संगत पंगत क्यूँ ? जान्ने के लिए चतुर्थ वार्षिक संगत पंगत -पटना 29 ,30नव. 1दिस 2019 ज़रूर आइये
पटना स्थित श्री आदि चित्रगुप्त मंदिर में होने जा रहे बहुप्रतीक्षित चतुर्थ संगतपंगत में जब सारे देश के लोग आ रहे है तो ऐसे में प्रशान्त का आज उसके लिए बधाई देने का सन्देश यही बता रहा है , प्रशान्त सिन्हा ने लिखा
कायस्थ समाज मे आपसी एकजुटता,समरसता एवं उत्थान को लेकर इसकी प्रणेता श्रीमती नीरा शास्त्री द्वारा दिनांक 19 जून 2015 को दिये गये सराहनीय सुझावनात्मक प्रस्ताव को आत्मसात करते हुये उसके अगले ही महिने दिनांक 26 जुलाई 2015 को अपने पाँच उद्देश्यों के तहत संकल्पित "संगत-पंगत" अब विस्तारित हो (09) सनातन धर्म के सर्वसमाज ही नहीं बल्कि अब सर्वधर्म समभाव के तर्ज पर मुस्लिम, सीख,ईसाई एवं पारसी धर्म के तारनहार के रूप मे अग्रसर हो चुका है,जो कि इसकी खासतौर पे खास विशेषता है। आखिर स्वतंत्र भारत गणराज्य के संविधान के "प्रस्तावना" का मूल आधार भी तो (सर्वधर्म समभाव ) यही है। अपने संशोधित एवं विस्तारित उद्देश्यों से संकल्पित "संगत-पंगत" अपने आयाम को प्राप्त करे,ऐसी मेरी शुभकामना है।इस सन्देश के बाद लगभग ये साफ़ हो गया है की प्रशान्त बस अब संगत pangat और श्री आदि मंदिर में सम्मान जनक वापसी का रास्ता खोज रहे है I उनको एहसास हो चला है की समाज में सकारात्मक रहकर ही आर के सिन्हा की तरह सर्वमान्य बना जा सकता है I बहराल अगर एक सुबह के भूले का शाम को घर वापस लौटने का कदम है तो इसके लिए पटना कायस्थ समाज को शुभकामनाये दी जा सकती है
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