भाजपा नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि वह कायस्थ समाज को संगठित करना चाहते हैं जिसके बाद प्रयाग के चर्चित वरिष्ठ अधिवक्ता ओर कायस्थ कुलोदभव टीपी सिंह ने उनके नाम एक खुला पत्र लिखा है I कायस्थ खबर इसको प्रकाशित कर रहा है I इस प्रकरण पर अगर सिद्धार्थ नाथ सिंह की ओर से कोई पक्ष प्राप्त होगा तो उसे भी प्रकाशित किया जाएगा
सिद्धार्थ नाथ सिंह के नाम खुला पत्र
सिद्धार्थ नाथ सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि वह कायस्थ समाज को संगठित करना चाहते हैं और मेरे ऊपर आक्षेप लगाया कि मैं अपने घमंड के कारण बाधा डाल रहा हूं ।
प्रयागराज में लोगों की छोटी मानसिकता होने के कारण कायस्थ समाज की एकता में कायस्थ पाठशाला सबसे बड़ा बाधक है। वैसे चौधरी नोनिहाल सिंह के समय तक चुनाव के बाद सब भूल कर समाज के विकास में लग जाते थे ।मैं चौधरी नौनिहाल सिंह साहब का भी विरोधी था ,परंतु जब वह गृह मंत्री तथा शिक्षा मंत्री थे तो मेरे एक पत्र पर वरीयता से काम करते थे और मैं उनको कई जगहों पर संस्थाओं के उद्घाटन के लिए भी ले गया था ।पर अब तो चुनाव के बाद लकीर खींच जाती है और विरोध करने पर वह जो कायस्थ पाठशाला का मंत्री और अध्यक्ष रहा हो उसकी सदस्यता तक समाप्त कर दी जाती है, भले ही वह सफल न हो।
माननीय सिद्धार्थ नाथ सिंह ने डॉक्टर केपी श्रीवास्तव पूर्व अध्यक्ष एवं उनके पार्टी के एमएलसी के प्रति अपनी श्रद्धा एवं सम्मान व्यक्त किया है ,इस परिपेक्ष में मैं निम्न प्रस्ताव रख रहा हूं:
१. चौधरी परिवार 10 वर्ष से कायस्थ पाठशाला के अध्यक्ष है अबकी बार डॉक्टर केपी श्रीवास्तव या उनके द्वारा नामित सदस्य को अध्यक्ष बना दें और अगली बार फिर चौधरी परिवार अपने परिवार के सदस्य या अपने द्वारा नामित व्यक्ति को कायस्थ पाठशाला का चुनाव लड़ा कर नई परंपरा आरंभ करें। इससे प्रतिस्पर्धा में कायस्थ पाठशाला का विकास होगा। यह निर्णय 1 अक्टूबर के पूर्व ले लिया जाए और उसके अनुसार नॉमिनेशन फाइल कराया जाए।
२. जो भी अध्यक्ष होगा कार्यकारिणी में 30 नामित सदस्यों में से 15 नामित सदस्य चौधरी परिवार द्वारा होंगे और 15 डॉक्टर केपी श्रीवास्तव अपने सहयोगियों की सहमति से नामित करेंगे।
३ जब चौधरी परिवार का व्यक्ति अध्यक्ष होगा तो महामंत्री केपी श्रीवास्तव द्वारा अपने सहयोगियों की सहमति से नामित व्यक्ति होगा और जब डॉक्टर केपी श्रीवास्तव या उनके द्वारा नामित अध्यक्ष होगा तो चौधरी परिवार द्वारा नामित महामंत्री होगा।
मेरे बाबा मुंशी हरनंदन प्रसाद जब अध्यक्ष थे तो माननीय नोनीहाल सिंह महामंत्री थे। यह कोई नई बात नहीं होगी।
४ राजनीतिक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिए जब भी कोई राष्ट्रीय या क्षेत्रीय पार्टी कायस्थ समाज के व्यक्ति को टिकट देगी ,चाहे वह भारत में किसी स्थान से हो ,कायस्थ पाठशाला, न केवल आर्थिक मदद वरन अपने खर्चे से कार्यकर्ता भेजेगा।
५. दोनों ही व्यक्ति, कोई निर्णय लेने से पहले ,कायस्थ समाज के हित में काम करने वाले, सक्रिय लोगों की एक सभा बुलाकर गुप्त रूप से मतदान करा कर किसी भी विषय पर निर्णय लेंगे।
६. कायसथ पाठशाला की साधारण तथा अन्य सभा में केवल वही व्यक्ति सहभागिता करेगा जो कायस्थ पाठशाला न्यास का सदस्य होगा और बिना सदस्यता कार्ड दिखाएं उसको अंदर घुसने नहीं दिया जाएगा।
७. साधारण सभा की मीटिंग होने के पूर्व दोनों पक्ष के लोग मिलकर जहां तक संभव होगा विषयों पर सहमति बनाने का प्रयास करेंगे।
