारियों का रवैया देखकर अति खिन्नता का अनुभव होगा . वहां न केवल आर्थिक अनियमितता, दूसरी जातियों से खतरे की बात कही जा रही होगी . बल्कि मीटिंग के दौरान भाजपा और कांग्रेस सपा बसपा की चर्चा की जा रही होगी और आपको अपने समाज की समस्याओं के बारे में उनकी विचारशून्यता देखकर आप को घोर निराशा होगी निराश होगी.. और सोचने को मजबूर हो जायेगे कि सामाजिक संगठनों का प्रभाव समाज पर क्यों शून्य है और क्यों राजनीतिक पार्टियां इनको मुट्ठी में बंद किये हुए हैं...इसके लिए सबसे जरूरी बात यही है कि सामाजिक संगठन, राजनीतिक संगठनों के पिछलग्गू होने की भूमिका से बाहर निकलें और अपने समाज को अनुशासित, विकसित और सक्षम करने की भूमिका का निर्वहन करेंऔर राजनैतिक व्यक्ति को सामाजिक संगठन से दूर रखे या रखा जाए ऐसे प्रयास किए जाने चाहिए तभी ये सामाजिक संगठन समाज के लिए कुछ कर पायेगे... ,सोच को बदलो सितारे बदल जायेंगे, नजर को बदलो नज़ारे बदल जायेंगे, कश्तियाँ बदलने से कुछ नहीं होता, दिशाओं को बदलो किनारे बदल जायेंगे।अतुल श्रीवास्तव
लेख में दिए विचार लेखक के अपने हैं कायस्थ खबर का उनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है I
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