ज़रूर पढ़े : तुझसे नाराज नहीं बीजेपी हैरान हूँ मैं, बिहार में कायस्थों की उपेक्षा से परेशान हूँ मैं : सोशल मीडिया पर छलका कायस्थों का दर्द, आर के सिन्हा भी आये साथकहते है विनाश के बाद ही सर्जन होता है , कभी सच्चीदानंद सिन्हा की दान की ज़मीन पर जिस बिहार विधान सभा की नीव रक्खी गयी , जहाँ कभी ४० से ज्यदा विधयाक होते थे , वहां आज अगर कायस्थ एक मंत्री पद के लिए भी योग्य ना समझे जाए तो समाज में निराशा होना स्वाभाविक है और उसका प्रतिकार भी I लेकिन इसी उपेक्षा में कायस्थ नेताओं को फिर से एक साथ लाने की तैयारी कर दी है Iकायस्थ खबर को मिली जानकारी के अनुसार बदली परिस्थियों में सभी कायस्थ नेताओं ने राज्य सभा सांसद आर के सिन्हा को कायस्थ समाज के लिए आगे बढ़ कर आवाज़ उठाने के लिए धन्यवाद दिया है और आगे के लिए मार्गदर्शन की अपील की है I वहीं आर के सिन्हा ने भी राजनीती में कायस्थ समाज के प्रति अपनी प्रतिबधता को दोहराते हुए कहा की की अंतिम सांस तक कायस्थों के लिए लड़ाई लड़ता रहूँगा Iसमाज में जिस तरह से पिछले दिनों अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के भी विवादित पक्षों ने अपने मतभेद को भुला कर एक साथ होने का फैसला किया है उससे भी कायस्थ समाज के राजनैतिक भविष्य पर एक उम्मीद जगी है , ऐसे में आर के सिन्हा ने नेतृत्व में बिहार एक बार फिर से एक नयी क्रांति की भूमिका लिखने जा रहा है ये कहना गलत नहीं होगा I

बिहार में राजनैतिक उपेक्षा से एक हो रहे है कायस्थ नेता, क्या बदलेगी फिजा,क्या कैबिनेट विस्तार में मिलेगा कायस्थों को मौका !!
कायस्थखबर ब्यूरो I बिहार ने देश को हमेशा क्रांति की शुरुआत दी है I चाहे वो चंपारण से महात्मा गांधी ने की हो या पटना से जयप्रकाश नारायण ने I लेकिन जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में क्रांति करने वाला कायस्थ समाज ४० सालो में इतना बंट गया की राजनैतिक हाशिये पर आ गया I स्थिति कम टिकट मिलने तक ही सिमटने लगी तो पिछले बिहार चुनावों में कायस्थ नेताओं ने कायस्थ समागम , कायस्थ महाकुम्भ और बुद्धिजीवी सम्मलेन जैसे बड़े कार्यक्रम तक किये I लेकिन शायद चित्रनिंद्रा और जातीय गणित में कम विश्वाश करने वाला कायस्थ समाज को अभी इससे भी बड़ी चोट लगनी बाकी थी Iबदले मोहोल में जब नितीश कुमार ने बीजेपी के साथ मिल कर सरकार बनायी तो अन्य सवर्ण जातियों की तरह कायस्थ समाज के नेताओं ने भी अपने अपने दल से कम से कम १ मंत्री तो बन ही जाने की उम्मीद बना ली थी I हालत तो यहाँ तक थे की राजीव रंजन , डा अजय आलोक और नितिन नवीन तो मंत्री माने ही जा रहे थे I जिसकी पुष्टि सभी बड़े चैनेल कर रहे थे Iलेकिन समय ने कायस्थ समाज को अभी और भी दिन दिखाने थे और वही हुआ बिहार में नितीश सरकार में ३ तो छोडिये १ भी कायस्थ नेता को मंत्री नहीं बनाया गया I जिस पर सबसे पहले मुखर तोर पर भाजपा के ही वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा ने किया I उधर जद यु में भी प्रवक्ता डा अजय आलोक की प्रतिक्रया बहुत जल्दी आई , डॉ अजय आलोक ने निराशा जताई की राजीव रंजन और डा गोपाल सिन्हा दोनों को ही कायस्थ समाज से बहुत वोट मिले थे ऐसे में जद यु कोटे से कम से कम इनमे से कोई तो होता I
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