८ यदि दोनों पक्ष एक साथ होगा, तो ना तो छूटभइये कायस्थ पाठशाला के पदाधिकारी को ब्लैकमेल कर पाएंगे ना अवांछित लाभ लेने का प्रयास करेंगे और अगर कुछ लोग चुनाव में आते भी हैं तो अगर यह दो पक्ष कोठी और आम नयास्यों का एक साथ रहेगा तो उसको कोई भी हारा नहीं पाएगा।
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा
१. जहां तक कायस्थ एकता का राष्ट्रीय एवं प्रांतीय स्तर का प्रश्न है, दोनों अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का विलय कर ,एक सभा का व्यक्ति राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाए और दूसरी सभा का प्रतिनिधि कार्यकारी अध्यक्ष बन जाए।
२. दोनों की सहमति से महामंत्री नियुक्त किया जाय।मैंने तो पूर्व में भी यह प्रस्ताव रखा था के नियम में संशोधन कर कायस्थ पाठशाला के अध्यक्ष, जो एक प्रक्रिया के तहत निर्वाचित होता है वह अखिल भारतीय कायस्थ महासभा काअध्यक्ष बनाया जाए, क्योंकि कायस्थ पाठशाला का ही एक ऐसा चुनाव है जो एक निश्चित प्रक्रिया के तहत होता है और कायस्थ पाठशाला के पास जो संसाधन हैं वह अन्य के पास नहीं। माननीय श्री सुबोध कांत जी,जो राष्ट्रीय स्तर के व्यक्ति हैं और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं ,एक ऐसी अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के अध्यक्ष हैं जो हाई कोर्ट तक से मान्यता प्राप्त कर चुकी है , पर लोगों का कहना है की श्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने अपने प्रभाव से फिर से विवाद खड़ा कर ,पर्याय कायस्थ महासभा खड़ी कर उसके अध्यक्ष हो गए । क्योंकि मुझे व्यक्तिगत ज्ञान नहीं है इसलिए मैं इस पर कुछ बात नहीं करना चाहता, पर जब उन्होंने एकता की बात उठाई है और उन्होंने कहा है कि मैं अपने घमंड के कारण इस एकता में बाधा बन रहा हूं ,तो मेरे इस प्रस्ताव पर सारा समाज विचार करें और निर्णय ले । प्रयागराज का कायस्थ समाज इस बात का साक्षी है की, एक पार्टी का राष्ट्रीय स्तर का पदाधिकारी होने के बाद भी जब-जब कायस्थ समाज के लोग अन्य पार्टी से भी लड़े हैं ,तो मैंने, पार्टी लाइन से उठकर उनका समर्थन किया है , और जिसके कारण मैंने अपनृ का भुगतान भी किया है। अपने दिल पर हाथ रखकर सिद्धार्थ नाथ सिंह बताएं की प्रथम चुनाव में मैंने उनके लिए कार्य किया कि नहीं और उन्होंने दूरभाष पर धन्यवाद का एक शब्द देने की भी जरूरत नहीं समझी और यहां तक की मेरे परिवार के सदस्यों के उन्नति में बाधा डाल जो मुझे कैबिनेट स्तर के एक मंत्री ने बताया है और ना ही बाघा बल्कि अप शब्द भी इस्तेमाल किए हैं, जो मेरे पास रिकॉर्डड है । कहा तो यह भी जा रहा है की, क्योंकि मैंने श्री अजय श्रीवास्तव की पिछले चुनाव में मदद की, इसका फायदा लेकर , जिस मुद्दे पर प्रक्रिया समाप्त हो गई थी उसको उठाकर ,शासन से मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, जिसकी मुझे कोई परवाह नहीं है . मैंने कायस्थ समाज के बच्चों को विद्यालयों में नियुक्ति दिलाई है जिसका मुझे गर्व है, फिर भी मेरे ऊपर कायस्थ एकता में बाधक बनने का आरोप लगाया जा रहा है ।
प्रयाग ही नहीं पूरे प्रांत का कायस्थ समाज इस बात को जानता है, जब भी कायस्थ समाज के हित की बात हुई है मैंने सदा उसके लिए संघर्ष किया है। अब कायसथ एकता की यह बात जो सिद्धार्थ नाथ सिंह ने उठाई है वह विषय उनके पाले में है । इसकी पहल वह करें और उपयुक्त मुद्दे पर वह और समाज बताएं की कहां मैं गलत हूं।
तेज प्रताप सिंह
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रयागराज
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