प्रयागराज में जब कायस्थ पाठशाला के अध्यक्ष डॉ सुशील सिन्हाके विरोध में विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव की डेट का इंतजार कर रहा था तब 22 सितंबर को डॉक्टर सुशील सिन्हा देहरादून का समाज से आने वाले एक पूर्व सांसद के 74 वे जन्म दिवस पर हुए एक कार्यक्रम में पहुंच गए ।
वहां उन्होंने कायस्थ पाठशाला के बारे में बताते हुए पूरे देश के कायस्थों से उसमें जुड़ने का आह्वान कर दिया और दावा कर दिया कि 27 अक्टूबर 2024 से कायस्थ पाठशाला ₹100 में ऑनलाइन सदस्यता शुरू कर देगा ।
कायस्थ समाज से आने वाले पूर्व सांसद ने उनसे वही पूछा कि क्या इस सदस्यता में कुछ श्रेणियां बनाई गई हैं जिससे सामान्य सदस्यता और और विशेष सदस्यता में कोई अलग श्रेणियां है ।
कायस्थ समाज से जुड़े कई बुद्धिजीवियों का दावा है कि अक्सर सामाजिक संस्थाओं और ट्रस्ट में सदस्यों की कई श्रेणियां होती है जिसमें प्रारंभिक सदस्य, सक्रिय सदस्य, गणमान्य सदस्य, सलाहकार सदस्य, मार्गदर्शक सदस्यों जैसी कई श्रेणियां बनाई जाती है । ऐसे में अगर प्रयागराज तक सीमित रही कायस्थ पाठशाला अब पूरे विश्व में अपने सदस्य जोड़ना चाहती है तो सिर्फ सदस्यता ₹100 करने की जगह बाकी विकल्पों पर अब तक क्यों नहीं विचार किया गया और डा सुशील के दावों के अनुसार लगभग 4 करोड़ सदस्यों की सिर्फ भीड़ के सहारे एक शैक्षिक संस्था को क्यों बर्बाद करने की प्लानिंग की जा रही है ।
ऐसे प्रश्न की अपेक्षा न होने से हैरान डॉक्टर सुशील सिन्हा किंकर्तव्यविमूढ़ की अवस्था में पहुंच गए और उन्होंने एक सपाट उत्तर देते हुए कहा कि नहीं कायस्थ पाठशाला में अभी तक ₹1100 की सदस्यता थी और अब उसे ₹100 की संस्था किया जा रहा है और इसको ऑनलाइन किया जा रहा है ।
डॉ सुशील सिन्हा यही नहीं रुके उन्होंने वहां एक अवयवहारिक बात करते हुए बात करते हुए दावा किया कि 120 करोड़ भारतीयो के लोगों के चार प्रतिशत कायस्थों को वह कायस्थ पाठशाला के सदस्य के रूप में जोड़ना चाहते हैं ।
कायस्थ समाज से जुड़े कई लोगों ने 4% कायस्थ पूरे देश में होने पर डॉक्टर सुशील सिन्हा के दावे को गलत बताया है बीते साल बिहार में कायस्थ समाज से जुड़ी जनगणना के आधार पर 0.61% कायस्थ बिहार में गिने गए थे इसको थोड़ा और भी बढ़ा दिया जाए तो देश के स्तर पर यह एक या डेढ़ परसेंट तक जा सकता है किंतु डॉक्टर सुशील सिन्हा अपने से चार प्रतिशत तक बता गए जिसके कारण कायस्थ समाज में भ्रम की स्थिति फैल सकती है
ऐसे में बड़ा प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि क्या डॉक्टर सुशील सिन्हा कायस्थ पाठशाला के निर्मेंमाण में स्व मुंशी काली प्रसाद जी की वसीयत में लिखें सदस्य बनने के नियमो को नहीं जानते हैं या फिर डॉ सुशील सिन्हा ने जानबूझकर उसे कार्यक्रम में सिर्फ ₹100 में ऑनलाइन सदस्यता की बात कहकर कई चर्चाओं को जन्म दे दिया ।
कायस्थ पाठशाला से जुड़े लोगों ने वहां के वीडियो के वायरल होने के बाद यह प्रश्न पूछने शुरू कर दिए हैं कि आखिर डॉक्टर सुशील सिन्हा कायस्थ पाठशाला के अध्यक्ष के रूप में वहां गए थे तो उन्होंने कायस्थ पाठशाला की सदस्यता के बेसिक नियम को वहां लोगों से क्यों नहीं साझा किया जिसमें कहा जाता है कि कायस्थ पाठशाला का सदस्य वही बन सकता है जो, वर्ण संकर ना हो, पूर्ण रूप से कायस्थ अर्थात जिसके माता और पिता दोनों कायस्थ हो । इसके साथ ही वहां कार्यकारिणी के चुनाव के लिए भी प्रयागराज का निवासी होना बेहद जरूरी है। ताकि वह पाठशाला से संबंधित कार्यों में सहजता से भाग ले सके।
कायस्थ पाठशाला से जुड़े लोगों ने दावा किया कि शुद्ध रक्त कायस्थ होने की शर्त के कारण ही अमिताभ बच्चन शत्रुघ्न सिन्हा जैसे कई बड़े नाम आज तक कायस्थ पाठशाला के सदस्य नहीं बन पाए ऐसे में डॉक्टर सुशील सिन्हा कायस्थ पाठशाला के मूल नियम (जिसे मुंशी काली प्रसाद जी ने अपनी वसीयत में प्रमुख तौर पर लिखा था) को क्यों बदलना चाहते हैं
लोगो ने आरोप लगाया है कि गवर्निंग काउंसिल में अभी तक कमेटी के बनाए जाने की सूचना के बावजूद किस विश्वास पर डॉक्टर सुशील सिन्हा ने यह दावा देहरादून में कर दिया कि वह 27 अक्टूबर से ऑनलाइन सदस्यता ₹100 में शुरू कर देंगे जबकि अभी तक उस कमेटी के मेंबर भी नहीं चुने गए हैं । अविश्वास प्रस्ताव की तलवार लटकने के कारण पहले ही इस गवर्निंग काउंसिल की बैठक पर कोर्ट के आदेश से मामला पलट भी सकता है ।
ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि क्या 100 रुपए की सदस्यता डॉक्टर सुशील सिन्हा कायस्थ पाठशाला में कोई बड़ा खेल करने की कोशिश कर रहे हैं जिसकी जानकारी कई पाठशाला के वर्तमान सदस्यों को नहीं दी जा रही है क्या सुशील सिन्हा सदस्यता की ₹100 की सदस्यता की आड़ में कायस्थ पाठशाला का मूल नियम हटाने की तैयारी में है ?
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