कायस्थ खबर डेस्क I यूपी चुनावों का समय जैसे जैसे नजदीक आता जा रहा है वैसे वैसे कायस्थ समाज की बैचेनी बढती जा रही है I २ साल से अपनी ताकत प्रदर्शित करता कायस्थ समाज बीजेपी से यूपी में मात्र १० सीटो पर अपनी उपस्थिति की डिमांड कर रहा था I लेकिन हालत कुछ और ही बयान कर रहे है I कायस्थ खबर को मिली जानकारी के अनुसार यूपी में सीटो के गणित में कायस्थ समाज को हाशिये पर धकेल दिया गया है Iजिताऊ प्रत्याशी ना होने की बात कह कह कर ऐसे प्रत्याशियों को तरजीह दी जाने वाली है जिसका समाज से कोई नाता नहीं है I बीजेपी से जुड़े एक नेता ने कायस्थ खबर को बताया की साल भार पहले जब ओम माथुर बीजेपी के प्रदेश प्रभारी बन कर आये थे तो यूपी के कायस्थ समाज में एक आशा बंधी की की इस बात यूपी में ओम माथुर कुछ अपने समाज की भी सुनेगे I लेकिन खांटी संघी दिखाने के चक्कर में कायस्थ समाज के प्रतिनिधियों के साथ ओम माथुर की बेरुखी ने कायस्थ समाज के होश उड़ा दिए है I दबी जुबान में बीजेपी से जुड़े अधिकाँश नेता अब यही कह रहे है की अगर सुनील बंसल के ही चक्कर काटने थे तो अपनी जाती के नेता को हम क्या माने I और फिर किस आधार पर कायस्थ बीजेपी को वोट दे Iहालांकि टिकट वितरण तक सभी सामने आ कर कुछ कहने से बच रहे है , लेकिन टिकट के बाद बीजेपी को कायस्थ समाज का नुक्सान उठाना पद सकता है I गौरतलब है की उत्तर प्रदेश में लगभग ३५ सीटो पर कायस्थ समाज के लोग चुनाव हारने और जिताने का दम रखते है जिनमे इलाहबाद , लखनऊ , गोरखपुर बनारस जैसे मंडलों में तो इनके बिना चुनाव जीतना ही असंभव है Iलेकिन बीजेपी के आंतरिक रिपोर्ट्स की माने तो इन सीटो पर भी ठाकुर लाबी के सक्रीय होने की खबरे आ रही है जिसके चलते कायस्थ समाज के प्रभावशाली लोगो तक को टिकट नहीं मिल पा रहा है
ओम माथुर की कार्यशैली से नाराज हैं कायस्थ संगठन ? कायस्थ समाज के संगठनो ने भी ओम माथुर की कार्यशैली से अपनी नाराजगी दिखाई है I कायस्थ संगठनों के नेताओं को तवज्जो देने की जगह अपनी ही पार्टी के कार्यक्रताओ को विवादित संगठनों में नेता बना कर अपनी छवि गाड़ने के प्रयासों पर कायस्थ समाजके संगठनों का कहना साफ़ है I यूपी चुनावों में ज़मीनों लोगो को नजर अंदाज करना बीजेपी को बहुत भारी पड़ेगा I यूपी में एक बार फिर से इंडिया शायनिंग की तरह बीजेपी का सुपडा साफ़ होगा Iयूपी में कायस्थ संगठनों के समूह के तोर पर काम करने वाले कायस्थ वृन्द के मुख्य समन्वयक धीरेन्द्र श्रीवास्तव ने कायस्थ खबर को बताया की सामुहिक सोच वाले ज़मीनी संगठनों को दरकिनार करके विवादित संगठन के नेताओं से अपनी जीत पक्की मानना बीजेपी के नेताओं की भूल साबित होगी I गौरतलब है की कायस्थ वृन्द के साथ यूपी के सभी प्रमुख कायस्थ संगठन जुड़े हुए है I वही कायस्थ चिन्तक आलोक श्रीवास्तव पहले ही आंशका व्यक्त कर चुके है की ओम माथुर से उम्मीद लगाए कायस्थों को लालीपाप ही मिलने वाला है
ज़रूर पढ़े :यूपी चुनाव 2017 में ओम माथुर से उम्मीद लगाए कायस्थ उम्मीदवारों को लॉलीपॉप मिलने के आसार प्रबल – आलोक श्रीवास्तव क्या करेगा कायस्थ समाज ?चुनावों में बीजेपी से अपनी उपेक्षा से दुखी कायस्थ समाज एक तरफ़ा प्रतिरोध की वोटिंग भी कर सकता है I संगठनों से आ रही आवाजों को अगर ध्यान से सुने तो समाज पहले से ही सिर्फ कायस्थ प्रत्याशी को वोट करने की बात कह रहा है और अगर टिकट नहीं मिलता है तो ऐसे में सामूहिक तोर पर नोटा ही एक मात्र विकल्प माना जा रहा हैऐसे में अगर बीजेपी का कायस्थ समाज के प्रति रुख बदलता है या फिर कम से कम १० टिकट ओम माथुर के होते हुए भी बीजेपी नहीं दे पाती है तो कायस्थों का ज़मीनी नेतृत्व बीजेपी को जबरदस्त ज़बाब देगा

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