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चौपाल

नितीश कुमार ने फिर किया डा सच्चिदान्नद सिन्हा का अपमान : बिहार निर्माता को याद कर और श्रद्धासुमन अर्पित किये बिना क्या बिहार दिवस मनाना उचित है ? आदित्य श्रीवास्तव

जातिगत वोट बैक के लिए इतिहास से खिलवाड हमारे देश मे वर्षो से होता रहा है, और इसका प्रभाव कही ना कही हमारे देश के महापुरूषो के सम्मान पर भी पडता रहा है। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, भगत सिंह, देशरत्न राजेन्द्र बाबु और लाल बहादुर शास्त्री सहीत अनेको उदाहरण है जिन्हे केवल वोट बैक की राजनिति के लिए हमारे देश ...

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लखनऊ से चौथी बार विधायक बनने वाले सुरेश श्रीवास्तव को मंत्री नहीं बनाया गया,क्या कायस्थ होना उनका अपराध है ? – शरद श्रीवास्तव

पहली बार जीतने वाले तमाम लोग मंत्री बनाए गए किंतु लखनऊ से चौथी बार विधायक बनने वाले सुरेश श्रीवास्तव को मंत्री नहीं बनाया गया . क्या कायस्थ होना उनका अपराध है ? या कोई अपराधिक केस ना होना या फिर 4 बार विधायक बनने के बाद भी M.I.G.मकान में रहना ? क्षेत्रीय जनता की सक्षम पदाधिकारियो. से मांग है कि ...

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यूपी चुनाव में भाजपा की जीत मे आर. के. सिन्हा का बडा योगदान,कायस्थ पाठशाला के टी.पी. सिंह ,कायस्थ वृन्द के धीरेन्द्र श्रीवास्तव भी रहे साथी – आदित्य श्रीवास्तव

उत्तर प्रदेश में माननीय सांसद श्री आर.के.सिन्हा जी द्वारा सघन चुनाव अभियान किया गया । उससे कायस्थ वोट बीजेपी की ओर गोलबंद हुआ ।कायस्थों का शत प्रतिशत मतदान बीजेपी के पक्ष में हुआ है । इस बार ये संख्या 4 हो गयी है। चारों सीटों पर माननीय सांसद श्री आर.के.सिन्हा जी ने सघन प्रचार अभियान और कई सभाएं भी उनके ...

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यह नियति है कि प्रतिभा पर, या प्रतिभा से अर्जित उपलब्धि पर, पहले शंका ही जताई जाती है -आलोक श्रीवास्तव

जो झुँड में नहीं चलते. जिनका कोई गॉड फ़ादर नहीं होता. उनका अपना स्वाभिमान होता है. लेकिन यह भी सच है कि उनकी प्रतिभा और उपलब्धियाँ, हमेशा शंकाओं के घेरे में रहती हैं ! क्योंकि उनके पास 'हितैषी-प्रचारक' नहीं होते. ऐसे लोग ईर्ष्यालु प्रतिद्वंद्वी अवश्य पैदा कर लेते हैं ! यह नियति है कि प्रतिभा पर, या प्रतिभा से अर्जित ...

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उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री पद के लिए उचित नाम श्री सिद्धार्थ नाथ सिंह – डा ज्योति श्रीवास्तव

भारतीय जनता पार्टी का विजय पताका उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड में इस तरह फहराया गया कि पूरा देश केसरिया रंग में डूब गया। किंतु वर्णनीय है कि उत्तर प्रदेश की इस जीत में कायस्थों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, इस बात में कहीं कोई संदेह या संकोच नहीं हो सकता। जहाँ एक ओर "कायस्थवृंद" व मुख्य समन्वयक श्री धीरेंद्र ...

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यूपी में मिले प्रचंड जीत से आर के सिन्हा व् ओम माथुर पर बीजेपी का विस्वास बढ़ा – अलोक श्रीवास्तव

कायस्थ खबर डेस्क /अलोक श्रीवास्तव I समाजसेवी,सांसद,और कायस्थ रत्न  आर के सिन्हा का इस बार असर बीजेपी में दिखा जिस कारण कायस्थों को कुछ सीट भी मिली और सिन्हा  को बीजेपी ने प्रचार के लिए भी उतारा ।यह पहला अवसर था कि कायस्थ समाज के प्रति बीजेपी को इतना सोचना हुआ और बाद में सम्मान देना पड़ा । वही दूसरे ...

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आइकन विवाद में अब महथा ब्रज भूषण सिन्हा के तीखे सवाल : हरिश्चन्द्र नाम रख लेने से कोई हरिश्चन्द्र नहीं हो जाता, अलग संस्था की क्या जरुरत थी? वर्तमान संस्था में ही आवश्यक सुधार कर कार्य किया जा सकता था

आइकन के स्थापित या पुनर्स्थापित होने पर विवाद बढ़ते ही जा रहे है , इसी क्रम में रांची से विख्यात कायस्थ चिन्तक महथा ब्रज भूषण सिन्हा ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये है I लेखक के विचारों के लिए कायस्थ खबर का उनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है , कायस्थ खबर सभी पक्षों का सम्मान करता है इसलिए सभी को उनका ...

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आइकन विवाद : आइकन का आशु भटनागर को जबाब – शक का ईलाज तो हकीम लुकमान के पास भी नहीं था, लोग तो अपने भाई, रिश्तेदार, परिवार,समाज सभी पर शक,संदेह करते हैं

आइकन विवाद में आइकन के मीडिया संयोजक संकेत श्रीवास्तव ने कायस्थ खबर को अपने जबाब भेजे है , कायस्थ खबर उनके पक्ष का सम्मान करता है और उसे पब्लिक के सामने रख रहा है I कायस्थ खबर सभी पक्षों का सम्मान करता है , पत्र में आये विचार आइकन संस्था के है और कायस्थ खबर उसके लिए ज़िम्मेदार नहीं है ...

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आईकान विवाद : राष्ट्रीय कायस्थ महापरिषद में कुछ विवाद के कारण ही ये आइकन संस्था का जन्म हुआ है – मनीष श्रीवास्तव

आइकन (अखिल भारतीय कायस्थ कांफ्रेंस) के गठन के साथ ही इसकी प्रस्तावना में राष्ट्रीय कायस्थ महापरिषद के सदस्यों द्वारा जिस तरह से अखिल भारतीय कायस्थ महासभा को निशाना बनाया गया है I उसका जबाब अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय संजोजक मनीष श्रीवास्तव ने दिया है I कायस्थ खबर दोनों पक्षों का सम्मान करता है I इस विवाद पर सभी ...

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सीधी बात: “आइकन” के बहाने क्या किसी नए खेल की शुरुआत कर रहे है समाज की नेतागिरी में हाशिये पर गए लोग – आशु भटनागर

आज सोशल मीडिया पर "आइकन" संस्था(आल इंडिया कायस्थ कांफ्रेंस) के नाम पर जिसे १८८७ में स्थापित बताया जा रहा है को पुनर्जीवित करके दुबारा से कायस्थ की १६० संस्थाओं को एक करने के दावे जैसी कहानी का साहित्य बांटा जा रहा है I जिसमे बताया गया की खुद में विवादित और लगभग आधारहीन हो चुकी राष्ट्रीय कायस्थ महापरिषद के कुछ ...

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