अभी महासभा के इस ग्रुप के साथ जुड़ने वाले अधिकतर पदाधिकारी अखिल भारतीय कायस्थ महासभा से, उसकी कार्य संस्कृति से, उद्देश्य से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं, जो भ्रमवश या पद के आकर्षण में ही जुड़ रहे हैं. इससे न कायस्थ समाज में दृष्टि आएगी और न एकता आएगी और न ही लोग इसतरह के संगठन के प्रशंसक एवं सहभागी बनेंगे. अतः इस बात से बहुत खुश होने की जरुरत नहीं है कि कितने राज्यों से कौन-कौन लोग जुड़ रहे हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस उत्साह के साथ गुजरात के कायस्थ समाज जुड़ रहा था, उसके आशाओं पर तम्बाकू निषेध एवं KADAM (कायस्थ, अति पिछड़ा,दलित, आदिवासी, मुसलमान का गठजोड़) जैसे अनावश्यक गोले बरसा दिए गए. मंच की अफरा-तफरी, अपने को लाइम लाइट में लाने का अनावश्यक कवायद एवं फोटो में दिख रहे मंच एडिक्टों की टोली, सबकुछ बयान कर देने के लिए काफी है.यहाँ यह भी बताना हम आवश्यक समझते हैं कि वहां की उपस्थित जन समुदाय संगठन की बैठक में हिस्सा लेने कम, शत्रुघ्न सिन्हा जी जैसे सेलिब्रिटी को देखने- सुनने के लिए ज्यादा उत्सुक थी. मगर यह भी सत्य है कि उन्होंने वहां तम्बाकू राग गा कर लोगों को निराश किया. अब सामाजिक बैठक में भी सेलिब्रिटीयों के बल-बूते भीड़ इकठ्ठा करने की जरुरत आ गई है, जो यह दर्शाता है कि सामाजिक संगठनो में किस तरह की गिरावट आई है.सामाजिक संगठन और खासकर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के नाम पर इस तरह का खेल हर हाल में बंद होना चाहिए. कायस्थ का भरोसा वापस लाने के लिए महासभा के तथाकथित पदाधिकारियों को त्यागपत्र दे देना चाहिए. बहुत हुआ छल-छद्म, अब और समाज के राह में रोडें न अटकाएं. महासभा राजनीतिज्ञों की पार्टी नहीं है जहाँ अन्य जातियों से गठजोड़ की जरुरत है. और न ही यह तम्बाकू सेवियों की जमात है और न ही इस उद्देश्य से इसका गठन हुआ था. यह एक गौरवशाली सामाजिक संगठन है, जिसमे कायस्थ अपना अक्स ढूंढता है. पदलोभी लोगों के चाल का शिकार महासभा रो रहा है, आर्तनाद कर रहा है. – महथा ब्रज भूषण सिन्हा.

अभाकाम की बडौदा बैठक- महासभा पर प्रश्न? – महथा ब्रज भूषण सिन्हा
बहु प्रतीक्षित बडौदा बैठक का समापन हो गया. जो बातें हुई उसमे प्रमुख है- गुजरात के कायस्थों का उत्साह के साथ भागीदारी, संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष का अपने ही संगठन से मोह भंग होना, संगठन के अन्य प्रमुख पदाधिकारियों का उपस्थित न होना, मुख्य अतिथि के रूप में शत्रुघ्न सिन्हा जी एवं सुबोध कान्त सहाय जी का सम्बोधन.मेरा निजी विचार यह रहा है कि महासभा के वर्तमान धड़े में स्व. संत स्वरूप लाल जी के बाद डॉ. आशीष पारिया जी ही संगठन में सबसे अधिक शिक्षित, अनुशासित एवं विचारशील व्यक्ति “हैं” या अब “थे” कह सकते हैं यों तो लाल साहब का मोह भंग तो अदालत के फैसले के तत्काल बाद ही हो गया था. वे अंतिम समय में मुझसे टेलीफोनिक वार्ता के क्रम में कुछ कहना चाह रहे थे पर दुर्भाग्य से हमें मिलने का मौका नहीं मिला. जून 15 में हुई कानपुर की बैठक पारिया जी ने ही आयोजित की थी, जिसमें उनकी अति महात्वाकांक्षी पदाधिकारियों से काफी तीखी झड़प हुई थी और मैं खुद भी असहज था. आखिर पारिया जी ने अपने को अलग कर ही लिया. अब यह कोई महासभा नहीं, एक गिरोह का शक्ल ले लिया है. संगठन का कोई तत्व अब इस ग्रुप में शेष नहीं है.ज़रूर पढ़े : अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का सम्मेलन बड़ोदरा में संपन्न, खट्टे मीठे अनुभवों ने समाज को एक तो किया मगर विवाद भी साथ आये जिस संगठन के कार्यकारिणी की मैराथन बैठक का एकमात्र विचारणीय मुद्दा यह हो कि हमारे संगठन के पदाधिकारी समाज के अन्य कार्यक्रमों में हिस्सा न लें, और उस पर भी मतैक्य न हो, इससे संगठन की स्थिति समझी जा सकती है.
हम बार-बार कहते रहें हैं कि सामाजिक संगठन को समाज का मार्गदर्शक होना चाहिए. तो जाहिर है लोग उसी का अनुकरण करना चाहेंगे जिसमे कुछ अनुकरणीय तत्व हों. आदर्शवान हों. श्रेष्ठ जन हों. नायक हों ताकि लोग श्रद्धा भाव से जुड़े और सबलोग, पूरा समाज उनका अनुकरण करे.
।। Kayastha Khabar ।। no 1 Kayastha Portal, sri chitrgupt Bhagwan, chitransh parivar, Kayastha News , Kayasthworld Kayastha News , Kayastha Khabar , No 1 Kayastha Portal, Kayasthworld , sri chitrgupt Bhagwan, chitransh parivar,
