कायस्थ पाठशाला में 2023 में हुए चुनाव में वोटिंग के दौरान बच्चे हुए कुछ वोटो की गिनती को लेकर कोहराम मचा हुआ है बीते 6 महीने में सत्ता पक्ष के अंदर तमाम लोगों में अपनी हिस्सेदारी को लेकर झगड़ा अब आम हो चुके हैं। पहले एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष की पट्टीका किसी के इशारे पर उखाड़ दी गई तो उसके बाद एक अन्य उपाध्यक्ष के साथ मंदिर प्रांगण में शराब पिए लोगों ने अभद्रता की। बात यहीं तक रुक जाती तब भी कायस्थ पाठशाला का नाम बदनाम ना होता । चर्चा तो इन दिनों यह है कि कम्युनिटी सेंटर में होने वाले कार्यक्रमों में 30 से 40 पर्सेंट कमीशन कुछ नेताओं और उनके प्रतिनिधियों को जा रहा है । ऐसे में अगर वोटो की गिनती हो जाए और सत्ता पलट जाए तो बना बनाया खेल बिगाड़ सकता है ।
हालात यहां तक आ गए कि सत्ता पक्ष को समर्थन कर रहे एक वर्तमान विधायक डॉ केपी श्रीवास्तव द्वारा कायस्थ पाठशाला के सत्ता पक्ष के ही दूसरे समर्थक वरिष्ठ अधिवक्ता टीपी सिंह को वंशज सभा के कार्यक्रम में अविश्वास प्रस्ताव लाने के नाम पर कह दिया गया जो उखाड़ सकते हो उखाड़ लो। बात यही नहीं रुकी दावा है कि भाजपा विधायक के ड्राइवर ने भी वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ अभद्रता की और बीच में कायस्थ पाठशाला के प्रवक्ता के आने पर उनके साथ अभद्रता और मारपीट भी की ।
कायस्थ पाठशाला को जानने वाले कहते हैं कि डॉ केपी श्रीवास्तव और टीपी सिंह के बीच अदावत कोई नई नहीं है पहले भी पाठशाला चुनाव को लेकर यह लोग आमने-सामने आ चुके हैं । वर्तमान लड़ाई का असली मुद्दा यह है कि डॉक्टर केपी श्रीवास्तव इस समय वर्तमान अध्यक्ष डॉक्टर सुशील सिंह के समर्थन में है वही ₹100 की सदस्यता को लेकर टीपी सिंह विरोध में आ गए हैं और ऐसे में इन दोनों के बीच की कटुता फिर से बाहर आ गई है ।
सत्ता के अहंकार में वानप्रस्थ के दौर में विधायक की ओर से जिस अभद्र तरीके से टीपी सिंह को कहा गया है वह उनकी मर्यादा पर प्रश्न उठता है । साथ ही वर्तमान सरकार योगी आदित्यनाथ की सरकार पर भी प्रश्न खड़े करता है की क्या उन्होंने ऐसे नेताओं को उन्होंने विधायक बनाया ?
एनसीआर खबर से बातचीत में भाजपा विधायक ने यह दावा किया कि कोई बड़ी बात नहीं हुई । प्रयागराज में वंशज सभा में अध्यक्ष के पद को लेकर मनोनयन और चुनाव के बीच हो रही चर्चा में हुई बिरादरी के बीच की छोटी सी बात है। किंतु पीड़ित पक्ष ने इसको लेकर बातों के सही होने का दावा किया। घटनाक्रम में अभद्रता और मारपीट से आहत हुए कायस्थ पाठशाला के प्रवक्ता ने अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया यद्यपि उन्होंने अपने त्यागपत्र में निजी कारण बताया किंतु उनके समर्थकों का दावा है कि इस सबके पीछे यही कारण है
इस पूरे घटनाक्रम में सत्ता पक्ष के वर्तमान अध्यक्ष, महाभारत के धृष्ट्रराज की भांति अपने संजय से लगातार पूछ रहे हैं कि संजय यह क्या हो रहा है संजय यह क्यों हो रहा है । और इसके साथ ही अपने अनमोल रतन को यह निर्देश भी दे रहे हैं कि वह लगातार मुद्दे को भड़काने के लिए ऊलजुल बातें करते रहे
बताने वाले बताते हैं कि यद्यपि धृष्ट्रराज की भांति ये अध्यक्ष भी चाहते यही है कि उनके बारे में कोई प्रश्न या सवाल न किए खड़े किए जाएं इसी के लिए एक वरिष्ठ अधिवक्ता को निशाना बनाकर यह संदेश दिया गया कि अगर उनके साथ ऐसा हो सकता है तो बाकी छोटे-मोटे उपाध्यक्ष या साइकिल के ठेके लेने वाले, कायस्थ नेताओं के साथ तो क्या-क्या होगा इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
इसी सबसे व्यथित कायस्थ पाठशाला के एक वोटर ने दो पैग लेकर यह कविता गाई है ।

हमने वोट दिया है एक डॉक्टर को
पछता रहे है .. वोट हमारा था
हमने डाला था, तुमको डाला था
हमने वोट दिया है एक डॉक्टर को
कल तुमने जो हमसे वादे किए थे ..
कहां है कहां है कहां वो वादे ..
कल तुमने जो विधवा पेंशन बढ़ाने की खाई थी कसमें
कहां है कहां है कहां है वो कसमें
ना इतरायाइए, ना छुप जाइए
बस हम पर मुस्कुराइए क्योंकि वोट हमारा था, हमने डाला था
हमने वोट दिया है एक डॉक्टर को
पछता रहे है .. वोट हमारा था
ए अध्यक्ष तुमको चुना था हमने
जरा याद कीजे वो बाते चुनावी
कोठी के खिलाफ तुम उम्मीद थे हमारी
मगर आज बदली हुई है कहानी …
ये क्या हो गया ये क्यों हो गया
समझ ना सका, वोट हमारा था
हमने वोट दिया है एक डॉक्टर को
पछता रहे है .. वोट हमारा था
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