
कायस्थ खबर परिचर्चा और संवाद २०१५ मैं श्री आर के सिन्हा के साथ परिचर्चा करते हुए कायस्थ खबर के सहसम्पादक श्री रोहित श्रीवास्तव और कायस्थ खबर सक्रीय अवार्ड के मुख्य समन्वयक श्री धीरेन्द्र श्रीवास्तव
श्री सिन्हा : "देखिये, मैं बीजेपी का राज्य सभा सांसद हूँ, अभी मेरी सदस्यता खत्म होने मे काफी समय है, जब भी कोई आयोजन नि:स्वार्थ भाव से होता है तो लोग आते हैं और जरूर सफल होता है। जहां (गांधी मैदान का कृष्ण मेमोरियल हाल) किसी राजनैतिक पार्टी को किसी 'राजनीतिक-आयोजन' के लिए सोचना पड़ता है कि इतने लोग कहाँ से आएंगे, वहीं समागम के दिन जितनी भीड़ सभागृह के अंदर थी उतने ही लोग सभागृह के बाहर भी खड़े थे।धीरेंद्र श्रीवास्तव श्री सिन्हा से : सर आपने पटना मे एक सफल कायस्थ समागम का आयोजन किया, क्या ऐसे किसी आयोजन की तैयारी यूपी मे भी है?श्री सिन्हा : हाँ, क्यों नहीं अगर उत्तर प्रदेश मे ऐसे आयोजन किए जाते हैं तो मैं जरूर शामिल हुंगा, ऐसे समागमों के आयोजन देशभर मे किए जाने चाहिए। धीरेंद्र श्रीवास्तव श्री सिन्हा से : सामूहिक विवाह दहेज़ रहित विवाह को बढ़ावा देने मैं कामयाब हो सकते है ऐसे मे कायस्थों मे सामूहिक विवाह पर आप का क्या विचार है ?श्री सिन्हा : पटना और जयपुर मे ऐसे सामूहिक विवाहो का सफल आयोजन हो रहा है, हमे ऐसे आयोजनो को दिल्ली जैसे शहरों मे करना चाहिए। पटना के श्री आदि चित्रगुप्त मंदिर मे ऐसे विवाहो के आयोजनो की सुविधाए उपलब्ध भी है, दोनों (वर और कन्या पक्ष) परिवारों को केवल दहेजरहित शादी के लिए आगे आना होगा। एक अन्य प्रश्न मे रोहित श्रीवास्तव ने श्री सिन्हा से पूछा कि “इस समय देश मे न जाने कितने छोटे-बड़े कायस्थ संगठन है, रोजाना एक नए (कायस्थ) संगठन का जन्म होता है? आप इसे कैसे देखते हैं? क्या ऐसे संगठन ‘कायस्थ-एकता’ मे बाधक हैं? श्री सिन्हा ने इसका जवाब देते हुए कहा “नहीं, ऐसा नहीं है, ऐसे छोटे-बड़े संगठन अगर अपने क्षेत्र मे समाज के लिए अच्छा काम कर रहे हैं तो अच्छी बात है बस इन सभी संगठनो को एक साथ काम करने की आवश्यकता है। उन्होने “संगत और पंगत’ का जिक्र करते हुए कहा संगत करो….. पंगत करो……. ‘पंथ’ बन जाएगा’ । रोहित श्रीवास्तव श्री सिन्हा से : ‘सर आपको नहीं लगता कई सालो से कायस्थ-समाज को एक सशक्त केंद्रीय नेत्रत्व की कमी खली है जिसने केवल कायस्थों के हित की बात की हो, आप खुद को इस किरदार मे कैसे देखते हैं?
श्री सिन्हा : (थोड़े हँसते हुए ) “देखिये मैं कायस्थ समाज का सेवक हूँ, और समाज की सेवा करता भी रहूँगा, पर रही बात ‘नेत्रत्व’ की तो आप मे से ही कई लोग (संगठन) मेरे विरोध मे खड़े हो जाएंगे।अंतत: रोहित श्रीवास्तव ने जब सभागृह मे मौजूद चित्रांशों से यह प्रश्न किया कि क्या आप श्री सिन्हा को अपना‘नेता’ मानने के लिए तैयार है? एक ऐसा नेता जिसके पीछे एक पंक्ति मे आप चल सकें? सभी ने एक स्वर मे‘हाथ उठा’कर इस बात पर अपनी सहमति दी।
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