मेरे महामंत्री एवं अध्यक्षीय काल मे कायस्थ पाठशाला मुख्यालय मे उपलब्ध अभिलेखो के आधार पर मै निम्न आख्या दे रहा हूँ।और इससे सम्बंधित यदि किसी को साक्ष्य देखना हो तो वह मेरे पास उपलब्ध हैं और यदि कोई त्रुटि हो तो उसका स्वागत है। जिससे कि आख्या मे उचित सशोंधन किया जा सके।
टीपी सिंह (तेज प्रताप सिंह )
ज़रूर पढ़े : कायस्थ पाठशाला : इतिहास एवं विकास (प्रथम भाग ) - टीपी सिंह की नजर से
दितीय चरण
१:- प्रातः स्मरणीय मुंशी काली प्रसाद कुलभास्कर जी की प्रेरणा से इलाहाबाद के रईस-ए-आज़म , चौधरी बाबू महादेव प्रसाद जी ने अपनी संपत्ति से एक ट्रस्ट बनाकर दिनांक ०९/०४/१९१४को कायस्थ पाठ शाला में निहित कर दिया और इस ट्रस्ट का मुतवल्ली।, अध्यक्ष कायस्थ पाठशाला को बनाया और प्रावधान किया की उनकी संपत्ति से अर्जित होने वाली आय का ५० प्रतिशत भाग गरीब कायस्थ बच्चो के उपयोग में किया जाय और 50 प्रतिशत भाग उनकी और नवासीगण चौधरी शिव नाथ सिंह को पीढ़ी दर पीढ़ी मिलती रहे चौधरी महादेव प्रसाद के वारिस ,पुत्री श्री मति भगवती देवी तथा कथित वारिस के बहकावे में चौधरी महादेव प्रसाद द्वारा सृजित सी0 बी0 एम0 ट्रस्ट की वैधता तक को चुनौती दी और अपने अधिकार का दावा किया, जिस मुकदमे को मुंशी अम्बिका प्रसाद , वरिष्ठ अधिवक्ता इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रिवी काउन्सिल तक अपील संख्या २३० तथा १०४ सन १९३३ लड़कर श्री मति भगवती देवी द्वारा किये गए दावे "की उक्त संपत्ति उनकी व्यक्तिगत संपत्ति वारिस के रूप में वैध हैं और चौधऱी महादेव प्रसाद के अधिकार उक्त संपत्ति को ट्रस्ट को देने का अधिकार नहीं है " को खारिज कराकर यह निर्णय कराया "कि सी0 बी0 एम्0 ट्रस्ट एक वैध ट्रस्ट है तथा उसमे निहित संपत्ति के मालिक कायस्थ पाठशाला प्रयाग है।" तथा तदतानुसार न्यास की सम्पूर्ण संपत्ति एवं राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराया और तब से दोनों ट्रस्ट की संपत्ति का रख रखाव कायस्थ पाठ शाला प्रयाग कर रही है प्रिवी कौंसिल का वह निर्णय दिनांक २०.११.१९३६ ए आई आर १९३७ प्रिवी कौंसिल के पेज ४ में उद्धृत है।?निवेदन÷ उपरोक्त्त लेख लिखने का उद्देश्य कायस्थ पाठशाला एंव समाज मे कायस्थ पाठशाला के स्वर्णिम इतिहास को न्यासी एव आने वाली कायस्थ पीढ़ी तक पहुंचाना है। इस लेख की श्रखंला मे नौ मुख्य चरणो एवं चरण मे मुख्य बिन्दु के विशेष सामयिक घटना उल्लेख किया जायेगा।अतः कायस्थ सभी बन्धु तक कायस्थों की पवित्र शैक्षणिक संस्था की सम्पूर्ण इतिहास आप सभी के सहयोग से सभी तक पहुंचाने का लक्ष्य रक्खा गया है यदि आपके पास संबंधित इतिहास से जुडी कोई जानकारी या उस समय की फोटो हो तो हम सभी आपके इस सहयोग के आभारी रहेंगे।२:- शिक्षा के विस्तार के प्रयास में जब सर सय्यद अहमद खान तथा महामना मदन मोहन मालवीय प्रयासरत थे , उस समय चौधऱी महादेव प्रसाद जी ने अलीगढ मुस्लिम विश्वविधालय तथा काशी हिन्दू विश्व विधालय की स्थापना के लिए रूपए 25000-25000 का दान किया था। उन्ही के द्वारा रूपए १०००००/- एक लाख की दानराशि तथा रूपी ३५०००/- उनकी पुत्री द्वारा दी गई दान राशि में रूपी 300000/- कायस्थ पाठशाला द्वारा मिलाकर उनकी शर्त के अनुसार उनके नाम से चौधरी महादेव प्रसाद उक्त ट्रस्ट में पैरा ३ में चौधरी महादेव प्रसाद के वक्त्तव्य का सार है कि
"मेरी मृत्यु के बाद साधारण सभा कायस्थ पाठ शाला इलाहाबाद मेरी जायदाद की मुतवल्ली होगी और कायस्थ पाठशाला के नाम से सभी जायदाद का नामांतरण राजस्व अभिलेखों में कराया जाय।"
उपरोक्त लेख के आधार पर यह सिद्ध होता है की मुंशी काली प्रसाद जी की सोच एवं मानसिकता के कायल बाबू चौधरी महादेव प्रसाद जैसी सख्सियत ने भी उस पवित्र सोच को वृहद् रूप देने के लिए अपनी सम्पति को समाहित कर दिया था। आज ८५ वर्ष बाद बाबू अम्बिका प्रसाद जी को हम सभी कायस्थ समाज की ओर श्रद्धांजलि अर्पित होनी चाहिए जिन्होंने उस समय एक साजिश को निसफल कर दिया। इस बाद की अनुभूति लगा पाना मुश्किल है की उस दौरान स्वर्गीय अम्बिका प्रसाद जी को कितनी विषमताओं का सामना करना पड़ा होगा। हम सभी आज उनकी उस समय लड़ी गई कायस्थ पाठशाला की अस्तित्व की लड़ाई के लिये कोटि कोटि सादर प्रणाम उस पुण्य आत्मा को नमन करते हैज़रूर पढ़े : कायस्थ पाठशाला : इतिहास एवं विकास (तृतीय भाग ) - टीपी सिंह की नजर से, जानिये चौधरी महादेव प्रसाद ट्रस्ट के विशेष प्रावधान
क्रमश:
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