जेपी और छात्रों के बीच सेतु थे भवेशचंद्र
भवेशचंद्र प्रसाद उस पीढ़ी के नेता थे, जब लोग समाज को कुछ देने के लिए ही सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करते थे। बाद में उनको संयोग से कुछ मिल गया तो भी ठीक और नहीं मिल पाया तो भी किसी से कोई शिकायत नहीं।
रहे थे बिहार भूदान यज्ञ कमेटी के अध्यक्ष
1977 में गोपालगंज के मीरगंज अब हथुआ से विधायक बने। वे बिहार भूदान यज्ञ कमेटी के भी अध्यक्ष रहे। जेपी आंदोलनकारियों को सम्मान और सहायता के लिए उन्होंने पेंशन योजना शुरु होने के पहले अभियान भी चलाया था।
गांधी शांति प्रतिष्ठान के प्रभारी भी बने
भवेश जी ने भूदान आंदोलन से जुड़कर अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण से प्रभावित थे। 1969 की नक्सली हिंसा के बाद शांति बहाली के लिए जेपी ने जब मुसहरी में काम शुरू किया तो भवेश जी उनके साथ थे। 1972 में वे पटना में गांधी शांति प्रतिष्ठान के प्रभारी बने। 1974 के जेपी आंदोलन में भवेश जी की महत्वपूर्ण भूमिका थी। वे छात्र-युवा संगठनों और जेपी के बीच के सेतु थे। भवेश चंद्र प्रसाद बिहार राज्य छात्र युवा संघर्ष संचालन समिति के प्रथम कार्यालय सचिव थे।
भवेश जी संपूर्ण क्रांति मंच के जरिए जय प्रकाश नारायण के विचारों का अंत तक प्रचार करते रहे। शालीन व्यवहार के मृदुभाषी भवेशचंद्र जैसे लोग राजनीति में अब कम ही नजर आते हैं। जमाना बदल जो गया है!
नहीं आया कोई कायस्थ विधायक
अब तक की खबरों के अनुसार इस महान चित्रांश को कोई भी कायस्थ विधायक संवेदना व्यक्त करने उनके यहाँ नहीं पहुंचा है पटना से कुमार अनुपम रोष प्रकट करते हुए कहते है हमने बहुत कोशिश की और finance minister ने नीतीश जी से आग्रह भी किया लेकिन नीतीश जी ने भवेश चन्द्र प्रसाद जो पूर्व विधायक थे और भूदान यज्ञ कमिटी के अध्यक्ष के रूप में राज्य मंत्री का दर्जा भी था उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अन्त्येस्थी नहीं की गयी। क्योंकि कायस्थ थे वे। कहा गया कि कायस्थ तो बीजेपी का बंधुआ है। दुःख इस बात का है कि बीजेपी के कोई कायस्थ विधायक भी नहीं आये। विधान सभा में उनका शव गया तो भी नहीं। सुशील मोदी नहीं आए।
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