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अभाकाम हमारी विरासत है और पारिया ग्रुप उसमे वैधानिक और अच्छी भूमिका निभा रहा है- धीरेन्द्र श्रीवास्तव

जब-जब कायस्थों के बडे व लोकप्रिय सामाजिक संगठन की चर्चा होगी एक ही नाम उभर कर राष्ट्रीय स्तर पर आम और खास लोगो के जेहन मे आता है - "अखिल भारतीय कायस्थ महासभा" हालांकि आज की तिथि मे महासभा के अनेक गुटो सहित हजारो स्थापित व स्वानामधन्य संगठन कायस्थ हित का दावा करते दिखाई पड रहे है परन्तु जिस प्रकार से श्री विश्वमोहन कुलश्रेष्ठ जी, श्री कमल श्रीवास्तव जी, डा०अरविन्द्र श्रीवास्तव जी, डा०मुकेश श्रीवास्तव जी, श्री जे के सक्सेना जी, व श्री रमेश श्रीवास्तव जी आम कायस्थ होने के बावजूद जनपद दर जनपद, आम दर आम कायस्थों को जोडने का भगीरथ प्रयत्न कर रहे है उससे कथित मूर्धन्य व स्थापित मठाधीशो मे बेचैनी होनी स्वाभाविक है।परिणाम स्वरूप जनाधारहीन व जोडतोड विशेषज्ञों द्वारा "अखिल भारतीय कायस्थ महासभा (पारिया) को बदनाम करने का अभियान सा चल पडा है जिसका हम सभी जागरूक कायस्थों को प्रबल विरोध करना जरूरी है । अभाकाम हमारी विरासत है और पारिया ग्रुप उसमे वैधानिक और अच्छी भूमिका निभा रहा है पूर्व में हमने बहुत नजदीक से अनेक बडे कायस्थ नेताओ और उनके भक्तो को आम कायस्थ को बेवकूफ़ बनाने व उनका दुरुपयोग करने का प्रयास करते देखा है और दुखी भी हुये है।
"कायस्थवृन्द "कोई संगठन नही बल्कि एक वैचारिक अवधारणा है जिसका गठन व दिशानिर्धारण विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक,साहित्यिक, धार्मिक, आर्थिक एवं राजनीतिक संगठनो/संस्थाओं /सक्रिय कायस्थो की उपस्थिति मे सम्पन्न होने वाले बैठकों से होता है। उसकी अगली बैठक कार्यस्थगन सेना प्रमुख श्री सुरेन्द्र कुलश्रेष्ठ जी के संयोजकत्व मे 14/15 मई को आगरा मे होने जा रही है । मुख्य समन्वयक होने के नाते मुझे विभिन्न संगठनो की आंतरिक व वाह्य गतिविधियो की जानकारी प्राय: मिलती रहती है जिसके आधार पर मेरा मानना है कि अखिल भारतीय कायस्थ महासभा (पारिया) उत्तर प्रदेश सहित सात आठ प्रदेशो मे प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद गली-गली मे आम कायस्थों को जोडने व कायस्थहित के प्रयास किये जा रहे है। ऐसे मे हमें श्री विश्वमोहन कुलश्रेष्ठ और उनके साथियो को प्रेरित करने के साथ सहयोग करने की भी आवश्यकता है।
आशा करता हु कि स्वघोषित मठाधीश और उनके कथित भक्तजन (केवल घोषणा विभाग प्रमुख) जमीनीं हकीकत समझेंगे और अपने व्यवहार मे परिवर्तन करेंगे अन्यथा अभी तो लोग पूछना बन्द किये है आने वाले समय मे कायस्थ इतिहास के पन्नों से भी नाम हटा देंगे। आपका अपना धीरेन्द्र श्रीवास्तव मुख्य समन्वयक "कायस्थवृन्द " (चैपाल  मे छपने वाले विचार लेखक के है और पूर्णत: निजी हैं , एवं कायस्थ खबर डॉट कॉम इसमें उल्‍लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है। इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी कायस्थ खबर डॉट कॉम स्‍वागत करता है । आप लेख पर अपनी प्रतिक्रिया  kayasthakhabar@gmail.com पर भेज सकते हैं।  या नीचे कमेन्ट बॉक्स मे दे सकते है ,ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी भेजें।)  

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