आज सोशल मीडिया पर "आइकन" संस्था(आल इंडिया कायस्थ कांफ्रेंस) के नाम पर जिसे १८८७ में स्थापित बताया जा रहा है को पुनर्जीवित करके दुबारा से कायस्थ की १६० संस्थाओं को एक करने के दावे जैसी कहानी का साहित्य बांटा जा रहा है I जिसमे बताया गया की खुद में विवादित और लगभग आधारहीन हो चुकी राष्ट्रीय कायस्थ महापरिषद के कुछ सदस्यों ने पिछले दिनों ११ फरवरी को एक बैठक की जिसमे अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के कई गुट होने की बातें लिख कर एक नयी संस्था के गठन पर जोर देने की बात कही जा रही है I जिसमे अंतरिम तोर पर कुछ लोगो को संयोजक और अध्यक्ष बनाया गया है Iसंस्था के पहले चरण में १० रूपए की आजीवन सदस्यता के साथ १०००० सदस्य बनाने का अभियान भी शुरू किये जाने की योजना कही जा रही है I जिसके जरिये आइकन संस्था कायस्थ समाज के लिए काम करेगी लेकिन क्या काम करेगी ये इस प्रपत्र में स्पष्ट नहीं है I मुझे आपकी नयी संस्था का आईडिया बहुत अच्छा लगा लेकिन मेरे इन संस्था से जुड़ने से पहले सभी महानुभावो से बेसिक सवाल -
आपने लिखा सभी संस्थाए विवादित हो गयी है (जिसमे आपकी भी संस्था रा. का. महापरिषद शामिल है ) इसलिए आप लोग इस पुरातन संस्था को पुनर्जीवित कर रहे है , तो क्या गारंटी है की ये संस्था आगामी १-२ साल में विवादित नहीं होगी I
आपने लिखा की ये पुरानी (अब नयी) संस्था समस्त संस्थाओं को एक करेगी तो आपकी वर्तमान संस्था रा. का. महापरिषद जिसमे शामिल १६० संस्थाओं के ८० प्रतिनिधि आपके साथ है (यानी हर २ संस्था से १ आदमी या फिर हर १ आदमी के पास २ संस्थाए) ने अब तक क्या किया है ?
आपके हिसाब से अखिल भारतीय कायस्थ महासभा विवादित है और आपकी संस्था गैर विवादित , जबकि अखिल भारतीय कायस्थ महासभा चुनावों के चलते अध्यक्ष पद को लेकर विवादित हुई , लेकिन आपकी संस्था महापरिषद में तो आज तक एक ही अध्यक्ष ही काबिज है तो क्या गारंटी है की नयी संस्था में भी फिर से यही ना हो ?
आप कह रहे है की १० रूपए में आजीवन सदस्य बनायेंगे तो इस आधार पर आप प्राम्भिक तोर पर १ लाख रूपए जमा करेंगे , जबकि जो प्रपत्र आप बाँट रहे है उसे बाटने और रखने की कीमत भी १ लाख से ज्यदा होगी तो अब इस नयी संस्था में फंड कैसे आएगा ?
क्या ये संस्था बिना किसी फंड के कायस्थ समाज के सारे काम करने जा रही है ?
क्या ये फिर से नयी बोतल में पुरानी शराब जैसा कोई खेल तो नहीं है ?
आज देश में जब बिना संगठन , बिना सदस्य के संगत पंगत और कायस्थ वृन्द जैसी विचारधाराए भी काम कर रही है तो फिर एक नयी संस्था की क्या ज़रूरत ?
आखिर आपकी इस गोलमेज सम्मलेन में आज के दौर में देश का कोई भी चर्चित चेहरे जैसे आर के सिन्हा , कैलाश नाथ सारंग , धीरेन्द्र श्रीवास्तव , आशीष पारिया , मनीष श्रीवास्तव, डा ज्योति श्रीवास्तव , मनोज श्रीवास्तव आदि क्यूँ नहीं थे , आखिर क्यूँ आपने इन्हें आमंत्रित करने की भी ज़रूरत नहीं समझी ?
कहीं ऐसा तो नहीं की नए खिलाडियों के आने से किनारे लगे माठाधीशो का एक फिर से वही मुकाम हासिल करने की चाहत मात्र है ये , आखिर समाज की संस्थाओं को एक करने की जगह आप लोगो के पास समाज की सेवा, ज़रुरात्मंदो की मदद , चिकित्सीय मदद या भगवान् चित्रगुप्त के प्रसार का क्या ट्रैक रिकार्ड है ?
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के गुटबाजी की आढ़ में "आइकन" कायस्थ समाज के साथ कोई बड़ा खेल तो नहीं करने जा रहा है ?
आखिर बार बार संस्थाओं को एक करने का ही आह्वाहन क्यूँ ? क्या आप लोग अपने अपने क्ष्रेत्र में सब लोगो तक पहुँच गए है
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