
कायस्थों के DNA पर भी रिसर्च होना चाह्यी – दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन में बोले आर के सिन्हा
कायस्थों के DNA पर भी रिसर्च होना चाह्यी क्योंकि कायस्थ जाती बहुत लम्बे समय तक प्रशासनिक पदों पर रही है और वर्तमान में भी अपना काम बखूबी कर रही है I ये बातें राज्य सभा सांसद आर के सिन्हा ने दिल्ली के कान्शटीत्यूशन क्लब में प्रोफ़ेसर एक राम द्वारा लिखित एक पुस्तक "एतिहासिक परिपेक्ष्य में एक कायस्थ परिवार " के विमोचन के दौरान कहीं I सिन्हा ने प्रोफ़ेसर लाल के उनके परिवार के ६५ पीड़ी के लोगो के संकलन को एक बड़ी पहल बताया I उन्होंने कहा की वो खुद अपने परिवार के पिछले १० पीड़ी तक के लोगो को ही जानते है I उन्होंने कायस्थ राजा टोडरमल के वंशजो का पता भी निकालने का दावा किया और बताया की की खुद उनके वंशजो को ये बात मालुम नहीं थी Iआर के सिन्हा ने कायस्थों को एक जाती के साथ क्लास की बात को स्वीकारते हुए कहा की चूँकि कायस्थ कई सदियों से प्रशानिक कार्य में रहे है इसलिए ये अब उनके जींस में आ गया है I इसलिए एक रिसर्च कायस्थ समाज के लोगो के डीएनए पर भी होनी चाह्यी की आखिर कायस्थ समाज के लोग कैसे प्रशानिक कार्यो को इतना बेह्टर अंजाम दे पाते हैवही कैबनेट सेकेट्री संजय श्रीवास्तव ने कहा की कायस्थ समाज के लोग इमानदार रहे है इसीलिए हमेशा सबकी पसंद भी रहे और हमें इस बात को नयी पीड़ी को बताने की ज़रूरत है Iइस अवसर पर कायस्थ समाज से स्व लाल बहादुर शास्त्री की पुत्रवधू नीरा शास्त्री , अनिल सक्सेना , डा अनूप श्रीवास्तव समेत कई लोग उपस्थित थे
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