सत्य घटना पर आधारित । कायस्थ समाज के सभी सरकारी अधिकारी व कर्मचारी जो सरकारी नौकरी पर है, अवश्य पढ़ें क्योंकि आप भी बाद में पश्चाताप ही कर सकते हैं और कुछ नहीं कर पायेंगे। मेरे एक प्रिय मित्र ने मुझे एक सत्य घटना बताई सुन कर लगा कि बात बहुत गम्भीर है आप सब तक जरुर जानी चाहिये। आप बात मान लेंगें कि हाँ सच में ऐसा ही होता है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। * दिल्ली में एक कायस्थ अधिकारी बहुत अच्छे पद पर कार्यरत थे अभी बस दो महीने पहले ही रिटायर हुये हैं, वो अपने किसी निजी कार्य से वर्तमान अधिकारी के पास ऑफिस आये उन्होंने अपना परिचय दिया ओर नमस्कार करने के बाद अपना कार्य बताया उनसे वर्तमान अधिकारी ने कहा कि महोदय लगभग तीन चार घंटे बाद आपका ये कार्य मैं कर दूंगा तब तक आप किसी मिलने वाले के यहां घूम आएं आप तो लम्बे समय तक दिल्ली में ही पावरफुल अधिकारी रहे हैं।
वर्तमान अधिकारी की बात सुनकर उस समय तो रिटायर कायस्थ अधिकारी महोदय ने बोल दिया कि ठीक है मैं 4 घंटे बाद आता हूँ ओर वर्तमान अधिकारी के कार्यालय से बाहर आ गये, बाहर आकर सोचने लगे कि अगर मैं दूर स्थित घर जाऊँगा तो तीन चार घंटे में वापिस आना जाना कठिन है। आस पास मेरे परिचित कौन व्यक्ति हैं जिसके पास 4 घंटे रुका जा सके रिटायर कायस्थ अधिकारी महोदय ने खूब दिमाग़ लगाया कई बार फोन की ओर देखा लेकिन उन्हें कोई भी व्यक्ति अपनी जानकारी में नहीं दिखा जिसके पास 4 घंटे बिता सके लेकिन रिटायर कायस्थ अधिकारी महोदय को ऐसा कोई व्यक्ति जब नहीं दिखा तो वे फिर अन्दर वर्तमान अधिकारी के पास गये ओर बोले भाई साहब मेरा कोई जानकार नहीं है इस महानगर में, मेरा कार्य आप जल्दी कर देते तो मैं जल्दी घर चला जाता,
वर्तमान अधिकारी ने तुरंत बोला महोदय आप इतने पूराने अधिकारी रहे हैं ओर जाति से कायस्थ हैं और इस पास में तो बहुत कायस्थ हैं मैं बहुत कायस्थ समाज के बंधुओं को जानता हूँ मेरे पास बहुत कायस्थ कार्य के लिये आते जाते रहते हैं फिर आप इतने मायूस क्यों हैं आप के तो बहुत से कायस्थ जानकार होने चाहिये थे,
इतना सुनते ही रिटायर अधिकारी आंसू निकालकर जोर जोर से रोने लगे और रोते रोते ही बोले सर मैंने आज तक एक भी कायस्थ का कार्य नहीं किया है मैं आज बहुत शर्मिदा हूँ। मैंने रुपये व नौकरी के चक्कर में बड़े बड़े पदों पर रहते हुए भी क्षेत्र के कायस्थ समाज के एक व्यक्ति का भी कार्य किया होता तो मुझे आज रोना नहीं पड़ता। मेरे मित्र ये सब सुन व देख रहे थे उन्होंने भी इन रिटायर अधिकारी महोदय से बात की और बोले अंकल जी आप ही नहीं ऐसे बहुत से सरकारी अधिकारी व कर्मचारी हैं जो कायस्थ हैं अगर कोई कायस्थ अपने किसी कार्य के लिये आ जाए तो धमका कर भगा देते हैं, मुंह फेर लेते हैं। अगर आप अपने कायस्थ समाज के लोगों के कार्य करते तो आज पछतावा नहीं होता। आप सम्मानित हैं मेरे साथ मेरे आफिस या घर चलें आराम करें। कोई बात नहीं है पद प्रतिष्ठा घर नौकरी में रहने वाले कायस्थों को सबसे प्यारे लगते हैं वो बस उनसे ही लगाव और प्यार रखते हैं आप ने भी वही किया फिर भी मैं कायस्थ होने के नाते आप का सम्मान करता हूँ। रिटायर अधिकारी महोदय ने गलती मानी ओर खूब देर सुबकियां भर भर कर रोये ओर पश्चाताप करने लगे लेकिन अब क्या हो सकता था वो रिटायर हो चुके थे।* कृपया आप भी चिन्तन करें कि कहीं मैं भी ऐसा तो नहीं हूं। वर्ना रिटायरमेंट बाद घर पर चिड़ी काग भी नहीं आएगें आश लेकर अपने तो दूर की बात है। अभी भी बहुत सारे ऐसे अधिकारी और कर्मचारी हैं जो कायस्थ समाज की दशा दिशा बदल सकते हैं लेकिन वो सब अपने कायस्थ समाज को भूल जाते हैं जबकि ऐसा नहीं होना चाहियें
अतः आप सभी कर्मचारी बंधुओं से निवेदन है कि अधिक से अधिक जहां तक संभव हो सके किसी भी कायस्थ बंधु का कोई काम हो तो उन्हें प्राथमिकता सें करने का प्रयास करें।
"बडा.दुख होता है जब कोई यह कहता है कि तुम कायस्थ कभी भी एक नहीं हो सकते हो।
भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज जी की जय हो
: हमारे लिये चिंतन करके व्यवहार में अपनाने योग्य तथ्य।
इस घटना के अक्षरीय अंकन को प्रत्येक कायस्थ बंधु विशेषकर अधिकारी बंधु तक अवश्य पहुंचायें।
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